Optionals IAS Mains Philosophy (in Hindi): Questions 18 - 25 of 27

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Question 18

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Appeared in Year: 2019

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चार्वाक के अनुसार निम्नलिखित युक्ति में क्या दोष है ।

सभी मनुष्य मरणशील है।

सुकरात एक मनुष्य है ।

इसलिए सुकरात मरणशील है।

Explanation

  • चार्वाक के अनुसार – उपरोक्त युक्ति एक निगमनात्मक अनुमान है।चार्वाक के अनुसार अनुमान संदेहात्मक है क्योंकि यह अनुमान व्याप्ति पर आधारित होता है।अनुमान और व्याप्ति में “अन्योन्याश्रित दोष” है। अनुमान को व्याप्ति के आधार पर और व्याप्ति को अनुमान के आधार पर सिद्ध करते हैं। हम दो वस्तुओं में व्याप्ति संबंध की स्थापना अनुमान के बिना नहीं कर सकते। जैसे सभ…

Question 19

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Appeared in Year: 2019

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सांख्य दर्शन के अनुसार जीव और पुरुष की तत्वमीमॉसीय स्थिति का समीक्षात्मक विवेचन कीजिए।

Explanation

  • सांख्य दर्शन के अनुसार दो ही प्रकार की वास्तविक सत्ताए हैं ।एक चेतन पुरुष और उसके विषय भूत जङ पदार्थ । पुरुष शुद्ध चैतन्य स्वरूप है ।जो देश, काल और कारण के बंधनों से रहित है। वह निर्गुण और निष्क्रिय होता है। ज्ञाता मात्र है जो बुद्धि, अहंकार , मन, इन्द्रिय, शरीर आदि समस्त विषयों के संसार से परे हैं ।जितनी भी क्रियाएं परिवर्तन होते हैं जितने भी भाव …

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Question 20

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Appeared in Year: 2019

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अरविंद के दर्शन की तत्वमीमॉसीय योजना में अति मानस की अद्वितीय स्थिति की व्याख्या कीजिए।

Explanation

  • श्री अरबिंदो ने अपने योग और सुपरमाइंड की अवधारणा के बारे में पुस्तक “आत्मकथात्मक नोट्स” में लिखा है। श्री अरबिंदो ने 1905 में योग का अपना अभ्यास शुरू किया। इसमें आध्यात्मिक अनुभव के आवश्यक तत्व जिन्हें दिव्य भक्ति और आध्यात्मिक प्राप्ति के मार्ग से प्राप्त किया गया था। इन्होने स्प्ट किया -अस्तित्व और आत्मा के दो सिरों को एकजुट करना और सामंजस्य स्था…

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Question 21

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Appeared in Year: 2019

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जब चार्वाक मानते है कि अनुमान ज्ञान का एक स्त्रोत नही है , तब क्या वे स़गत होते है? चर्चा कीजिए।

Explanation

चार्वाक प्रत्यक्ष को ज्ञान के प्राथमिक और उचित स्रोत के रूप में मानता है, जबकि अनुमान को सही या गलत और इसलिए सशर्त या अमान्य होने का खतरा माना जाता है। चार्वाक के लिए प्रत्यक्ष दो प्रकार का होता है, बाहरी और आंतरिक। बाह्य प्रत्यक्ष को पांच इंद्रियों और सांसारिक वस्तुओं के परस्पर क्रिया से उत्पन्न होने के रूप में वर्णित किया जाता है, जबकि आंतरिक प्र…

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Question 22

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Appeared in Year: 2019

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संश्लेषणात्मक -विश्लेषणात्मक विभेद के विरुद्ध क्वाइन के तर्कों की व्याख्या कीजिए।

Explanation

  • क्वाइन एक अनुभव वादी दार्शनिक है क्योंकि ज्ञान के स्रोत के रूप में वे अनुभव को स्वीकार करते है । साथ ही भाषा एवं अर्थ की व्याख्या भी अनुभव के आधार पर करते हैं उनके अनुभववाद को उत्कृष्ट अनुभववाद कहा जाता है । उत्कृष्ट अनुभववाद के दो दुराग्रह हैं दुराग्रह से यहां तात्पर्य विश्वास या धारणा से है जिसके लिए कोई प्रमाण नहीं है।
  • क्वाइन के दुराग्रह हैं –
    • पहल…

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Question 23

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Appeared in Year: 2019

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प्रकृति के अस्तित्व के लिए सॉख्य का कौन सा प्रमाण वास्तव मे दर्शाता है कि प्रकति केवल एक ही हो सकती है। अपने उत्तर के समर्थन मे तर्क दीजिए।

Explanation

  • प्रकृति ब्रह्मांड का अंतिम कारण है। इसे पहला कारण माना जाता है। ब्रह्मांड के सभी प्रभाव उस पर आधारित हैं। ब्रह्मांड का पहला तत्व होने के नाते, प्रकृति स्वयं अकारण, शाश्वत और सभी जगह व्याप्त हैं। इसलिए इसे “प्राण” कहा जाता है। चेतन तत्वों के रूप में, इसे जड़ कहा जाता है, और अप्रकट वस्तुओं के रूप में, इसे ‘अवयक्त’ कहा जाता है।
  • प्रकृति अजन्मा, स्वतंत्र…

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Question 24

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Appeared in Year: 2019

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क्या हेडेगर के लिए डिजाइन प्रमाणिक सत्ता है ।वह डिजाइन को किस प्रकार कालिकता से संबंध करते हैं। विवेचन कीजिए ।

Explanation

  • हेडेगर के अनुसार दार्शनिक चिन्तन का मूल लक्ष्य तत्वमीमासीय है। तत्व दर्शन फेनोमेनोलॉजी के रूप में ही संभव होता है। अतः वस्तुतः छिपा है सामान्य दृष्टि से वह दिखाई नहीं देता । बीच बीच में किसी किसी अनुभूति में सत्त झलकता सा प्रतीत होता है । फिर भी वह छिपा सा रह जाता है । फेनोमेनोलॉजी के रूप में देखने पर सत्त की झांकी मिल जाती है । हेडेगर आनुभविक जगत …

Question 25

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Appeared in Year: 2019

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मीमॉसा किस प्रकार वैदिक ज्ञान की प्रमाणिकता को स्वीकार करते है।

Explanation

  • मीमांसा वैदिक धर्मशास्त्र के नियम हैं।
  • दूसरे शब्दों में उनका मूल्य वेद के ग्रंथों की उनकी व्यवस्थित व्याख्या में निहित है और उनके सदियों पुराने सिद्धांतों की व्याख्या हर पवित्र पाठ पर लागू होती है।
  • रामानुज आचार्य के अनुसार, मीमांसा का अध्ययन वेदांत का अध्ययन करने के लिए एक पूर्वापेक्षा है, क्योंकि उनके नियम तर्क और बहस के उचित तरीके को परिभाषित करते …

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