Optionals IAS Mains Philosophy (in Hindi): Questions 10 - 17 of 27

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Question 10

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Appeared in Year: 2019

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तार्किक प्रत्यक्षवादी सामान्य प्रश्नों के अर्थ का विवरण किस प्रकार देते हैं ।क्या वही विवरण तत्वमीमॉसीय कथनो पर भी लागू किया जा सकता है। विवेचन कीजिए।

Explanation

तार्किक प्रत्यक्ष वादी विचार को आनुभविक तथ्यो के क्षेत्र तक सीमित रखना चाहते हैं। तथा अनुभवातीत अथवा काल्पनिक उड़ानों का सहारा नहीं लेने देते । तार्किक प्रत्यक्षवादी के अनुसार वास्तविक ज्ञान मात्र विज्ञान ही दे सकता है। अतः तार्किक प्रत्यक्षवादी का दो लक्ष्य बन गया था।

निषेधात्मक और भावात्मक।

  • निषेधात्मक कार्य यह था कि तत्व मीमॉसा का खंडन किया जाए । इ…

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Question 11

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Appeared in Year: 2019

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प्रश्न-चयन-स्वातन्त्रय और नियतिवाद की समस्या को सात्र किस प्रकार देखते है।

Explanation

  • सात्र के अनुसार – मानव अस्तित्व की अनुभूति का अर्थ है मानव की मौलिक स्वतन्त्रता की अनुभूति ।मानव को अस्तित्व की प्रथम अनुभूति मे ही अपने एकाकी पन की अनुभूति होती है।, वह अपनो को एक स्थिति मे वस्तुओ तथा अन्य से घिरा पाता है।, तथा साथ-साथ यह भी भान होता है कि ईश्वर के समान कोई सहारा नही है जिस पर वह झुक सके ।अतः वह क्या बनेगा , किस दिशा मे उसका अस्ति…

Question 12

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Appeared in Year: 2019

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वैशेषिक दर्शन में पदार्थ के रूप में अभाव की स्थिति का औचित्य बताऐ?

Explanation

  • वैशेषिक दर्शन प्राचीन भारत के आस्तिक दर्शन के छह स्कूलों में से एक है।
  • वैशेषिक मे पदार्थ की चर्चा की गइ है। यह प्राकृतिक विज्ञान में परमाणुवाद का एक रूप है। वैशेषिक के अनुसार भौतिक ब्रह्मांड में सभी वस्तुएं परमाणु से बनती हैं, और किसी के अनुभव पदार्थ के परस्पर क्रिया (परमाणुओं का एक कार्य, उनकी संख्या और उनकी स्थानिक व्यवस्था) , गुणवत्ता, गतिविधि, स…

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Question 13

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Appeared in Year: 2019

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स्वयं एवं ईश्वर से भिन्न अन्य वस्तुओं की सत्ता को देकार्त किस प्रकार सिद्ध करते हैं?

Explanation

  • देकार्त गणित के अत्यंत भक्त थे। गणित में निश्चयात्मकता है। उनके सिद्धांत निर्विवाद और निःस़देह सत्य है। देकार्त ने निश्चय किया कि दर्शन को भी गणित की सुदृढ नीव पर प्रतिष्ठित करना चाहिये। दर्शन का लक्ष्य है सत्य की खोज । सत्य के दो रूप है-
    • स्वतः सिद्ध सत्य
    • प्रमाण जन्य सत्य
  • स्वतः सिद्ध सत्य प्रमाण की अपेक्षा नहीं रखता, यह सत्य प्रमाणो से सिद्ध नहीं होता…

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Question 14

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Appeared in Year: 2019

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योगाचार बौद्ध बाह्य जगत के अस्तित्व का खंडन किस प्रकार करते हैं। चर्चा कीजिए।

Explanation

  • योगाचारों का कथन है कि बाह्य वस्तुओं के अस्तित्व को मानने से अनेक दोषो की उत्पत्ति होती है यदि कोई बाह्य वस्तु है तो वह या तो एक अणु मात्र है या अनेक अणुओं की बनी हुई है ।किंतु अणु तो इतना सूक्ष्म होता है कि उसका प्रत्यक्ष संभव ही नहीं हो सकता ।एक से अधिक वस्तुओं से बनी किसी भी वस्तु का प्रत्यक्ष भी नहीं हो सकता ।मान लीजिए हम एक घड़े को देखना चाहते…

Question 15

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Appeared in Year: 2019

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क्या कारण है कि मूल के दर्शन को सामान्य बुद्धि वास्तववाद कहा जाता है।

Explanation

  • मूर को विश्लेषणात्मक पद्धति तथा वस्तुवादी परंपरा का जनक माना जाता है । मूर ने वस्तुवादी परंपरा की स्थापना के लिए सामान्य ज्ञान विश्वासों की प्रतिष्ठा की। मूर के अनुसार सामान्य ज्ञान विश्वासों की दो विशेषताएं होती है।
  • इनमें अनिवार्यता होती है।
  • सामान्य ज्ञान विश्वास ऐसे विश्वास है जिन्हे सभी लोग स्वीकार करते हैं जो हमारे वास्तविक जीवन से संबंधित है।इन …

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Question 16

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Appeared in Year: 2019

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अन्यथाख्याति की व्याख्या करने मे ज्ञान लक्षण – प्रत्यक्ष की क्या भूमिका है।

Explanation

  • भारतीय दर्शन में संस्कृत शब्द ‘ज्ञान’ है।
  • ज्ञान के लिए और विभिन्न इंद्रियों में उपयोग किया जाता है।
  • बुद्धी (अनुभूति) या अनुभूति के अर्थ में प्रयुक्त
  • (चेतना) । कभी-कभी इसका मतलब उत्थान भी होता है
    • इसके अलावा, यह किसी भी तरह के संज्ञान को संदर्भित करता है।वैधता और ‘अमान्यता’ के बावजूद।

ज्ञान दो वर्गो में विभाजित है।

  • वर्गों को प्रमा और अप्रमा (वैध और अमान्य)…

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Question 17

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Appeared in Year: 2019

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दर्शाइए कि विटगेन्स्टाइन की अह़मात्रवाद की मीमांसा का चरमोत्कर्ष किस प्रकार निजी भाषा की मीमांसा में हो जाता है ।

Explanation

  • प्रतिज्ञप्तियो का चित्रण सिद्धांत में यह बताया गया है कि प्रतिज्ञप्ति तथ्यो को चित्रित करती है । प्रतिज्ञप्ति अपने तार्किक रूप के विषय में कुछ कह नहीं सकती। किंतु उसे प्रदर्शित कर देती है । विटगेन्स्टाइन का कहना है कि जिसके विषय में हम कुछ कह नहीं सकते हैं ।उसके विषय में मौन वांछनीय है। किंतु उसे भी दिखाया जा सकता है ।प्रदर्शित किया जा सकता है।
  • इसी …

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