Optionals IAS Mains Philosophy (in Hindi): Questions 1 - 9 of 27

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Question 1

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Appeared in Year: 2019

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अपने गुफा रूपक द्वारा प्लेटो क्या सिद्ध करना चाहता है?

Explanation

  • प्लेटो को पूर्व-प्रख्यात ग्रीक दार्शनिक माना जाता है, जो अपने डायलॉग्स के लिए जाना जाता है और अपनी एकेडमी की स्थापना के लिए जाना जाता है। ‘गुफा का रूपक’ प्लेटो द्वारा मानव धारणा से संबंधित एक सिद्धांत है।
  • प्लेटो ने दावा किया कि इंद्रियों के माध्यम से प्राप्त ज्ञान राय से अधिक नहीं है और वास्तविक ज्ञान प्राप्त करने के लिए, हमें इसे दार्शनिक तर्क के म…

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Question 2

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Appeared in Year: 2016

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जैन दर्शन के अनुसार नय अवधारणा का परिक्षण करें? यह किस प्रकार से स्याद्वाद से भिन्न है?

Explanation

जैन दार्शनिको के अनुसार जिस दृष्टिकोण से वस्तु मे जिस गुण धर्म को बताया जाता है । उसे नय कहते है । नय केवल कि सी वस्तु के समझ ने के प्रकार का ही नाम है। इस प्रकार नय अनेक है। अतः जैन दार्शनिक प्रत्येक नय के साथ स्यात् शब्द जोड़ देते हैं ।इससे स्पष्ट हो जाता है कि कोई भी नय निरपेक्ष रूप से सत्य नहीं है ।जैन दार्शनिको ने किसी भी विषय को समझने के लिए स…

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Question 3

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Appeared in Year: 2016

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सृष्टि के विकास की प्रक्रिया मे ‘प्रकृति’ की भूमिका की आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए?

Explanation

  • साख्य दर्शन एक द्वैतवादी दर्शन है ।इसके अनुसार प्रकृति और पुरुष संसार के दो परम तत्व है ।प्रकृति जगत का मूल कारण है ।और पुरुष केवल निरपेक्ष दृष्टा है। प्रकृति एक है इसलिए उससे विश्व की व्यवस्था की व्याख्या हो जाती है । प्रकृति जड़ होने के साथ ही सूक्ष्म पदार्थ भी है। इस लिए प्रकृति संपूर्ण विश्व की जिसमें स्थूल तथा सूक्ष्म पदार्थ है , व्याख्या करने …

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Question 4

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Appeared in Year: 2019

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कया ह्यूम के अनुसार कारण संबध मे कोई अनिवार्यता का तत्व होता है?

Explanation

कारण कार्य का सिद्आन्त ही सभी सिद्धान्त का आधार स्तम्भ हैं। इसलिए कारणता के सिद्धान्त को अनिवार्य तथा सार्वभौमिक माना जाता है।अनिवार्य का अर्थ है कि एक का भाव होने पर दूसरे का भाव होना और एक का अभाव होने पर दूसरे का अभाव निश्चित रूप से होना।इसका उल्टा नही होता। सार्वभौम का अर्थ है कि यह नियम सभी देश और सभी काल के लिए सनातन रूप से सत्य है। ह्यूम के …

Question 5

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अरस्तु के अनुसार द्रव्य मे विकासवादी परिवर्तनो के क्या कारण है?

Explanation

  • अरस्तु के अनुसार हमारा सॅसार परिणामी और गतिशील है।यह परिणाम और गति एक निश्चित लक्ष्य के कारण होती है।विश्व मे विशिष्टादैव्त है. यहॉ भेद मे भेद अनुस्यूत है। सॅसार के विविध पदार्थ उस भेद को पाने के लिए गतिशील है।
  • गति या परिणाम वस्तुत: विकास है।द्रव्य का स्वरूप की ओर विकास। साध्य का सिद्ध की ओर विकास । प्रत्येक गति या परिणाम के चार कारण होते है ।
According to Aristotle Our World Results
  • …

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Question 6

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Appeared in Year: 2019

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क्या हुसर्रल द्वारा विभ्रान्ति को एक सभिप्राय क्रिया माना जा सकता है?

Explanation

  • हुसर्रल को फेनोमेनोलाजी का प्रणेता कहा जाता है। हुसर्रल के विचारो पर ब्रेन्टानो के विशयापेक्षी सिद्वान्त का प्रभाव पडा। इस सिद्वान्त के अनुसार चेतना एक दिषा है, सर्वथा विशयोन्मुख है। अर्थात चेतना को विशय की अपेक्षा होती ही है। इसी सिद्धान्त के प्रभाव में हुसर्रल को एक आधार मिल जाता है। चेतना के विश्लेशण में प्रदत्त विशय को ढूॅढ लेने का । इसी सिद्धा…

Question 7

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Appeared in Year: 2019

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हेगेल के दर्शन में सत्य की प्राप्ति में , दव्न्दात्मक पद्धति की क्या भूमिका है?

Explanation

  • हेगेल का विश्वास है कि तत्व विज्ञान रूप और विज्ञानगम्य है। जो कुछ है वह विज्ञानगम्य है। हेगल के अनुसार प्रज्ञा नियामक व उपादान रूप दोनो है। हेगल के अनुसार परम तत्व आत्म रूप है। यह विशिष्टाद्वैत रूप है। हेगल के अनुसार परम तत्व निरपेक्ष विज्ञान रूप या षुद्ध चेतन्य रूप है। विज्ञान की ही एकम़ात्र सत्ता है । जिसे हम वस्तु जगत कहते है। वह भी विज्ञान का ह…

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Question 8

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Appeared in Year: 2019

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उद्यन किस प्रकार कार्यात् , आयोजनात् , धृत्यादेः, श्रुतेः के द्वारा ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध करते हैं ।विवेचना कीजिए।

Explanation

न्याय दर्शन के प्रसिद्ध विद्वान उदयन ने प्रसिद्ध रूप से नौ तर्कों का उपयोग करके भगवान के अस्तित्व को साबित करने का प्रयास किया -

  • कार्यात् ( “प्रभाव से” ) : एक प्रभाव एक कारण से उत्पन्न होता है, और इसी तरह, ब्रह्मांड का भी एक कारण होना चाहिए। कारण (नैयायिकों के अनुसार) तीन प्रकार के होते हैं: समवायि (ब्रह्मांड के मामले में परमाणु) , असमवायी (परमाणुओं…

Question 9

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Appeared in Year: 2019

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देश और काल के अनुभवातीत के लिए कान्ट किस प्रकार तर्क प्रस्तुत करते है । विवेचना कीजिए।

Explanation

  • कान्ट बुद्धिवाद और अनुभववाद के दोष और गुण दिखला कर अपना समन्वयात्मक मत प्रस्तुत करते हैं हमारा ज्ञान इंद्रीय- संवेदन और बुद्धि विकल्प दोनों के सम्मिश्रण से बनता है इससे पहले कि ये संवेदन बुद्धि विकल्पों के सांचे में ढल कर ज्ञान के रूप में निकले यह आवश्यक है कि ये संवेदन देश काल के द्वारों में से निकलकर बुद्धि विकल्पों तक पहुंचे।
  • देशकाल अनुभव जन्य नह…

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