IAS (Admin.) IAS Mains GS Paper 1 in Hindi (Geography, Art & Culture, and History) Indian Heritage and Culture-Literature Study Material (Page 13 of 21)

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दार्शनिक प्रवृत्तियाँ: न्याय दर्शन (Philosophical Tendencies: Nyaay Darshan)

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  • न्याय दर्शन के प्रर्वत महर्षि गौतम माने जाते हैं। इनका ग्रंथ ‘न्याय सूत्र’ इस दार्शनिक प्रवृत्ति का पहला ग्रंथ माना जाता है। महर्षि गौतम को अक्षपाद, आक्षरण और मेघातिथि के नाम से भी जाना जाता हैं। 12वीं सदी में न्याय दर्शन को नया रूप ‘गणेश उपाध्याय’ ने अपने ग्रंथ ‘तत्वचिंतामणी’ में दिया। इसे नव्य …

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दार्शनिक प्रवृत्तियाँ: वैशेषिक दर्शन (Philosophical Tendencies: Vaisheshik Darshan)

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  • इस दर्शन के प्रवर्र्तक महर्षि कणाद माने जाते हैं। इसे कणाद दर्शन या औलूक्य दर्शन भी कहते है। इस दर्शन का संबंध न्याय दर्शन से माना जाता है। कणाद सूत्र या वैशेषिक सूत्र इस दर्शन का मूल ग्रंथ है। इस पर प्रशस्त पादाचार्य ने ‘पदार्थ धर्म संग्रह’ नामक ग्रंथ टीकास्वरूप लिखा है। पदार्थ विषयक चर्चा के कारण इसका नाम वैशेषिक दर्शन पड़ा।
  • इस दर्शन के अनुसार संपूर्ण विश्व पद और अर्थ की परिधि म…

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