IAS (Admin.) IAS Mains GS Paper 1 in Hindi (Geography, Art & Culture, and History) Indian Heritage and Culture-Literature Study Material (Page 11 of 21)

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दार्शनिक प्रवृत्तियाँ: बौद्ध दर्शन के सिद्धांत (Philosophical Tendencies: Principals of Buddhism Philosophy)

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ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ बौद्ध दर्शन का मौलिक सिद्धांत ‘क्ष्णिकवाद’ है। इसका अर्थ है कि किसी वस्तु का अस्तित्व सनातन नही है। किसी वस्तु का अस्तित्व कुछ ही काल तक रहता है। एक प्रवाह दूसरे प्रवाह को जन्म देता है। दूसरा तीसरे को और तीसरा चौथे को। यही प्रवाह की नित्यता है। वास्तव में कोई भी वस्तु शाश्वत नहीं है, सभी अनित्य, क्षणिक और परिणामी हैं। वस्तु में प्रतिक्षण परिवर्तन हो रहा है। जो आज है वह कल नहीं। कल उसका स्वरूप दूसरा होगा। वस्तु की स्थिति क्षण भर के लिए है।

  • बौद्ध दार्शनिक ‘अर्थक्रियाकारत्वि’ में विश्वास रखते हैं। उनके अनुसार किसी वस्तु की सत्ता का लक्षण ‘अर्थक्रियाकारित्व’ या किसी कार्य को उत्पन्न करने की शक्ति से है। वर्तमान भूत से जन्य है यानी भूत वर्तमान को उत्पन्न करने में समर्थ है। प्रत्येक क्षण अपने पूर्व क…

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दार्शनिक प्रवृत्तियाँ: हीनयान और महायान में अंतर (Philosophical Tendencies: Different between Hinaayan and Mahaayan)

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हीनयान वज्रयान और महायान बौद्ध धर्म के तीन प्रमुख संप्रदाय हैं। कुछ विद्वान वज्रयान को महायान की ही शाखा मानते हैं। हीनयान संप्रदाय श्रीलंका, वियतनाम लाओस आदि पूर्वी देशों में ज्यादा फैला जबकि महायान चीन जापान तिब्बत आदि देशों में फैला। इन दोनों संप्रदायों में अंतर निम्नलिखित बिंदुओ के संदर्भ में समझा जा सकता है।

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ हीनयान संप्रदाय बुद्ध की मूलभूत शिक्षाओं पर अधिक बल देता है जबकि महायान बुद्ध की शिक्षाओं की व्याख्या पर जोर देता है।

  • इन दोनों संप्रदायों में एक प्रमुख अंतर व्यक्ति और समष्टि का है। हीनयान के अनुसार व्यक्ति को खुद के मोक्ष के लिए प्रयास करने चाहिए।
  • हीनयान का चरम आदर्श ‘अ…

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