IAS (Admin.) IAS Mains GS Paper 1 in Hindi (Geography, Art & Culture, and History) Indian Heritage and Culture-Literature Study Material (Page 10 of 21)

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दार्शनिक प्रवृत्तियाँ: जैन दर्शन (Philosophical Tendencies: Jainism Philosophy)

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जैन साहित्य के अनुसार ‘जिन’ का आशय है ‘जीतने वाला’ ं। सभी प्रकार के विकारों पर विजय प्राप्त करने वाला जिन कहलाता है, जिनों के द्वारा उपदेश वाले धर्म को जैन धर्म कहते है। इन जिनों को तीर्थंकर भी कहा गया है। जैन धर्म के अनुसार अब तक ‘चौबीस तीर्थंकर’ हुये हैं। इनमें ऋषभदेव आदि और भगवान महावीर अंतिम तीर्थंकर है। जैन साहित्य अधिसंख्य मात्रा में उपलब्ध हैं। भगवान महावीर के उपदेशों को उनके गणधरों ने ग्रंथ रूप में रचा। उनके उपदेशों को बारह अंग और चौदह पूर्व के रूप में निबद्ध किया। इसी तरह दिगंबर और श्वेतांबर साहित्य …

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दार्शनिक प्रवृत्तियाँ: बौद्ध दर्शन (Philosophical Tendencies: Budhism Philosophy)

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  • महात्मा बुद्ध ने किसी प्रकार का ग्रंथ नही लिखा और न ही लिखने का आदेश दिया। उनके शिष्यों ने ही उनके उपदेशों का संकलन किया। इन उपदेशों को तीन भागों सुत्त पिटक, विनय पिटक, और अर्भिधम्म पिटक में संकलित किया गया है। बाद में पल्लवित हुये बौद्ध साहित्य का आधार यही त्रिपिटक रहे। महात्मा बौद्ध ने उपदेशाेे का सारांश उनके द्वार…

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