IAS (Admin.) IAS Mains GS Paper 1 in Hindi (Geography, Art & Culture, and History) Indian Heritage and Culture-Art Forms Study Material (Page 43 of 51)

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रंगमंच, नाटक और सिनेमा: हिन्दी रंगमंच परंपरा (Theaters, Drama and Cinema: Hindi Theater Tradition)

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  • हिन्दी रंगमंच का प्रारंभ 1853 ई. में नेपाल के माटगांव में अभिनीत विद्याविलाप नाटक से माना जाता है। किन्तु यह नेपाल तक ही सीमित रह गया। वस्तुत: हिन्दी रंगमंच का नवोत्थान 1871 ई. में स्थापित अल्फ्रेड नाटक मंडली से हुआ जिसने भारतेंदु, राधाकृष्णदास के नाटकों का मंचन प्रस्तुत किया। राधेश्याम कथावाचक इस मंडली के प्रमुख नाटककार थे। इस मंडली के मंच पर स्त्री चरित्रों की भूमिका पुरुष पात्र ही किया करते थे।
  • हिन्दी में अव्यावसायिक रंगमंच का सूत्रपात 1868 ई. में बनारस थियेटर के साथ हुआ। 1884 ई. में बनारस में नेशनल (राष्ट्रीय) थियेटर (ंरंगशाला) की स्थापना हुई। भारतेंदु के ‘अंधेर नगरी’…

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रंगमंच, नाटक और सिनेमा: राष्ट्रीय नाट्‌य विद्यालय (Theater, Drama and Cinema: National School of Drama)

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  • भारत में रंगमंच के विकास के लिए संगीत नाटक अकादमी ने अप्रैल 1959 में ‘राष्ट्रीय नाटय विद्यालय’ (रानावि) की स्थापना की। इस विद्यालय ने न सिर्फ देश की महत्वपूर्ण रंग प्रतिभाओं, निर्देशकों, अभिनेताओं को जन्म दिया बल्कि हिन्दी के नाटकों के मंचन एवं रंगमंच के विकास में 1950 के बाद ऐतिहासिक दायित्व निभाया है। इस विश्वविद्यालय में ‘रंग-मंडल’ की स्थापना 1964 ई. में की गई जो उसका प्रदर्शन विभाग है। ‘रंग-मंडल’ ने शैलीगत संगीत से लेकर भारतीय नाट्‌य की समकालीन कृतियों, अनुवादों और विदेशी भाषाओं के नाटकों के नाट्‌य रूपांतरणों की 200 से अधिक प्रस्तुतियाँ की हैं। रंग-मंडल के साथ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय ख्याति के प्रमुख रंग निर्देशकों ने काम किया है। रंग-मंडल भारत के मुख्य शहरों में प्रस…

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