IAS (Admin.) IAS Mains GS Paper 1 in Hindi (Geography, Art & Culture, and History) Indian Heritage and Culture-Art Forms Study Material (Page 13 of 51)

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नृत्य: मोहनीअट्‌टम (Dance: MohaniAttam)

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  • मोहनी का आशय है लुभाना और अट्‌टम का अर्थ है नृत्य अर्थात मोहनीअट्‌टम का आशय लुभाने वाले नृत्य से हैं। यह एकल महिला द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला ऐसा नृत्य है है जो रागात्मकता उत्पन्न करता है। तकनीक के स्तर पर मोहनीअट्‌टम कथकली और भरतनाट्‌यम के बीच हैं। इसमें भरतनाट्‌यम की मनोहरता और लालित्य, कथकली की ताकत और गतिशीलता है। मोहनीअट्‌टम की तकनीकी संरचना काफी हद तक भरतनाट्‌यम के समान है। मोहनीअट्‌टम में इशारों की भाषा बहुत हद तक भरतनाट्‌यम के समान होती है लेकिन इसमें कथकली परंपरा के तत्त्व भी शामिल हैं। भरतनाट्‌यम की तरह मोहनीअट्‌टम शुद्ध नृत्य के साथ-साथ भाव भंगिमा वाला नृत्य है जिसकी प्रस्तुति नाट्‌यशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार होती हैं। मोहनीअट्‌टम की प्रस्तुति चोलकेतु, वर्णम, पदम, तिल…

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नृत्य: कुचिपुड़ी (Dance: Kuchipudi)

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  • कुचिपुड़ी आंध्र प्रदेश की एक नृत्य शैली है। इसका जन्म राज्य के कृष्णा जिले के कुचेलापुरी या कुचेलापुरम में हुआ। कुचिपुड़ी कला का जन्म भी अन्य भारतीय शास्त्रीय नृत्यों की तरह धर्म से जुड़ा हुआ है। एक लंबे समय से यह कला आंध्र प्रदेश के कुछ मंदिरों में वार्षिकोत्सव के अवसर पर प्रदर्शित की जाती थी। पूर्व परंपरा के अनुसार यह नृत्य केवल ब्राह्मण पुरुषों द्वारा किया जाता था। यह नृत्य वास्तव में उन नाटकों का प्रदर्शन था जो तेलुगु भाषा में लिखे जाते थे। इस नृत्य नाटिका को अट्‌टा भागवतम कहते थे।
  • कुचिपुड़ी का मंचन खुले और अभिनय के लिए तैयार मंचों पर होता है। इसका प्रस्तुतिकरण कुछ पारंपरिक रीतियों के साथ शुरु होता है और फिर दर्शकों के समक्ष पूरा दृश्य प्रदर्शित किया जाता है। इसके बाद सूत्रधार मंच पर सहयोगी संगी…

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