IAS (Admin.) IAS Mains GS Paper 1 in Hindi (Geography, Art & Culture, and History) Indian Heritage and Culture-Art Forms Study Material (Page 11 of 51)

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नृत्य: शास्त्रीय नृत्य (Dance: Classical Dance)

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  • शास्त्रीय नृत्य में नर्तक अपनी भंगिमाओं के जरिये एक कथा को नृत्य के माध्यम से मंचन कर प्रस्तुत करता है। कुछ शास्त्रीय नृत्यों में जैसे कथकली, कुचिपुड़ी में लोकप्रिय हिन्दू पौराणिक कथाओं का अभिनय होता है।
  • भारतीय शास्त्रीय नृत्यों के भावापूर्ण नर्तन हेतु भंगिमाओं का जटिल भंडार होता है। शरीर के प्रत्येक अंग के लिए निश्चित भंगिमाओं का विधान किया गया है। इन अंगों में आँखे व हाथ सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैंं सिर के लिए 13 भौंहों और ठोड़ी के लिए 7 - 7, नाक और गालों के लिए 6 - 6, गर्दन के लिए 9, वक्ष के लिए 5 व आँखों के लिए 36, पैरों व इसके निचले अंगों के लिए 32 (जिनमें से 16 भूमि और 16 वायु के लिए निर्धारित हैं।) भंगिमाओं का व…

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नृत्य: शास्त्रीय नृत्य की प्रमुख शैलियाँ (Dance: Major Styles of Classical Dance)

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  • नृत्य का यदि भारतीय परंपरा में अवलोकन करें तो यह स्पष्ट होगा कि इसकी जड़ें परंपरा के विकास में क्रम में सन्निहित हैं। इसी क्रम के परिणामस्वरूप इस विशाल उपमहादव्ीप में नृत्यों की विभिन्न विधाओं ने जन्म लिया है। प्रत्येक विधा ने विशिष्ट समय व वातावरण के प्रभाव से आकार ग्रहण किया है। प्रत्येक विधा किसी विशिष्ट क्षेत्र अथवा व्यक्तियों के समूह के लोकाचार का प्रतिनिधित्व करती है। शास्त्रीय नृत्यों में भरतनाट्‌यम, कुचीपुड़ी, कथक, कथकली, ओडिसी, मणिपुरी, मोहिनीअट्‌टम और सत्रिय शामिल हैं।
  • इन नृत्यों में दो प्रकार के भाव परिलक्षित हैं एक है तांडव और दूसरा लास्य। तांडव भगवान शिव के रौद्र पौरुष का प्रतिनिधित्व करत…

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