IAS (Admin.) IAS Mains GS Paper 1 in Hindi (Geography, Art & Culture, and History) Indian Heritage and Culture-Architecture Study Material (Page 9 of 41)

Subscribe now to access pointwise, categorized & easy to understand notes on 283 key topics of IAS (Admin.) IAS Mains GS Paper 1 in Hindi (Geography, Art & Culture, and History) covering entire 2021 syllabus. With online notes get latest & updated content on the device of your choice. View complete topic-wise distribution of study material. Unlimited Access, Unlimited Time, on Unlimited Devices!

View Features or View Sample.

Rs. 500.00 -OR-

How to register? Already Subscribed?

भारतीय स्थापत्य: पल्लवकालीन स्थापत्य (Indian Architecture: Pallavavad Architecture)

Edit
  • पल्लव शासकों का काल कला एवं स्थापत्य के लिए बहुत प्रसिद्ध है। उनकी कला वास्तव में भारतीय कला के सर्वाधिक गौरवशाली अध्यायों में शामिल है। पल्लव कला के विकास की शैलियों को हम क्रमश: महेंद्र शैली (610 - 640 ई.) , मामल्ल शैली (640 - 674 ई.) और राजसिंह शैली (674 - 800 ई.) में अलग-अलग देख सकते हैं।
  • ‘महेंद्र शैली’ में प्रस्तर काट कर गुफा मंदिरों का निर्माण किया गया। इन्हें मंडप कहा गया। ये मडंप खंभों वाले बरामदे हैं और जिनके दूसरे सिरे पर गर्भगृह बनाया गया है। इन मंडपों में मंडगपट्‌टु का त्रिमूर्ति मंडप, महेंद्रवाड़ी का महेंद्रविष्णु गृहमंडपम, मामंडूर का विष्णुमंडप, त्रिचुरापल्ली का ललितांकुर ग्रहमंडप विशेष उल्लेखनीय हैं। ‘मामल्ल शैली’ में मंडप के अलावा एक ही पत्थर या एकाश्मक मंदिर या रथ बनाये गये। स्थापत्य कल…

… (5 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

भारतीय स्थापत्य: चोलकालीन स्थापत्य (Indian Architecture: Cholak Architecture)

Edit
  • दक्षिण में जिस कला को पाड्‌य और पल्लव शासकों ने जन्म दिया, उसे चोल शासकों ने उत्कर्ष पर पहुँचाया। उन्होंने अपने चार सदियों के शासनकाल में राज्य में बड़ी मात्रा में मंदिर बनवाये। उनकी कला का अनुकरण पड़ोसी राज्यों एवं देशों तक में किया गया। चोलों ने मंदिरों के निर्माण के लिए ईंटों की जगह पत्थरों और शिलाओं का प्रयोग किया। इस काल के मंदिरों का आकार बहुत विशाल है और इनका प्रयोग धार्मिक कार्यो के अलावा सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक प्रयोजनों के लिए भी होता था। इसलिए शासकों ने इन मंदिरों के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए अनुदान दिये। चोल कला को अध्ययन की सुविधा के लिए दो भागों में बांटा गया है। पहले भाग में दसवीं सदी तक निर्मित चोल मंदिर जैसे तिरुकट्‌टलाई का सुंदरेश्वर मंदिर, कन्नूर का बालसुब्रह्यण्यम …

… (1 more words) …

Subscribe & login to view complete study material.

Developed by: