Modern Indian History-Freedom Struggle [IAS (Admin.) IAS Mains GS Paper 1 in Hindi (Geography, Art & Culture, and History)]: Questions 7 - 14 of 16

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Question 7

Freedom Struggle
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Appeared in Year: 2006

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स्वतंत्रता-पूर्व काल में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रति भारत के उद्योगपतियों की क्या अभिवृत्ति थी। (250 शब्द)

Explanation

  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के समय से ही भारत के उद्योगपति वर्ग ने राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय रूप से संगठनात्मक भूमिका का निर्वहन किया। कुछ इतिहासकार तो यहां तक मानते हैं- कि कांग्रेस की स्थापना उद्योगपति वर्ग के दबाव में ही किया गया था। कांग्रेस की भी आंरभिक कोशिश एक राष्ट्रीय पार्टी (दल) बनने की थी।
  • इस क्रम में उसने समाज के सभी वर्गों को…

Question 8

Freedom Struggle
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Appeared in Year: 2004

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असहयोग आंदोलन का समालोचनात्मक आकलन कीजिए (250 शब्दों)

Explanation

  • गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन चलाने के मूल में अनेक घटनाओं का महत्वपूर्ण योगदान था। जिसमें प्रथम विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियां, रौलेट एक्ट, 1919 सुधार अधिनियम, जलियावाला बाग हत्याकांड, खिलाफत आंदोलन इत्यादि प्रमुख हैं। असहयोग आंदोलन के परिणामस्वरूप गांधी जी सहित कई अन्य नेताओं ने भी उपाधियाँं वापस कर दी। सी. आर. दास, मोतीलाल नेहरू, राजेन्द्र प…

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Question 9

Freedom Struggle
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Appeared in Year: 1996

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किन कारणों से 1920 में गांधी जी का संवदेनापूर्ण सहयोग का दृष्टिकोण असहयोग में बदल गया? इसके क्या परिणाम हुए। (250 शब्दों)

Explanation

  • गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन प्रारंभ करने के मूल में अनेक घटनाओं का योगदान है। प्रथम विश्वयुद्ध में अंग्रेजो ने जीत के बाद भारतीयों स्वशासन का वचन देकर उन्हें प्रथम विश्वयुद्ध में शामिल कर लिया। जिसके परिणामस्वरूप भारतीयों की आर्थिक स्थिति अत्यंत शोचनीय हो गई।
  • साम्राज्यवादियों ने स्वशासन के जो आश्वासन दिए थे उन्हें भुलाकर पुन: उपनिवेशों को आपस में …

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Question 10

Freedom Struggle
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Appeared in Year: 2001

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खिलाफत आंदोलन के उद्देश्यों और लक्ष्यों का विवेचन कीजिए। यह कहां तक सफल रहा? (150 शब्दों)

Explanation

  • खिलाफ आंदोलन भारतीय मुसलमानों का मित्र राष्ट्रा के विरुद्ध विशेषकर ब्रिटेन के खिलाफ तथा तुर्की के खलीफा के समर्थन में था। तुर्की का खलीफा समूचे विश्व के ‘सुन्नी मुसलमानों’ का धर्मगुरु माना जाता था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा मुसलमानों को दिया गया आश्वासन पुरा न करना, मित्र राष्ट्रों द्वारा तुर्की का बंटवारा, खलीफा को अपदस्थ करना …

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Question 11

Freedom Struggle
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Appeared in Year: 2007

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क्या आपके विचार में खिलाफत आंदोलन को महात्मा गांधी के समर्थन ने उनकी धर्मनिरपेक्ष साख को बट्‌टा लगा दिया था? अपना तर्क प्रस्तुत कीजिए। (250 शब्द)

Explanation

  • भारत में खिलाफत आंदोलन मूलत: एक धार्मिक विषय को लेकर हुआ। इसका मुख्य कारण तुर्की के मुस्लिम खलीफा के प्रति ब्रिटेन के असम्मानजनक व्यवहार एवं उसके राज्य के ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाए जाने के कारण पूरे मुस्लिम जगत में व्याप्त असंतोष था। उपनिवेशवादी इतिहासकार इसे एक धार्मिक आंदोलन की संज्ञा देते हैं। इस आंदोलन में गांधी जी की भागीदारी को उन्होंने उनक…

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Question 12

Freedom Struggle
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Appeared in Year: 1994

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होमरूल आंदोलन में ऐनीबेसेंट की भूमिका स्पष्ट कीजिए। (150 शब्दों)

Explanation

  • भारत में आंदोलन के प्रणेता बालगंगाधर तिलक एवं एक आयरिश महिला ऐनीबेसेंट थी। होमरूल आंदोलन भारत में 1916 में प्रारंभ हुआ, लेकिन एनी बेसेंट ने 1914 में ही लंदन में ‘होमरूल लीग’ की स्थापना कर ली थी। 1915 के प्रारंभ से ही इन्होंने ‘न्यू (नया) इंडिया (भारत) ’ और ‘कामनवील’ नामक दो समाचार-पत्रों द्वारा आंदोलन छेड़ दिया। जनसभाएं एवं सम्मेलन आयोजित किए। उनकी …

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Question 13

Freedom Struggle
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Appeared in Year: 2008

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असहयोग आंदोलन ने राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की। स्पष्ट कीजिए (250 शब्द)

Explanation

  • गांधी जी के भारतीय राजनीति में प्रवेश के बाद असहयोग आंदोलन पहला राष्ट्रवादी आंदोलन था। यह दक्षिण अफ्रीका में उनके संचित राजनीतिक अनुभवों एवं भारतीय जनता के बीच लगातार कार्यरत रहने की उनकी अपनी राजनीतिक प्रविधि का पहला सशक्त मंचीय प्रयोग था। असहयोग के पूर्व खिलाफत आंदोलन ने उनकी भागीदारी से हिन्दू-मुस्लिम एकता का जो वातावरण बना, उसने असहयोग आंदोलन क…

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Question 14

Freedom Struggle
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Appeared in Year: 1991

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भारत में स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम चरण विशेषकर 1947 में प्रारंभ से स्वतंत्रता प्राप्ति तक का विवरण दीजिए। (250 शब्दों)

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  • भारत में स्वतंत्रता प्राप्ति की पृष्ठभूमि तो मंत्रिमंडल मिशन योजना के अनुसार जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार के फलस्वरूप तैयार हो गई थी। लेकिन 20 फरवरी, 1947 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एटली की हाऊस (घर) ऑफ (के) कॉमन्स (सामान्य) में यह घोषणा कि जून 1948 तक प्रभुसत्ता भारतीयों के हाथ में दे देंगे, इसे अंतिम रूप से स्वीकार भी कर ली थी…

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