Reading Comprehension (IAS Mains Compulsory-Hindi): Questions 12 - 23 of 27

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Passage

हम औद्योगीकरण के एक तेज दौर से गुजर रहे हैं तथा अपने उद्योगों में हम बड़ी संख्या में लोगों को नियुक्त कर रहे हैं। भारत में कुछ इस प्रकार की धारणा-सी जान पड़ती है कि आप जिस विशेष कार्य को करना चाहते हैं उसके विषय में कितना जानते हैं इस बात का महत्व नहीं है, इससे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि आप किसे जानते हैं - ताकि रोजगार पाने के लिए प्रभाव का उपयोग किया जा सके। लोग यह नहीं सोचते कि अच्दे परिणामों के लिए योग्यता आवश्यक है। हमारी शिक्षा में उत्कृष्टता के विकास का एक सुनिश्चित महत्व वाला स्थान है और यदि उत्कृष्टता के विकास को महत्व नहीं दिया जाता है तो इससे योग्यता का अपमान होता है। इस बात सक एक ओर तो हमारी शिक्षा प्रणाली विषाक्त और दूषित होती है तथा दूसरी ओर सामाजिक शिक्षा के लिए आन्दोलन प्रारम्भ करने की इच्छा का गलता घुट जाता है।

जब किसी पुल का निर्माण किया जाता है अथवा सड़क बनाई जाती है तो बालू, सीमेन्ट, चूने आदि के उचित मिश्रण के लिए एक निश्चित अनुपात का अनुसरण किया जाता है ताकि पुल और सड़क का निर्माण अच्छा हो सके और वे अधिक समय तक बने रहें। किन्तु हमारा अनुभव इस विषय में हमें अध: पतन की कहानी ही सुनाता है और हमें पता चलता है कि किसी बाँध में दरारें आ गई है या कोई सड़क वर्षा के कारण बह गई है।

यह विषय गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ा हुआ है, जिसका सम्बन्ध केवल भौतिक सामग्री से नहीं है अपितु मनुष्यों तथा उनके उत्तरदायित्व विषयक बोध से भी है।

दुर्भाग्यवश हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था से ऐसी कुछ परिस्थितियों का निर्माण होता है, जिनमें योग्यता को एक व्यवस्थित रूप से उपेक्षित किया जाता है और लोगों को यह कहते हुए सुना जाता है कि इस देश में गुण का कोई महत्व नहीं है। इस बात से यह भावना उत्पन्न होती है कि यहाँ योग्यता, कार्यक्षमता और नैतिक औचित्य को महत्व दिये बिना कोई भी लोक सेवा का पद प्राप्त किया जा सकता है और सार्वजनिक कार्य किया जा सकता है।

Question number: 12 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Appeared in Year: 2011

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हम योग्यता के प्रति सम्मान कब खो देते हैं?

Question number: 13 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

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योग्यता, कार्यक्षमता और उत्तरदायित्व के प्रति उपेक्षा का कारण क्या लगता है?

Question number: 14 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

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गद्यांश में रेखांकित वाक्यांशों का अर्थ अपनी भाषा में समझाइए।

Question number: 15 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Appeared in Year: 2011

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योग्यता के प्रति असम्मान का दुष्परिणाम क्या होता है?

Question number: 16 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Appeared in Year: 2013

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इस देश में लोग अच्छा रोजगार पाने के विषय में क्या सोचते हैं?

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सौर ऊर्जा, जो समूची ऊर्जा नवीकरण का हिस्सा है, पुराने ईन्धरों पर हमारी निर्भरता कम करने का एकमात्र रास्ता है। पुराने ईन्धन कुछ समय के उपरान्त ज्यादा महंगे और विरल होने जा रहे हैं। सौर ऊर्जा का उपयोग हमारे पृथ्वी ग्रह के पर्यावरणीय संतुलन और जारी ‘ग्रीन हाउस’ प्रभाव को कम करने की एकमात्र कुंजी है। सौर ऊर्जा के उपयोगी गुणों के बावजूद अभी तक न तो इसका व्यापक पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है और न पुराने ईन्धन के विकल्प के रूप में इसे स्वीकृति मिल रही है। यह इसलिए भी कि इसकी प्रौद्योगिकी अपेक्षाकृत ज्यादा महंगी है। फिर भी इसकी प्रौद्योगिकी में युगान्तकारी सुधार किए जा रहा है, जो इसकी कीमतों में कमी ला रहे है और निश्चित रूप से चाहे मन्दगति से ही सही इसे एक व्यवहार्थ विकल्प बना रहे हैं। सरकार द्वारा प्रवर्तित जवाहर लाल नेहरू सौर ऊर्जा मिशन इस दिशा में एक धारणीय तथा ऊर्जा के स्वच्छ स्रोत की प्राप्ति का आदर्शवादी कदम है।

सौर ऊर्जा क्षेत्र रोजगार सृजित करने की दिशा में आशा जगाता है। यह क्षेत्र शोध और प्रौद्योगिकी नवाचार में भारी निवेश करता है तथा रोजगार की दिशा में उच्च व विशेषीकृत पद सृजित करता है।

यद्यपि विद्युत उत्पादन में भारत विश्व में छठे स्थान पर है तथापि भारत में अभी भी गहरा विद्युत संकट है। सौर ऊर्जा ही विद्युत संकट घटा सकती है। यह सम्पूर्ण पारिस्थितिकीय तंत्र का गठन करेगा और ऊर्जा के उत्पादन के क्षेत्र में मांग की बढ़ोत्तरी करेगा। आज अत्यधिक मांग वाले सौर पद सौर ऊर्जा यंत्र स्थापन और अभियांत्रिकीय परिरूप विधि के क्षेत्र में है। इस उद्योग के विकास के लिए जरूरी है कि नये कौशल की वृद्धि द्वारा उत्पादन की कीमतों में कमी कर व व्यापारान्तर कीमतों के संतुलन से कीमतों में कमी लाई जाय।

Question number: 17 (1 of 5 Based on Passage) Show Passage

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Appeared in Year: 2010

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सौर ऊर्जा के उपयोग के क्या लाभ है?

Question number: 18 (2 of 5 Based on Passage) Show Passage

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Appeared in Year: 2010

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हमारे युवाओं के लिए उच्च किस्म के पद सौर ऊर्जा क्षेत्र कैसे उपलबध करा सकता है।

Question number: 19 (3 of 5 Based on Passage) Show Passage

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Appeared in Year: 2010

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हमें पुराने ईन्धन पर अपनी निर्भरता कम क्यों करनी चाहिए?

Question number: 20 (4 of 5 Based on Passage) Show Passage

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Appeared in Year: 2010

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सौर ऊर्जा किस तरह कम महंगी की जा सकती है।

Question number: 21 (5 of 5 Based on Passage) Show Passage

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सौर ऊर्जा का प्रयोग अभी तक लोकप्रिय क्यों नहीं बनाया गया?

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पाठकों की बहुसंख्या या तो क्षणिक मनोरंजन के लिए पढ़ती है या फिर उस विधान्ति के लिए जो पुस्तक उन्हें प्रदान करती है। दूसरे शब्दों में वे सामान्यत: वक्तकटी के लिए पुस्तक पढ़ते है। समय, जैसा कि अक्सर आंका जाता है, एक विरल बेशकीमती खजाना है। इस केशकीमती खजाने को पाठकगण व्यर्थ ही गंवा देते हैं। अविश्वनीय-सा लगता है कि समय या वक्त पाठकों के ऊपर बहुत भारीपन से लदा होता है और फिर वे खोज पाते हैं कि समय के उस अतिरिक्त बोझ से छुटकारा, जिसकी उन्हें जरूरत है, किताबें ही दिला सकती है। इतना तो पर्याप्त स्पष्ट है कि वे किसी दूसरे प्रयोजन के लिए नहीं पढ़ सकते। अगर वे ऐसा करें तब उसे पढ़ने से उन्हें कुछ अपने लिए हासिल हो सकता है, किन्तु ऐसे कोई संकेत नहीं है कि पढ़ने का कोई अन्य प्रयोजन हो। पढ़ने से उन पर कुछ प्रभाव जरूर पड़ते होंगे, परन्तु उन प्रभावों के बारे में वे अनजान हैं। प्रभाव लाभप्रद हो सकते हैं, निर्णायक हो सकते हैं - यह निष्कर्ष हम नहीं निकाल सकते। इसका प्रमाण यही है कि पढ़ने के कारण वे अपने साथ कोई ऐसी चीज नहीं ले जाते कि बाद में कह सकें कि उन्होंने अमुक चीज पढ़ी है।

Question number: 22 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Appeared in Year: 2012

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असजग पढ़ने के प्रति लेखक का प्रतिकूल दृष्टिकोण क्यों है?

Question number: 23 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

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Appeared in Year: 2012

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इस तथ्य को संकेतक क्या है कि पाठकों के समय का सही इस्तेमाल नहीं हुआ?

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