Precis Writing (IAS Mains Compulsory-Hindi): Questions 5 - 5 of 5

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Question number: 5

» Precis Writing

Appeared in Year: 2013

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निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण (Precis) एक-तिहाई शब्दों में लिखिए। शीर्षक देना अनिवार्य नहीं है। (शब्द सीमा के अन्तर्गत संक्षेपण न करने पर अंक काटे जा सकते है)

समकालीन विश्व में, ‘राष्ट्र’ (nation) और ‘राष्ट्र-राज्य’ (nation state) की अवधारणा के बीच में व्यापक मतभेद है। ‘राष्ट्र राज्य’ को परिभाषित करना अपेक्षाकृत आसान है, वे विश्व राजनीतिक संगठन की आधारभूत इकाइयाँ हैं। वे प्राय: प्रभुसत्ता-सम्पन्न राजय के समरूप है। वे वह इकाइयाँ है, जनके पास संयुक्त राष्ट्र (UN) में सीट है, अंग्रेजी में, आमतौर पर उन्हें ‘देश’ नाम दिया गया है। यह सुविधा-जनक होगा यदि हम उनको ‘राज्य’ के नाम से सरल बना दें, लेकिन दुर्भाग्यवश यह नाम कुछ राष्ट्र राज्यों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है जो वर्णित इकाइयों के राष्ट्र राज्यों से छोटी हैं।

राष्ट्र-राज्य और प्रभुसत्ता राज्य को बराबर करना लुभाने वाले हैं, लेकिन यह आधुनिक जगत की अस्थिर प्रकृति की प्रभुसत्ता हेतु भ्रामक होगा। असल में, सभी राष्ट्र-राज्यों ने अपनी प्रभुसत्ता का कुछ हिस्सा अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों को समर्पित कर रखा है, यहाँ य. एन. (UN) एक अच्छा उदाहरण है - राष्ट्र-राज्यों से अधिकार तो वो लेता है, लेकिन देता नहीं है। राज्यों के बीच व्यवहार में यहाँ शक्ति के जटिल समझौते और सम्बन्ध होते हैं। एक छोर पर, यह कुछ बड़े राज्यों को व्यापक शक्ति देता है। दूसरे छोर पर, कई छोटे राज्य, स्पष्ट रूप से शक्तिशाली पड़ौसियों या अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों के संरक्षण के नीचे हैं और असलियत में उन्हें कई क्षेत्रों में स्वतंत्रतापूर्वक कार्य करने की कोई गुंजाइश नहीं है।

अधिकांश राष्ट्र-राज्य खुद को ‘राष्ट्र’ के रूप में वर्णित करते हैं, इसलिए हम सरल रूप से उन्हे ंउनके कहे के अनुसार क्यों नहीं लेते और कहे कि राष्ट्र-राज्य और राज्य एकरूप है? यह सम्भव नहीं है, क्योंकि यह भिन्न व्यवस्था का सूक्ष्मीकरण है। कानूनी रूप से, एक राष्ट्र-राज्य एक परिभाषित सत्ता है, एक राष्ट्र एक जनसमुदाय है। जबकि आधुनिक जनसमुदाय, जो सामान्यतया खुद को राष्ट्र के साथ राष्ट्र-राज्य के फैलाव में आने का आकांक्षी होता है, राष्ट्र की वह परिभाषा, जो यह अपेक्षित करती है कि वह अपने राष्ट्र-राज्य पर प्रभुत्व स्थापित करें, भी प्रतिबन्धक है। अधिकांश टिप्पणीकार सहमत होंगे कि पूर्ववर्ती सोवियत यूनियन के गणराज्यों के बहुसंख्यक जनसमुदाय, जैसे कि जॉर्जीयन्स, लुधियानन्स और उक्रेनियन्स स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व राष्ट्र थे और वह जनसमुदाय, जो अच्दी तरह से परिभाषित प्रादेशिक क्षेत्र थे, जैसे स्कॉटलैण्ड, वहाँ के बहुसंख्यक समझते है कि उन्हें भी उसी तरह राष्ट्र का दर्जा मिलना चाहिए। थोड़ी सी अलग अभिव्यक्ति देते हुए स्वायत्तता या स्वतंत्रता की आकांक्षा करना पर्याप्त है। यद्यपि ऊपरी तौर से राजशासन व्यवस्था से साम्य रखते हुए आधुनिक राष्ट्र राज्य काफी पुराने है, दस शताब्दी वर्ष पूर्व पीछे जाते हुए, विश्व के कुछ हिस्सों में, जैसे कि चीन, भारत और भूमध्यसागरीय प्रवाह में इन बहुत पुराने संगठनों की साधारण राज्यक्षेत्र के रूप में उत्पत्ति थी, जिसको एक सभ्यसमाज नियंत्रण करने में समर्थ था। पहले प्रकार की यह राज-शासन व्यवस्था इसी से विकसित हुई अथवा आधुनिक राष्ट्र राज्य द्वारा पुन: धीरे-धीरे से स्थापित हुई और उसके निशान बड़ी मजबूती से आधुनिक समय में टिके रहे। ऐस्ट्रो हंगेरियन, रसियन और ओटोमन साम्राज्य स्पष्ट रूप से राजवंशीय शासन थे, जो कि 1917 - 1918 तक विद्यमान रहे। इनके जनसमुदाय की कोई सामान्य राष्ट्रीय पहचान नहीं थी और सोवियत संघ, जो कि वास्तविक रूप से रूसी साम्राज्य की अनेक परम्पराओं को 1991 तक लेकर चला, संवैधानिक रूप से कई राष्ट्रों का एक राज्य था। यहाँ तक कि, आज कई ऐसे उदाहरण सम्भव है, जहाँ राष्ट्र-राज्य और राज्य आसानी से मेल नहीं खाते। जबकि, वास्तविक रूप से सभी राष्ट्र राज्यों की सरकारें अपनी शासन व्यवस्था को राष्ट्र के रूप में बतलाती हैं। कई राज्यों द्वारा नियंत्रित जनसमुदाय, जो कि राष्ट्रीय अस्मिता को स्वीकार नहीं करते हैं, को वहाँ केराज्य घोषित करते हैं। ब्रिटेन में कई स्कॉट्स और वेल्स महसूस करते है कि वो एक स्कॉट्स या वैल्स है ना कि ब्रिटिश राज्या या दोदोनों स्कॉटिश ब्रिटिश या वैल्स ब्रिटिश राष्ट्रीयता हैं। अरब देशों में कई यह महसूस करते है कि वह एक अरब राष्ट्र है न कि एक राष्ट्र, जो कि कई अरब राज्यों द्वारा परिभाषित होते है और जो इराक से मोरस्को और दक्षिण यमन तक फैले है। कई लोगों के लिए एक मानव जाति (राष्ट्र रहित) की पहचान ही इतनी प्रबल है कि बदले में (राज्य निर्धारित) राष्ट्रीय पहचान कमजोर पड़ जाती है और आखिरकार वह महत्वहीन हो जाती है। यहाँ हम पहले अमेरिकन या अफ्रीकन मानव जाति समूह (जनजातियों) के कई सदस्यों के उदाहरण दे सकते है।

यद्यपि राष्ट्र राज्य और राष्ट्र दोनों समरूप नहीं है, निस्सन्देह, दोनों सूक्ष्मता से जुड़े हुए हैं। इन्थोनी स्मिथ (देखें विशेषकर स्मिथ 1991) राष्ट्रों को उनमें विभाजित करते हैं जो मानव जाति समूहों में मुख्यत: विकसित है, जो अपनी मानव जाति पहचान को रूपान्तरित और विस्तारित करते हुए खुद को विस्तृत जन समुदाय तक फैलाते है और उनमें जो कि विशिष्ट विकसित राज्य हैं जहाँ राज्य में ही राष्ट्रीय पहचान की एक सामान्य समझ उदित हो चली है जो पूर्ववर्ती नानाविध जनसमुदाय को सम्मिलित करते हैं।

Explanation

संक्षेपण समकालीन विश्व में ‘राष्ट्र’ और ‘राष्ट्र राज्य’ की अवधारणा के बीच में व्यापक मतभेद है। ‘राष्ट्र-राज्य’ को परिभाषित करना अपेक्षाकृत आसान है, वे विश्व राजनीतिक संगठन की आधारभूत इकाइयाँ है, जिनके पास संयुक्त राष्ट्र (UN) में सीट है, अंग्रेजी में, आमतौर पर उन्हें ‘देश’ नाम दिया गया है। असल… (219 more words) …

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