Precis Writing [IAS (Admin.) IAS Mains Compulsory-Hindi]: Questions 2 - 2 of 5

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Question 2

Precis Writing
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Appeared in Year: 2010

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निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण मूल गद्यांश की शब्द संख्या की एक-तिहाई में प्रस्तुत करें। शीर्षक सुझाना अनिवार्य नहीं है। शब्द सीमा के अन्तर्गत संक्षेपण न करने पर अंक काट दिए जायेंगे। संक्षेपण अलग से निर्धारित कागजों पर ही लिखें व उन्हें अच्छी तरह से उत्तर-पुस्तिका के साथ बाँध लें-

यदि कला को हर विशेष युग को अभिव्यक्त करना है तो निश्चित ही उसे बीते युगों के सीमान्तों को तोड़ना होगा और पुरानी कल्पनाओं की सीमाओं व मानसिक ढ़ाँचे को झटकना होगा। जीवन एक सतत प्रवाह है। उसकी गति क्रान्तियों की प्रक्रिया के दौरान त्वरित होती है जब परिवर्तन तीव्र और आमूलचूल होते हैं। ऐसे दौर में सामाजिक जरूरतें अग्रगामी सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के लिए दबाव बनाती हैं - एक तरह से पुरानी जड़ों को ढीला करती हुई जो पुरानी प्रारूप और नये जन्मने वाले के बीच एक दव्न्दव् सृजित करती है। प्राचीन संस्कृति के समर्थक परिवर्तन से डर कर जी तोड़ कोशिशों से यथास्थिति बनाए रखने का यत्न करते हैं, वे स्वयं को नैतिक मूल्यों और सभ्यता का संरक्षक घोषित कर डालते हैं तथा न आने वाले हर प्रवाह को टालते रहते हैं। इसे परिवर्तन के समर्थक नहीं चाहते वे पुराने मानकों और नियमों की अवज्ञा करते हैं। सामाजिक परिवर्तन की हर आकृति एवं सांस्कृतिक प्रारूप की मांग करती है जो अपनी जरूरतों को स्वयं व्यक्त करती है जैसे की पुरानी जिसे विगत युग ने रचा था, अब नई शक्ति और नई तकनी का उपयोग नहीं कर पाती व अपनी वस्तुधारणा में नये आदर्शों को प्रतिबिम्बित नहीं कर सकती। इस संदर्भ में पुरानी संस्कृतियों के समर्थक असांस्कृतिक और यहां तक कि बर्बरतापूर्ण तरीकों को अपनाते हैं, जिनकी एक समय उन्होंने स्वये उपेक्षा और भर्त्सना की थी। जब कोई शक्ति प्रगतिशील नहीं रह पाती वह दमनकारी बन जाती है। नया समाज ही संस्कृति और विज्ञान की हर शाखा में कलाकार को समूचे विकास के लिए अवसर प्रदान कर सकता है।

आज अव्यवस्थित समाज के कारण जीवन का संश्लेषण टूट चुका है, जिसमें हर भाव की गतिविधि एक-दूसरे से अलगा गई है, दार्शथ्नक वैज्ञानिक से अलगा गया है, कलाकार इंजीनियर से तथा एक व सब अविभक्त जीवन के महान स्पन्दमान संजाल से अलगा गये हैं जब कि हर एक संतुलन, सौन्दर्य और पूर्णता के रेखांको को जोड़ने वाला कारक है। उदाहरणके लिए अब यांत्रिक यंत्र भी रूढ़ गणितीय रेखांकों में विषादमय हवा और धुएं के जड़ और आवेगहीन जनक नहीं माने जाते, उन्हें सामान्य रूप से नीचे की धरती और ऊपर के महाव्योम जैसा ही स्वीकार किया जाता है, जैसे प्राचीन पुरागाथाओं में नैपुण्य और जीवन्तता के गतिमान व नायकत्वपूर्ण वृत्त स्वीकार किए जाते हैं। यंत्र आज मनुष्य अंगों के विस्तार बन गये हैं। वे बताते हैं कि मनुष्य ने निसर्ग पर अपना वर्चस्व स्थापित किया है, यह तत्वों पर उसके विजय अभियान की गाथा है। यह लड़ाई मनुष्य जितनी ही पुरानी है। यह संघर्ष परिपूर्ण सौन्दर्य, लय, संगीत और रंगों से भरा पूरा है।

अगर मनुष्य ने अपनी कमजोरी से यंत्रों को स्वयं पर प्रभुत्व की अनुमति दी है तो यह यंत्र का दोष नहीं है, जिसे मनुष्य ने स्वयं सृजा है, उसी के द्वारा बनाया गया है और नष्ट किया जाता है। परनिन्दा की यह भूख स्वयं मनुष्य को भी ग्रस ले। रेडियो केवल मनुष्य के फेफड़ों का ध्वनिविस्तारक है, टेलीफोन उसके कान का। हवाई जहाज पर त्यौरी चढ़ाना और खड़खड़ाती ग्रामीण बैलगाड़ी का अनुगमन कवित्व न्याय भी नहीं है। यह केवल दकियानूसी साम्प्रदायिकता है। हल भी एक युगान्तकारी आविष्कार जैसा कि आज ट्रैक्टर है। नये उपकरणों को गढ़ने की मनुष्य की अक्षय प्रतिभा की उपेक्षा करना सामाजिक परिवर्तनों के नियमों की उपेक्षा करना है, और कोई भी सच्चा कलाकार ऐसी उपेक्षा की सामर्थ्य नहीं जुटा सकता। “एक कलाकार जैविक प्रयोजन जैसा उत्पादन करता है” , ऐसी मान्यता है प्रख्यात मैक्सिकोवासी कलाकार रिवेरा डियागो की कि “जैसे एक पेड़ फूल और फल पैदा करता है और बरस भर के खोये पत्रों आदि का विलाप नहीं करता जानते हुए कि नये मौसम में वह फिर फूलेगा और फल देगा” । कला को सिर्फ क्या है को चित्रित नहीं करना है। अपितु क्या होगा न कि औसत मिलावटी आकांक्षाओं को, न सिर्फ हताश करने वाली पराजयों को बल्कि रूपान्तरित करने वाली सम्भावनाओं को अभिव्यक्त करना है।

Explanation

निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण मूल गद्यांश की शब्द संख्या की एक-तिहाई में प्रस्तुत करें। शब्द संख्या 500 के लगभग है।

संक्षेप यदि कला को हर विशेष युग को अभिव्यक्त करना है तो निश्चित ही उसे बीते युगों की सीमान्तों को तोड़ना होगा और पुरानी कल्पनाओं की सीमाओं व मानसिक ढ़ांचे को झटकना होगा। जब कोई शक्ति प्रगतिशील नहीं रह पाती, वह दमनकारी बन जाती है। नया सम…

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