IAS (Admin.) IAS Mains Compulsory-Hindi: Questions 70 - 79 of 199

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Rs. 400.00 or

Question number: 70

» Synonyms

Appeared in Year: 2008

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Write in Short

निम्नलिखित युग्मों में से इस तरह प्रयुक्त कीजिए कि उनका अर्थ स्पष्ट हो जाए और उनके बीच का अन्तर भी समझ में आ जाए-

बहार - बाहर

Question number: 71

» Writing Essay

Appeared in Year: 2008

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Describe in Detail

मनोरंजन के साधन के रूप में क्रिकेट

Explanation

प्रस्तावना - छात्रों के लिए अध्ययन जितना आवश्यक है, उतना ही खेलना भी महत्वपूर्ण है। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है और स्वस्थ शरीर के लिए व्यायाम तथा खेल परमावश्यक है। उससे मनोरंजन के साथ-साथ मानसिक शारीरिक विकास भी होता है। खिलाड़ियों में संकल्प की दृढ़ता, संगठन

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Question number: 72

» Writing Essay

Appeared in Year: 2013

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Describe in Detail

कृत्रिम बुद्धि, मानव बुद्धि के विकल्प के रूप में

Explanation

प्रस्तावना - कृत्रिम बुद्धि जो मानव के द्वारा बनाया गया ऐ रोबोट है। मनुष्य ने विज्ञान की सहायता से अपने लिए विभिन्न प्रकार के यंत्रों का निर्माण किया है, जिसमें से एक रोबोट है। यंत्र जैसे वाशिंग मशीन, फ्रिज, कुलर, ए. सी. आदि। इसके बाद भी उसे एक ऐसे यंत्र

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Passage

हम औद्योगीकरण के एक तेज दौर से गुजर रहे हैं तथा अपने उद्योगों में हम बड़ी संख्या में लोगों को नियुक्त कर रहे हैं। भारत में कुछ इस प्रकार की धारणा-सी जान पड़ती है कि आप जिस विशेष कार्य को करना चाहते हैं उसके विषय में कितना जानते हैं इस बात का महत्व नहीं है, इससे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि आप किसे जानते हैं - ताकि रोजगार पाने के लिए प्रभाव का उपयोग किया जा सके। लोग यह नहीं सोचते कि अच्दे परिणामों के लिए योग्यता आवश्यक है। हमारी शिक्षा में उत्कृष्टता के विकास का एक सुनिश्चित महत्व वाला स्थान है और यदि उत्कृष्टता के विकास को महत्व नहीं दिया जाता है तो इससे योग्यता का अपमान होता है। इस बात सक एक ओर तो हमारी शिक्षा प्रणाली विषाक्त और दूषित होती है तथा दूसरी ओर सामाजिक शिक्षा के लिए आन्दोलन प्रारम्भ करने की इच्छा का गलता घुट जाता है।

जब किसी पुल का निर्माण किया जाता है अथवा सड़क बनाई जाती है तो बालू, सीमेन्ट, चूने आदि के उचित मिश्रण के लिए एक निश्चित अनुपात का अनुसरण किया जाता है ताकि पुल और सड़क का निर्माण अच्छा हो सके और वे अधिक समय तक बने रहें। किन्तु हमारा अनुभव इस विषय में हमें अध: पतन की कहानी ही सुनाता है और हमें पता चलता है कि किसी बाँध में दरारें आ गई है या कोई सड़क वर्षा के कारण बह गई है।

यह विषय गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़ा हुआ है, जिसका सम्बन्ध केवल भौतिक सामग्री से नहीं है अपितु मनुष्यों तथा उनके उत्तरदायित्व विषयक बोध से भी है।

दुर्भाग्यवश हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था से ऐसी कुछ परिस्थितियों का निर्माण होता है, जिनमें योग्यता को एक व्यवस्थित रूप से उपेक्षित किया जाता है और लोगों को यह कहते हुए सुना जाता है कि इस देश में गुण का कोई महत्व नहीं है। इस बात से यह भावना उत्पन्न होती है कि यहाँ योग्यता, कार्यक्षमता और नैतिक औचित्य को महत्व दिये बिना कोई भी लोक सेवा का पद प्राप्त किया जा सकता है और सार्वजनिक कार्य किया जा सकता है।

Question number: 73 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension

Appeared in Year: 2011

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Write in Short

हम योग्यता के प्रति सम्मान कब खो देते हैं?

Question number: 74 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension

Appeared in Year: 2011

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Write in Short

योग्यता के प्रति असम्मान का दुष्परिणाम क्या होता है?

Question number: 75 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension

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Write in Short

योग्यता, कार्यक्षमता और उत्तरदायित्व के प्रति उपेक्षा का कारण क्या लगता है?

Question number: 76 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension

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Write in Short

गद्यांश में रेखांकित वाक्यांशों का अर्थ अपनी भाषा में समझाइए।

Question number: 77 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension

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Write in Short

जब हम अन्य लोगों के उत्तरदायित्व बोध का सम्मान नहीं करते हैं तो परिणाम क्या होता है?

Question number: 78 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension

Appeared in Year: 2013

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Write in Short

इस देश में लोग अच्छा रोजगार पाने के विषय में क्या सोचते हैं?

Question number: 79

» Precis Writing

Appeared in Year: 2010

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Describe in Detail

निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण मूल गद्यांश की शब्द संख्या की एक-तिहाई में प्रस्तुत करें। शीर्षक सुझाना अनिवार्य नहीं है। शब्द सीमा के अन्तर्गत संक्षेपण न करने पर अंक काट दिए जायेंगे। संक्षेपण अलग से निर्धारित कागजों पर ही लिखें व उन्हें अच्छी तरह से उत्तर-पुस्तिका के साथ बाँध लें-

यदि कला को हर विशेष युग को अभिव्यक्त करना है तो निश्चित ही उसे बीते युगों के सीमान्तों को तोड़ना होगा और पुरानी कल्पनाओं की सीमाओं व मानसिक ढ़ाँचे को झटकना होगा। जीवन एक सतत प्रवाह है। उसकी गति क्रान्तियों की प्रक्रिया के दौरान त्वरित होती है जब परिवर्तन तीव्र और आमूलचूल होते हैं। ऐसे दौर में सामाजिक जरूरतें अग्रगामी सांस्कृतिक प्रवृत्तियों के लिए दबाव बनाती हैं - एक तरह से पुरानी जड़ों को ढीला करती हुई जो पुरानी प्रारूप और नये जन्मने वाले के बीच एक दव्न्दव् सृजित करती है। प्राचीन संस्कृति के समर्थक परिवर्तन से डर कर जी तोड़ कोशिशों से यथास्थिति बनाए रखने का यत्न करते हैं, वे स्वयं को नैतिक मूल्यों और सभ्यता का संरक्षक घोषित कर डालते हैं तथा न आने वाले हर प्रवाह को टालते रहते हैं। इसे परिवर्तन के समर्थक नहीं चाहते वे पुराने मानकों और नियमों की अवज्ञा करते हैं। सामाजिक परिवर्तन की हर आकृति एवं सांस्कृतिक प्रारूप की मांग करती है जो अपनी जरूरतों को स्वयं व्यक्त करती है जैसे की पुरानी जिसे विगत युग ने रचा था, अब नई शक्ति और नई तकनी का उपयोग नहीं कर पाती व अपनी वस्तुधारणा में नये आदर्शों को प्रतिबिम्बित नहीं कर सकती। इस संदर्भ में पुरानी संस्कृतियों के समर्थक असांस्कृतिक और यहां तक कि बर्बरतापूर्ण तरीकों को अपनाते हैं, जिनकी एक समय उन्होंने स्वये उपेक्षा और भर्त्सना की थी। जब कोई शक्ति प्रगतिशील नहीं रह पाती वह दमनकारी बन जाती है। नया समाज ही संस्कृति और विज्ञान की हर शाखा में कलाकार को समूचे विकास के लिए अवसर प्रदान कर सकता है।

आज अव्यवस्थित समाज के कारण जीवन का संश्लेषण टूट चुका है, जिसमें हर भाव की गतिविधि एक-दूसरे से अलगा गई है, दार्शथ्नक वैज्ञानिक से अलगा गया है, कलाकार इंजीनियर से तथा एक व सब अविभक्त जीवन के महान स्पन्दमान संजाल से अलगा गये हैं जब कि हर एक संतुलन, सौन्दर्य और पूर्णता के रेखांको को जोड़ने वाला कारक है। उदाहरणके लिए अब यांत्रिक यंत्र भी रूढ़ गणितीय रेखांकों में विषादमय हवा और धुएं के जड़ और आवेगहीन जनक नहीं माने जाते, उन्हें सामान्य रूप से नीचे की धरती और ऊपर के महाव्योम जैसा ही स्वीकार किया जाता है, जैसे प्राचीन पुरागाथाओं में नैपुण्य और जीवन्तता के गतिमान व नायकत्वपूर्ण वृत्त स्वीकार किए जाते हैं। यंत्र आज मनुष्य अंगों के विस्तार बन गये हैं। वे बताते हैं कि मनुष्य ने निसर्ग पर अपना वर्चस्व स्थापित किया है, यह तत्वों पर उसके विजय अभियान की गाथा है। यह लड़ाई मनुष्य जितनी ही पुरानी है। यह संघर्ष परिपूर्ण सौन्दर्य, लय, संगीत और रंगों से भरा पूरा है।

अगर मनुष्य ने अपनी कमजोरी से यंत्रों को स्वयं पर प्रभुत्व की अनुमति दी है तो यह यंत्र का दोष नहीं है, जिसे मनुष्य ने स्वयं सृजा है, उसी के द्वारा बनाया गया है और नष्ट किया जाता है। परनिन्दा की यह भूख स्वयं मनुष्य को भी ग्रस ले। रेडियो केवल मनुष्य के फेफड़ों का ध्वनिविस्तारक है, टेलीफोन उसके कान का। हवाई जहाज पर त्यौरी चढ़ाना और खड़खड़ाती ग्रामीण बैलगाड़ी का अनुगमन कवित्व न्याय भी नहीं है। यह केवल दकियानूसी साम्प्रदायिकता है। हल भी एक युगान्तकारी आविष्कार जैसा कि आज ट्रैक्टर है। नये उपकरणों को गढ़ने की मनुष्य की अक्षय प्रतिभा की उपेक्षा करना सामाजिक परिवर्तनों के नियमों की उपेक्षा करना है, और कोई भी सच्चा कलाकार ऐसी उपेक्षा की सामर्थ्य नहीं जुटा सकता। ”एक कलाकार जैविक प्रयोजन जैसा उत्पादन करता है“, ऐसी मान्यता है प्रख्यात मैक्सिकोवासी कलाकार रिवेरा डियागो की कि ”जैसे एक पेड़ फूल और फल पैदा करता है और बरस भर के खोये पत्रों आदि का विलाप नहीं करता जानते हुए कि नये मौसम में वह फिर फूलेगा और फल देगा“। कला को सिर्फ क्या है को चित्रित नहीं करना है। अपितु क्या होगा न कि औसत मिलावटी आकांक्षाओं को, न सिर्फ हताश करने वाली पराजयों को बल्कि रूपान्तरित करने वाली सम्भावनाओं को अभिव्यक्त करना है।

Explanation

निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण मूल गद्यांश की शब्द संख्या की एक-तिहाई में प्रस्तुत करें। शब्द संख्या 500 के लगभग है।

संक्षेप यदि कला को हर विशेष युग को अभिव्यक्त करना है तो निश्चित ही उसे बीते युगों की सीमान्तों को तोड़ना होगा और पुरानी कल्पनाओं की सीमाओं व मानसिक ढ़ांचे

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