IAS Mains Compulsory-Hindi: Questions 149 - 154 of 199

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Question number: 149

» Common Saying

Appeared in Year: 2011

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Describe in Detail

निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों में से अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

एक और एक ग्यारह होना

Explanation

एक और एक ग्यारह होना

अर्थ - एकता में बल है।

वाक्य प्रयोग - सब भारतवासी एक और एक ग्यारह होने पर अंग्रेजों से भारत देश को आजाद करवाया है।

Question number: 150

» Synonyms

Appeared in Year: 2013

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Write in Short

निम्नलिखित शब्द के पर्यायवाची लिखिए-

अन्धकार

Question number: 151

» Correct Grammar Usage

Appeared in Year: 2010

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Write in Short

निम्नलिखित वाक्यों में से वाक्यों के शुद्ध रूप लिखिए-

सूरज पश्चिम से निकलता है और पूरब में डूबता है।

Question number: 152

» Common Saying

Appeared in Year: 2010

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Write in Short

निम्नलिखित मुहावरों और लोकोक्तियों में से अर्थ स्पष्ट करते हुए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए-

हाथ कंगन को आरसी क्या

Question number: 153

» Correct Grammar Usage

Appeared in Year: 2010

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Write in Short

निम्नलिखित वाक्यों में से वाक्यों के शुद्ध रूप लिखिए-

वीरता मनुष्य की गुण है।

Question number: 154

» Precis Writing

Appeared in Year: 2012

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Describe in Detail

निम्नलिखित गद्यांश का संक्षेपण लगभग एक-तिहाई शब्दों में करे। शब्द सीता के अन्तर्गत संक्षेपण न करने पर अंक काट लिए जायेंगे। संक्षेपण अलग से निर्धारित कागजों पर ही लिखें व उन्हें अच्छी तरह से उत्तर-पुस्तिका के साथ बाँध ले।

पानी पृथ्वी के धरातलीय क्षेत्र के 70 प्रतिशत हिस्से में सामान्य रूप से पर्याप्त मात्र में पाया जाने वाला पदार्थ है। वैश्विक जल की उपलब्धि 1.386 बिलियन जलमापक अंक है, जिसमें से 97 प्रतिशत खारा पानी है और मानव उपयोग के लिए उपर्युक्त नहीं है। शेष केवल 3 प्रतिशत पानी ही ताजा और पीने योग्य पानी है। परन्तु उसका भी 68.5 प्रतिशत पानी ग्लेशियारों कहि हिम शीर्षों और शाश्वत बर्फ में है जो मानव उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है। लगभग 30 प्रतिशत धरातलीय जल है जिसका 0 - 9 प्रतिशत नदियों, झरनों और झीलों में है। हम ज्यादातर 70 प्रतिशत जलमापक अंक ताजे पानी पर प्रतिदिन निर्भर करते हैं जो नदियों, झरनों और झीलों के अन्त: स्रोतों से हमें मिलता है। यह आपूर्ति सदियों से निरन्तर प्राप्त हो रही है। परन्तु पिछले कुछ दशकों से, खासतौर से घरेलू जरूरतों, खेती और औद्योगिक गतिविधियों के चलते पानी की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। वर्ष 1940 में जब दुनिया की जनसंख्या 2 बिलियन थी, प्रतिवर्ष जल की आमद प्रति व्यक्ति 1000 जलमापक अंक तक सीमित थी। 2000 तक जनसंख्या 6 बिलियन का आंकड़ा पार कर गई थी और प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष खपत 6000 जलमापक अंक बढ़ आई, जिससे जल प्राप्ति के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने लगा, खासकर सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों और उन जगहों पर जहाँ पानी बहुत कम है। कृषि 70 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र 22 प्रतिशत, घरेलू क्षेत्र 8 प्रतिशत जल खपत का आंकड़ा दर्ज करते हैं। साफ पानी विश्व जनसंख्या के तेजी से बढ़ने व पीने योग्य पानी की मांग बढ़ने के कारण दुष्प्राप्य संसाधन बनता जा रहा है। हर वर्ष कुल उपलब्ध पानी का आधा हिस्सा इस्तेमाल में आ रहा है। यह 2050 तक जनसंख्या व मांग बढ़ने के कारण 74 प्रतिशत तब बढ़ सकता है। यदि सभी जगहों पर लोग सामान्य अमेरिकियों की तरह पानी खर्च करने लगें, जो कि पानी के मामले में सबसे ज्यादा खाऊ लोग है तो उपयोग 90 प्रतिशत तब बढ़ सकता है।

ताजे पानी का रेखांकित करने वाला पक्ष यह है कि उसकी उपलब्धता सारे विश्व में समानरूप से विभाजित नहीं है। अनेक पानी के भरपूर स्रोतों के देश हैं तो अनेक पानी के लिहाज से गरीब मुल्क। प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति उपलब्धता यदि ग्रीन लैण्ड में जलमापक अंक के अनुसार 10, 767 मिलिनयन है तो कुवैत में यह सिर्फ 10 जलमापक अंक है। भारत में 1951 में प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति पानी की उपलब्धता 5, 177 जलमापक अंक थी, वह 2001 में घटकर 1, 820 जलमापक अंक रह गई। 2001 में तो भारत गरीब मूल्कों की श्रेणी में धकेल दिया गया। 2025 तक तो प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति खप 1, 340 जलमापक अंक तक सिमट आयेगी।

विश्व की अनेक बड़ी तथा उनकी सहायक नदियाँ एक से ज्यादा देशों के बीच गुजरती हैं। उदाहरण के लिए गंगा और उसकी सहायक नदियाँ नेपाल, भारत और बंग्लादेश से गुजतरी है और सिन्धु व उसकी सहायक नदियाँ तो भारत पाकिस्तान से गुजरती है। देन्यूब जहाँ जर्मनी से निकलती है, आस्ट्रिया, स्लोवाकिया, हंगरी, क्रोशिया, सर्बिया, रोमानिया, बल्गारिया, माल्देविया और यूक्रेन से गुजरती है। जम्बेजी जाम्बिया, अंगोला, नामेबिया, वोट्स्वाना, जिम्बावे और मोजाम्बीक से गुजरती है। मिस्र की जीवनधारा नील के उद्गम आठ देशों में हैं सूडान, इयोपिया, केन्या, रवांडा, बुरून्डी, युगाण्डा, तंजानिया, जायरे। जब कोई नदी एक से ज्यादा देशों से गुजरती है तब अनेक विवाद जन्मते है। ऐसे विवाद ईसा पूर्व 3000 वर्षों से मध्य एशिया, मध्य यूरोप, दक्षिण तथा मध्यपूर्व क्षेत्रों से उपजते रहे हैं। कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए पानी की मांग बढ़ती ही जाती है, उससे संबंधित विवाद भी गम्भीर स्थितियों को जन्माते है और कभी-कभी वे आक्रामक रूप ग्रहण कर लेते हैं।

एक ही देश में बहने वाली नदियों के पानी में हिस्सा बंटाना भी स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर संवेदनशील मामला है। गौतम बुद्ध (563 - 483 ईसा पूर्व) को शाक्यों और कोटियाओं के बीच रोहिणी नदी के पानी की हिस्सेदारी के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा था।

Explanation

संक्षेपण पानी पृथ्वी के धरातलीय क्षेत्र के 70 प्रतिशत हिस्से में सामान्य रूप से पर्याप्त मात्रा में पाया जाने वाला पदार्थ है। वैश्विक जल की उपलब्धि 1.386 मिलियन जलमापक अंक है, जिसमें से 97 प्रतिशत खारा पानी है और मानव उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है। शेष केवल 3 प्रतिशत… (152 more words) …

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