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व्याकरण के दव्ारा सम्प्रेषण तथा लेखन कौशल का विकास (Development of communication and writing skills by Grammar)

व्याकरण भाषा की शुद्धता का साधन है। व्याकरण के प्रयोग से वांछित कोई भी भाषा कभी भी शुद्ध एवं सुन्दर नहीं हो सकती है। सम्प्रेषण तथा लेखन कौशल के विकास में व्याकरण की भूमिका अदव्तीय होती है। बिना व्याकरण को जाने सम्प्रेषण तथा लेखन कौशल का विकास सम्भव नहीं है।

व्याकरण का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning and definition of Grammar)

विद्वानों ने व्याकरण की परिभाषा विभिन्न रूपों में की है। यहाँ पर कुछ व्याकरण की महत्वपूर्ण परिभाषाएँ दी गई हैं: -

डॉ. ह्यू ग्रील्ड के अनुसार भाषा के रूप में सार्थक एवं शुद्ध व्यवस्था ही व्याकरण है।

महर्षि पाणिनी और पतंजलि के अनुसार व्याकरण शब्दानुशासन है। इसमें भाष्ज्ञा का रूप व्यवस्थित होता है। महर्षि पतंजलि ने भी अपने महाभाष्य में इसे ‘शब्दानुशासन’ कहा है। हेमचन्द ने कहा है कि व्याकरण का काम है भाषा पर अनुशासन रखना। इस प्रकार हेमचन्द के मतानुसार व्याकरण शब्दानुशासन ही है।

महोदय स्वीट के अनुसार ‘व्याकरण भाषा का व्यावहारिक विश्लेषण अथवा उसका शरीर विज्ञान है।’… (112 more words) …

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भाषा अधिगम में व्याकरण में भूमिका (Role of Grammar in Origin of Language)

  • व्याकरण की शिक्षा, भाषा शिक्षण का अनिवार्य एवं महत्वपूर्ण अंग है। व्याकरण भाषा का दिशा-निर्देशन करता है और उसे सरलता से अपेक्षित लक्ष्य तक पहुँचाता है।
  • व्याकरण के नियमों का ज्ञान, छात्रों में ‘मौलिक’ वाक्य संरचना की योग्यता का विकास करता है। भाषा की मितव्ययिता के आधार पर व्याकरण के नियमों का ज्ञान आवश्यक है। छात्रों में भाषा शुद्ध, लिखने, बोलने के कौशल का विकास करती है।
  • भाषा का शुद्ध रूप की पहचान करने में छात्रों को सक्षम बनाना ही व्याकरण का मुख्य उद्देश्य है। व्याकरण शिक्षा से मातृभाषा के प्रयोग लिखने, बोलने में शुद्धता आती है। मातृभाषा में व्याकरण… (77 more words) …

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