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व्याकरण के प्रकार (Types of Grammar)

आज ज्ञान का क्षेत्र बहुत विशाल होता जा रहा है। सभी अध्ययन क्षेत्रों में ज्ञान में वृद्धि अधिक तीव्रता से हो रही है। इसका प्रभाव व्याकरण के ज्ञान पर ही हुआ है। चौमस्की ने एक नवीन व्याकरण का विकास किया है जिसे ‘व्यावहारिक व्याकरण’ की संज्ञा दी जाती है। इस प्रकार के व्याकरण में नियमों के अनुसरण की अपेक्षा ‘व्यावहारिकता’ अथवा ‘प्रचलन’ को विशेष महत्व दिया गया है। इस प्रकार आज व्याकरण के तीन प्रकार है: -

Classification of Grammar

Classification of Grammar

Various branches of Grammar

व्याकरण शिक्षण की विधियाँ व्याकरण शिक्षण के लिए मुख्यत: चार विधियों का प्रयोग किया जाता है… (16 more words) …

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व्याकरण शिक्षण (Grammar Teaching)

  • भाषा का शुद्ध प्रयोग एक कला है। इसके लिए चार कौशलों की आवश्यकता होती है - पढ़ना, लिखना, बोलना तथा सुनना। इन चारों कौशलों से भाषा में शुद्ध आती है। भाषा की शुद्धता सदैव तर्कसंगत होती है। छात्रों में इन कौशलों के विकास के साथ आलोचना की असीमित शक्ति का विकास करती है। शुद्ध भाषा सिखाने के लिए व्याकरण का ज्ञान एवं प्रयोग मुख्य आधार है। व्याकरण के सिद्धान्तों की अपेक्षा व्याकरण के नियमों का अधिक उपयोग है। अपनी मातृभाषा को बिना व्याकरण का ज्ञान प्रयोग आवश्यक होता है। जिसके लिए व्याकरण शिक्षण किया जाता है। प्रत्येक भाषा के व्याकरण… (187 more words) …

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