Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 56 - 63 of 413

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Passage

मानव जीवन के आदिकाल में अनुशासन की कोई संकल्पना नहीं थी और न ही आज की भाँति बड़े-बड़े नगर या राज्य ही थे। मानव जंगल में रहता था। ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली कहावत उसके जीवन पर पूर्णत: चरितार्थ होती थी। व्यक्ति पर किसी भी नियम का बन्धन या किसी प्रकार के कर्तव्यों का दायित्व नहीं था, किन्तु इतना स्वतंत्र और निरंकुश होते हुए भी मानव प्रसन्न नहीं था। आपसी टकराव होते थे, अधिकारों-कर्तव्यों में संघर्ष होता था और नियमों की कमी उसे खलती थी। धीरे-धीरे उसकी अपनी ही आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समाज और राज्य का उद्भव और विकास हुआ। अपने उद्देश्य की सिद्धि एवं आवश्यकताओं के लिए मानव में अन्तत: कुछ नियमों का निर्माण किया, उनमें से कुछ नियमों के पालन करवाने का अधिकार राज्य को और कुछ का अधिकार समाज को दे दिया गया। व्यक्ति के बहुमुखी विकास में सहायत होने वाले इन नियमों का पालन ही अनुशासन कहलाता है। अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक होता है। समाज ने प्रारम्भ में अपने अनुभवों से ही अनुशासन के इन नियमों को सीखा, विकसित किया और सुव्यवस्थित किया होगा।

Question number: 56 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

इस गद्यांश का प्रतिपाद्य है कि मनुष्य को

Choices

Choice (4) Response

a.

आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पशु बल का प्रयोग करना चाहिए

b.

अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहिए

c.

सामाजिक नियमों का पालन करना चाहिए

d.

स्वतंत्र और निरंकुश होना चाहिए

Question number: 57 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

शब्द ‘उद्भव’ का समानार्थी शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

अनुभव

b.

उत्पत्ति

c.

विकास

d.

वृद्धि

Question number: 58 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

चरितार्थ का सही सन्धि विच्छेद है

Choices

Choice (4) Response

a.

चर + इतार्थ

b.

चरि + अर्थ

c.

चरि + तार्थ

d.

चरित्र + अर्थ

Question number: 59 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

गद्यांश शब्द से आशय ऐसे व्यक्ति से है

Choices

Choice (4) Response

a.

जो किसी व्यवस्था को न माने

b.

जिसका व्यवहार कुश जैसा न हो

c.

जो अहं भावना से ग्रस्त हो

d.

जो निरपराध एवं निरभिमान हो

Question number: 60 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

आदिकाल में मानव प्रसन्न नहीं था, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

उस काल में सामाजिक नियमों का निर्धारण नहीं हुआ था

b.

वह नगरों में न रहकर जंगलों में रहता था

c.

उसकी जीवन आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाती थी

d.

उसका जीवन और रहन-सहन सरल न था

Question number: 61 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

मानव जीवन में प्रयुक्त समास है

Choices

Choice (4) Response

a.

अव्ययी भाव

b.

तत्पुरूष

c.

दव्न्दव्

d.

दव्गु

Question number: 62 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

1. इस गद्यांश का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक हो सकता है

Choices

Choice (4) Response

a.

जीवन का उद्देश्य

b.

अनुशासन की संकल्पना

c.

जिसकी लाठी उसकी भैंस

d.

आवश्यकता आविष्कार की जननी है

Passage

संसार के सभी देशों में शिक्षित व्यक्ति की सबसे पहली पहचान यह होती है कि वह अपनी मातृभाषा में दक्षता से काम कर सकता है। केवल भारत ही एक देश है जिसमें शिक्षित व्यक्ति वह समझा जाता है जो अपनी मातृभाषा में दक्ष हो या नहीं, किन्तु अंग्रेजी में जिसकी दक्षता असंदिग्ध हो। संसार के अन्य देशों में सुसंस्कृत व्यक्ति वह समझा जाता है जिसके घर में अपनी भाषा की पुस्तकों का संग्रह हो और जिसे बराबर यह पता रहे कि उसकी भाषा के अ च्छे लेखक और कवि कौन हैं तथा समय-समय पर उनकी कौनसी कृतियाँ प्रकाशित हो रही है। भारत में स्थिति दूसरी है। यहाँ प्राय: घर में साज-सज्जा के आधुनिक उपकरण तो होते हैं किन्तु अपनी भाषा की कोई पुस्तक या पत्रिका दिखाई नहीं पड़ती। यह दुवस्था भले ही किसी ऐतिहासिक प्रक्रिया का परिणाम है, किन्तु वह सुदशा नहीं, दुवस्था ही है और जब तक वह दुवस्था कायम है, हमें अपने आपको सही अर्थों में शिक्षित और सुसंस्कृत मानने का ठीकठाक न्याय संगत अधिकार नहीं है।

इस दुवस्था का एक भयानक दुष्परिणाम यह है कि भारतीय भाषाओं के समकालीन साहित्य पर उन लोगों की दृष्टि नहीं पड़ती जो विश्वविद्यालयों के प्राय: सर्वोत्तम छात्र थे और अब शासत्र तन्त्र में ऊँचे ओहदों पर काम कर रहे हैं। इस दृष्टि से भारतीय भाषाओं के लेखक केवल यूरोपीय और अमेरिकी लेखकों से ही हीन नहीं है, बल्कि उनकी किस्मत मिस्त्र, बर्मा, इण्डोनेशिया, चीन और जापान के लेखकों की किस्मत से भी खराब है क्योंकि इन सभी देशों के लेखकाेें की कृतियाँ वहाँ के अत्यन्त सुशिक्षत लोग भी पढ़ते हैं। केवल हम ही है जिनकी पुस्तकों पर यहाँ के तथाकथित शिक्षित समुदाय की दृष्टि प्राय: नहीं पड़ती। हमारा तथाकथित उच्च शिक्षिक समुदाय जो कुछ पढ़ना चाहता है, उसे अंग्रेजी में ही पढ़ लेता है, यहाँ तक कि उसकी कविता और उपन्याय पढ़ने की तृष्णा भी अंग्रेजी की कविता और उपन्यास पढ़कर ही समाप्त हो जाती है और उसे यह जानने की इच्छा ही नहीं होती कि शरीर से वह जिस समाज का सदस्य है उसके मनोभाव उपन्यास और काव्य में किस अदा से व्यक्त हो रहे है।

Question number: 63 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘मनोभाव’ में प्रयुक्त सन्धि है

Choices

Choice (4) Response

a.

दीर्घ

b.

गुण

c.

व्यंजन

d.

विसर्ग

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