Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET Paper-II Hindi): Questions 407 - 413 of 413

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Passage

तत्त्ववेत्ता शिक्षाविदों के अनुसार विद्या दो प्रकार की होती है। प्रथम वह जो हमें जीवनयापन के लिए अर्जन करना सिखाती है और दव्तीय वह, जो हमें जीना सिखलाती है। इनमें से एक का अभाव भी जीवन को निरर्थक बना देता है। बिना कमाए जीवन निर्वाह सम्भव नहीं। कोई भी नहीं चाहेगा कि वह परावलम्बी हो, माता-पिता, परिवार के किसी सदस्य, जाति या समाज पर आश्रित रहे। ऐसी विद्या से विहीन व्यक्ति का जीवन दूभर हो जाता है। वह दूसरों के लिए भार बन जाता है। साथ ही दूसरी विद्या के बिना सार्थक जीवन नहीं जिया जा सकता। बहुत अर्जित कर लेने वाले व्यक्ति का जीवन यदि सुचारू रूप से नहीं चल रहा, उसमें यदि वह जीवन शक्ति नहीं है, जो उसके अपने जीवन को तो सत्पथ पर अग्रसर करती ही है, साथ ही वह अपने समाज, जाति एवं राष्ट्र के लिए भी मार्गदर्शन करती है, तो उसका जीवन भी मानव जीवन का अभियान नहीं पा सकता। वह भारवाही गर्दभ बन जाता है या पूँछ- सींग विहीन पशु कहा जाता है। वर्तमान भारत में पहली विद्या का प्राय: अभाव दिखाई देता है, परन्तु दूसरी विद्या का रूप भी विकृत ही है, क्योंकि न तो स्कूलों-कॉलेजों में शिक्षा प्राप्त करके निकला छात्र जीविकोपार्जन के योग्य बन पाता है और न ही वह उन संस्कारों से युक्त हो पाता है, जिन्हें ‘जीने की कला’ की संज्ञा दी जाती है, जिनसे व्यक्ति ‘कु’ से ‘सु’ बनता है, सुशिक्षित और सुसंस्कृत कहलाने का अधिकारी होता है।

वर्तमान शिक्षा पद्धति के अन्तर्गत हम जो विद्या प्राप्त कर रहे है, उनकी विशेषताओं को सर्वथा नकारा भी नहीं जा सकता है। यह शिक्षा कुछ सीता तक हमारे दृष्टिकोण को विकसित भी करती है, हमारी मनीषा को प्रबद्ध बनाती है तथा भावनाओं को चेतन करती है किन्तु कला, शिल्प, प्रौद्योगिकी आदि की शिक्षा नाम मात्र ही होने के फलस्वरूप इस देश के स्नातक के लिए जीविकोपार्जन टेढ़ी खीर बन जाता है।

Question number: 407 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

मानव की संज्ञा पाने के लिए निम्नांकित विद्या अभीष्ट है

Choices

Choice (4) Response
a.

अर्जनकारी विद्या

b.

शिल्प और प्रौद्योगिकी विद्या

c.

जीवन यापन के लिए उपयोगी विद्या

d.

जीना सिखलाने वाली विद्या

Question number: 408 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘माता-पिता’ शब्द में प्रयुक्त समाज है

Choices

Choice (4) Response
a.

कर्मधारय

b.

तत्पुरूष

c.

दव्न्दव्

d.

दव्ंगु

Question number: 409 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘कु’ से ‘सु’ बनने में यह आशय सन्निहित है

Choices

Choice (4) Response
a.

दुर्जन से सुजन बनना

b.

दुष्कर से सुकर बनना

c.

दुर्लभ से सुलभ बनना

d.

दुर्गम से सुगम बनना

Question number: 410 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

टेढ़ी खीर बन जाना

Choices

Choice (4) Response
a.

खीर में स्वाद नहीं होना

b.

अकड़ जाना

c.

कठिन हो जाना

d.

निर्मम होना

Question number: 411 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘विहीन’ शब्द का विपरीतार्थक शब्द है

Choices

Choice (4) Response
a.

सहज

b.

अलग

c.

पंख

d.

सहित

Question number: 412 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

शब्द गर्दभ से तात्पर्य है

Choices

Choice (4) Response
a.

एक पेड़

b.

ज्ञान

c.

एक जानवर

d.

एक पक्षी

Passage

वर्तमान हिन्दी कविता की भूमि में आज एक कोलाहल सा छा रहा है। लोग कहते है कि इस कविता के माध्यम से राजनीति साहित्य पर चढ़ी आ रही है आर जिस कला पक्ष में फूल और फलों की सजावट होनी चाहिए थी, उसमें मजदूरों के गन्दे चिथड़े चिमनियों का धुआँ और खेतों की धूल भरती जा रही है। शुद्ध कला के उपासकों को यह चिन्ता हो रही है कि साहित्य राजनीति के हाथ का रणवाद्य बनता जा रहा है और उसके प्राणों की कलामयी दीप्ति दिनोदिन क्षीण होती जा रही है।

दूसरी ओर एक दल है जो शुद्ध कला की कृतियों को आनन्द और पलायन का प्रयास कहकर उसकी हँसी उड़ाता है। उसका विश्वास है कि जब जीवन में संघर्ष की आँधी चल रही हो, पराधीन राष्ट्र स्वतंत्र होने के लिए आन्दोलन कर रहे हों। ऐसे समय में कवि का अपनी वैयक्तिक अनुभूति के मायाबन्ध में बँधे रहना जीवन के प्रति साहित्य को दायित्वहीनता का प्रमाण है। यह दल चाहता है कि साहित्य अपने कल्पना लोक से उतरकर पृथ्वी पर आए और निष्क्रियता त्याग कर प्रगति के मार्ग पर आरूढ़ रहे।

Question number: 413 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

इस अवतरण का उपयुक्त शीर्षक है

Choices

Choice (4) Response
a.

साहित्यकार का दायित्व

b.

साहित्य और राजनीति

c.

साहित्यकार और राजनेता

d.

वर्तमान साहित्य की धाराएँ

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