Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 392 - 400 of 413

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Passage

विद्वानों का यह कथन बहुत ठीक है कि विनम्रता के बिना स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं। इस बात वो सब लोग मानते हैं कि आत्मसंस्कार के लिए थोड़ी बहुत मानसिक स्वतंत्रता परमावरश्य है - चाहे उस स्वतंत्रता में अभिमान और नम्रता दोनों का मेल हो और चाहे वह नम्रता ही से उत्पन्न हो। यह बात तो निश्चित है कि जो मनुष्य मर्यादापूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहता है उसके लिए वह गुण अनिवार्य है, जिससे आत्मनिर्भरता आती है और जिससे अपने पैरों के बल खड़ा होना आता है। युवा को यह सदा स्मरण रखना चाहिए कि वह बहुम कम बातें जानता है, अपने ही आदर्श से वह बहुत नीचे है और उसकी आकांक्षाएँ उसकी योग्यता से कहीं बढ़ी हुई है। उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने बड़ों का सम्मान करे, छोटे और बराबर वालों से कोमलता का व्यवहार करें, ये बातें आत्ममर्यादा के लिए आवश्यक है। यह सारा संसार, जो कुछ हम हैं और कुछ हमारा है - हमारा शरीर, हमारी आत्मा, हमारे कर्म, हमारे भोग, हमारे घर और बाहर की दशा, हमारे बहुत से अवगुण और थोड़े गुण सब इसी बात की आवश्यकता प्रकट करते हैं कि हमें अपनी आत्मा को नम्र रखना चाहिए। नम्रता से मेरा अभिप्राय दब्बूपन से नहीं है, जिसके कारण मनुष्य दूसरों का मुँह ताकता है, जिससे उसका संकल्प क्षीण और उसकी प्रज्ञा मन्द हो जाती है, जिसके कारण बढ़ने के समय भी पीछे रहता है और अवसर पड़ने पर चट-पट किसी बात का निर्णय नहीं कर सकता। मनुष्य का बेड़ा उसके अपने ही हाथ में है, उसे वह चाहे जिधर ले जाए। सच्ची आत्मा वही है तो प्रत्येक दशा में प्रत्येक स्थिति के बीच अपनी राह आप निकालती है।

Question number: 392 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

आत्म संस्कार में प्रयुक्त समास है

Choices

Choice (4) Response

a.

कर्मधारय

b.

दव्गु

c.

तत्पुरूष

d.

दव्न्दव्

Question number: 393 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

मनुष्य जैसा जीवन व्यतीत करना चाहता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

आरामदायक

b.

वैभवपूर्ण

c.

मर्यादापूर्वक

d.

विलासितापूर्ण

Question number: 394 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

स्वतंत्र शब्द का विपरीतार्थक शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

परतंत्र

b.

अधीनता

c.

नौकरशाही

d.

राजतंत्र

Passage

अनुकूल भावना सुख है और प्रतिकूल भावना दु: ख। इसलिए मनु ने स्ववशता (स्वाधीनता, स्वतंत्रता) को सुख का लक्षण माना है और परवशता (पराधीनता, परतंत्रता) को दु: ख का। ‘पराधीन सपनेहूँ सुख नाही’ कहकर तुलसीदास ने भी इसी लक्षण का समर्थन किया है। कुछ लोग कामनाओं की पूर्ति को सुख और अपूर्ति को दु: ख मानते हैं। इस प्रकार से मानने पर भी सुख और दु: ख का भाव ना होना ही सिद्ध होता है। नैयायिकों ने सुख-दु: ख को आत्मा का गुण माना है, तो सांख्य मतावलम्बियों ने चित्त का और अन्य लोगों ने इन्हें बुद्धि का परिणाम या विकार कहा। नीतिज्ञों ने सुख और दु: ख का सम्बन्ध क्रमश: धर्म और अधर्म से स्थापित किया। कुछ ने धर्म-अधर्म को कारण और सुख-दु: ख को कार्य माना। धर्म सुख में और अधर्म दु: ख में कारण कार्य (हेतु-फल) का सम्बन्ध बैठाया गया। इस मत के विपरीत कुछ अन्य नीतिज्ञों ने सुख-दु: ख को ही क्रमश: धर्म-अधर्म का कारण माना। उन्होंने पहले मत को उलट दिया। इसी दूसरे मत को सुखवाद कहा जाता है। इस मत के अनुसार धर्म और अधर्म का मूल गुण नहीं है। जो सुखद है वही धर्म है, जो दुखद है वही अधर्म है। धर्म और अधर्म को मौलिक, स्वतंत्र और वास्तविक न मानने से यह मत नीति की सार्वभौमिकता पर प्रहार करताहै। इसके विपरीत धर्मवाद है, जिसमें धर्म स्वतंत्र, मौलिक और वास्तविक माना जाता है और सुख उसके फल समझे जाते हैं। जीवन में सुख-दु: ख घुले-मिले हैं। दोनों की सम मात्रा मान लेना संतुलित दृष्टिकोण है। पर सुखवादी जीवन में सुख अधिक मानते हैं और दु: खवादी दु: ख। एक-दूसरे के वाद का खण्डन करता है। सब सुख है (सुखवाद), ऐसा मानने पर दु: ख की अनुभूति की व्याख्या करना सम्भव नहीं है। सब दु: ख है (दु: खवाद), ऐसा मानने पर सुख की अनुभूति की व्याख्या करना कठिन हो जाता है। सुख को दु: ख का अभाव कहना दु: ख को सुख का अभाव कहना इस कारण न्यायसंगत नहीं है। कभी-कभी चिर दु: ख ही सुख हो जाता है और चिर सुख ही दु: ख। अत: दोनों एक-दूसरे के अन्योन्याश्रित है।

Question number: 395 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

परवशता शब्द का आशय है

Choices

Choice (4) Response

a.

विवश

b.

पराधीनता

c.

परिवेश

d.

वंश

Question number: 396 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

स्वाधीनता शब्द का समानार्थी है

Choices

Choice (4) Response

a.

परवशता

b.

राज्यतंत्र

c.

स्वराज्य

d.

स्ववशता

Question number: 397 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्न गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक हो सकता है

Choices

Choice (4) Response

a.

सुखवाद

b.

सुख और दु: ख

c.

दु: खवाद

d.

स्वाधीनता एवं पराधीनता

Question number: 398 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्न में से कौनसा कथन सही है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सुखवादियों के अनुसार जो सुखद है वही धर्म है, जो दु: खद है वही अधर्म

b.

दु: खवादी और सुखवादी दोनों जीवन में सुख अधिक मानते है

c.

पूरी तरह से सुखी कभी दु: ख नहीं पाता है

d.

मनु ने सुख को आत्म का धर्म माना है

Question number: 399 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

सुखवाद किसे धर्म मानता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

जो सुखद है वही धर्म है

b.

जो दु: खद है वही धर्म है

c.

चिर दु: ख ही सुख है अत: धर्म है

d.

स्वाधीनता ही धर्म है

Question number: 400 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

सुख और दु: ख के बारे में सन्तुलित दृष्टिकोण क्या है?

Choices

Choice (4) Response

a.

दु: ख है ही नहीं, वह तो केवल बुद्धि का विकार है

b.

जीवन में सुख और दु: ख दानों सम मात्रा में है

c.

हमें हर समय सुखी रहना चाहिए

d.

धर्म-कर्म से ही सुख की प्राप्ति होती है

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