Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET Paper-II Hindi): Questions 370 - 377 of 413

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Passage

वर्तमान हिन्दी कविता की भूमि में आज एक कोलाहल सा छा रहा है। लोग कहते है कि इस कविता के माध्यम से राजनीति साहित्य पर चढ़ी आ रही है आर जिस कला पक्ष में फूल और फलों की सजावट होनी चाहिए थी, उसमें मजदूरों के गन्दे चिथड़े चिमनियों का धुआँ और खेतों की धूल भरती जा रही है। शुद्ध कला के उपासकों को यह चिन्ता हो रही है कि साहित्य राजनीति के हाथ का रणवाद्य बनता जा रहा है और उसके प्राणों की कलामयी दीप्ति दिनोदिन क्षीण होती जा रही है।

दूसरी ओर एक दल है जो शुद्ध कला की कृतियों को आनन्द और पलायन का प्रयास कहकर उसकी हँसी उड़ाता है। उसका विश्वास है कि जब जीवन में संघर्ष की आँधी चल रही हो, पराधीन राष्ट्र स्वतंत्र होने के लिए आन्दोलन कर रहे हों। ऐसे समय में कवि का अपनी वैयक्तिक अनुभूति के मायाबन्ध में बँधे रहना जीवन के प्रति साहित्य को दायित्वहीनता का प्रमाण है। यह दल चाहता है कि साहित्य अपने कल्पना लोक से उतरकर पृथ्वी पर आए और निष्क्रियता त्याग कर प्रगति के मार्ग पर आरूढ़ रहे।

Question number: 370 (3 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

माया बन्ध में प्रयुक्त समास है

Choices

Choice (4) Response

a.

तत्पुरूष

b.

अव्ययीभाव

c.

दव्गु

d.

कर्मधारय

Question number: 371 (4 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

वर्तमान का विपरीतार्थक शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

अकस्मात

b.

पिछला वर्ष

c.

आज

d.

भविष्य

Question number: 372 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

इस अवतरण का उपयुक्त शीर्षक है

Choices

Choice (4) Response

a.

साहित्यकार का दायित्व

b.

साहित्य और राजनीति

c.

साहित्यकार और राजनेता

d.

वर्तमान साहित्य की धाराएँ

Question number: 373 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

दूसरा दल चाहता है कि साहित्यकार

Choices

Choice (4) Response

a.

आदर्श की उपेक्षा कर यथार्थ की बात करें

b.

सक्रिय होकर प्रगति पथ पर आरूढ़ हो

c.

जीवन में समृद्धि लाने की प्रेरणा दे

d.

स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करे

Question number: 374 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्न में से कौनसा शब्द फूल का पर्यायवाही नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

पवमान

b.

सारंग

c.

प्रसून

d.

सुमन

Passage

गोस्वामी तुलसीदास के युग में भारत पर मुगल बादशाहों का शासन था। पूरा देश पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। तुलसीदार ने पराधीनता की पीड़ा को अनुभव करते हुए उदास और हताश जनता को राम-भक्ति के रूप में शक्ति और स्वतंत्रता का संदेश दिया। उन्होंने अपने युग के शासकों की दमनकारी नीतियों को रावण के दुराचारों के माध्यम से दर्शाया। रावण ने अपनी तानाशाही नीतियों से सभी को अपना दास बना लिया था तथा किसी को स्वतंत्र नहीं छोड़ा था - ”राखेउ कोउ न सुतन्त्र।“ यही नहीं, उस दुष्ट ने हमारी राष्ट्रीश् प्रतिष्ठा की प्रतीक सीता जी का भी अपहरण कर लिया था। ऐसे युग में तुलसी ने भक्ति और भगवान सभी को स्वतंत्र बताया। शील, शक्ति और स्वतंत्रता के प्रतीक भगवान् राम एक जनतांत्रिक नेता के रूप में दक्षिण भारत की जनजातियों के वीर योद्धाओं की सेना संगठित करके रावण के विरूद्ध एक स्वतंत्रता आन्दोलन का संचालन करते हैं और राष्ट्र की अस्मिता सीता को मुक्त कराने में सफल होते हैं। तुलसी ने अपने महान् ग्रन्थ ‘रामचरित मानस’ के लंका काण्ड में राम की इस समर-विजय का वर्णन किया है। उन्होंने लंका काण्ड के अंत में लिखा है कि जो व्यक्ति भगवान् राम की इस ‘समर-विजय’ को ध्यान में पढ़ेगा या सुनेगा, उसे भगवान् राम विजय, विवेक और वैभव प्रदान करेंगे - ”विजय, विवेक, विभूति नित, तिनहिं देहि भगवान्।“ ऐसा प्रेरक प्रबोधक और प्रभावी है तुलसी की भक्ति का स्वरूप।

Question number: 375 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

उपरोक्त अवतरण का उपयुक्त शीर्षक है

Choices

Choice (4) Response

a.

तुलसी की राम भक्ति

b.

तुलसी के राम

c.

तुलसी की भक्ति का स्वरूप

d.

तुसलीदास का युग

Question number: 376 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

पंक्ति ‘विजय, विवेक, विभूति नित, तिनहिं देहिं भगवान’ में कौनसा अंलकार है?

Choices

Choice (4) Response

a.

उत्प्रेक्षा

b.

उपमा

c.

अनुप्रास

d.

रूपक

Question number: 377 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

कौनसा कथन शुद्ध है?

Choices

Choice (4) Response

a.

तुलसी ने रामचरित मानस के अरण्य काण्ड में राम की समर-विजय का वर्णन किया है

b.

तुलसी ने रामचरित मानव के लंका काण्ड में राम की समर-विजय का वर्णन किया है

c.

तुलसी ने रामचरित मानस के सुन्दर काण्ड में राम की समर विजय का वर्णन किया है

d.

तुलसी ने रामचरित मानस के अयोध्या काण्ड में राम की समर-विजय का वर्णन किया है

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