Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET Paper-II Hindi): Questions 307 - 312 of 413

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Passage

जिन्होंने भी बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की है - चाहे वे माता-पिता हों या शिक्षक - उनके खाते में असफलता के साथ-साथ असफलता और निराशा भी दर्ज होती है। ऐसे में एक सवाल उठता है कि आखिर इतना मुश्किल क्यों है पढ़ाना?

एक मुख्य समस्या तो यह है कि पढ़ाने वालों का विश्वास बच्चों की क्षमताओं या योग्यताओं पर काफी कम होता है। यह बात मैं यूँ ही नहीं कह रही बल्कि एक अभिभावक, एक शिक्षक और एक शिक्षक प्रशिक्षक होने के आधार पर कह रही हूँ।

कई बार मैं उस पाठ को लेकर बच्चों (दूसरी, तीसरी या फिर पाँचवीं) के सामने खड़ी होती हूँ तो मुझे उन्हें पढ़ाना है। मेरे पास कुछ जानकारी है जो मैं बच्चों को देना चाहती हूँ। लेकिन मैं यह जानकारी उन्हें क्यू देना चाहती हूँ? क्योंकि मुझे लगता है कि वे इसके बारे में नहीं जानते; इसे जानने में उन्हें मजा आएगा; यह दुनिया के बारे में उनके नजरिए को विस्तृत करने में मदद करेगी; यह उन्हें बेहतर इन्सान बनने में कदद करेगा, भली ही थोड़ा-सा।

लेकिन कभी-कभार पढ़ाना शुरू करने से पहले ही मेरे दिमाग में यह ख्याल बुदबुदाना शुरू कर देता है कि शायद उन्हें वह पहले से ही मालूम हो जो मैं उन्हें बताना चाहती हूँ, तो उन्हें कुछ बताने की बजाय मैं उनके सामने सवाल रख देती हू ँ।

Question number: 307 (4 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2012

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Question

‘आखिर इतना मुश्किल क्यों है पढ़ाना? ’ वाक्य को यदि हिन्दी की सामान्य वाक्य रचना के अनुसार लिखा जाए, तो वाक्य होगा

Choices

Choice (4) Response

a.

आखिर पढ़ाना इतना मुश्किल क्यों है?

b.

आखिर पढ़ाना मुश्किल क्यों है इतना?

c.

इतना मुश्किल क्यों है पढ़ाना आखिर?

d.

ढ़ाना इतना मुश्किल क्यों है आखिर?

Question number: 308 (5 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2012

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Question

अनुच्छेद में यह संकेत किया गया है कि

Choices

Choice (4) Response

a.

बच्चे खेल-खेल में जल्दी सीखते है

b.

शिक्षक, अभिभावक पढ़ाना नहीं जानते

c.

बच्चे सारे सवालों के जवाब दे सकते है

d.

बच्चे बहुत कुछ जानते है

Question number: 309 (6 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2012

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Question

‘इसे जानने में उन्हें मजा आएगा।’ वाक्य में रेखांकित सर्वनामों का प्रयोग किनके लिए हुआ है?

Choices

Choice (4) Response

a.

‘पाठ’, ‘बच्चों’ के लिए

b.

‘पाठ’, ‘शिक्षकों’ के लिए

c.

‘जानकारी’, ‘अभिभावक’ के लिए

d.

‘जानकारी’, ‘बच्चों’ के लिए

Question number: 310 (7 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2012

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Question

लेखिका को कौनसा ख्याल परेशान करता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

जो हम पढ़ाने जा रहे हैं कहीं बच्चे उसके विषय में पहले से ही तो नहीं जानते

b.

बच्चों को भला इन्सान कैसे बनाया जाए

c.

बच्चों को सही तरीके से कैसे पढ़ाया जाए

d.

बच्चों के रोचक तरीके से कैसे पढ़ाया जाए

Passage

जहाँ भी दो नदियाँ आकर मिल जाती है, उस स्थान को अपने देश में तीर्थ कहने का रिवाज है और यह केवल रिवाज की बात नहीं है, हम सचमुच मानते है कि अलग-अलग नदियों में स्नान करने से जितना पुण्य होता है, उससे कहीं अधिक पुण्य संगम स्नान में है। किन्तु, भारत आज जिस दौर से गुजर रहा है, उसमें असली संगम वे स्थान, वे सभाएँ तथा वे मंच है, जिन पर एक से अधिक भाषाएँ एकत्र होती है। नदियों की विशेषता यह है कि वे अपनी धाराओं में अनेक जनपदों का सौरभ, अनेक जनपदों के आँसू और उल्लास लिए चलती हैं और उनका पारस्परिक मिलन वास्तव में नाना जनपदों के मिलन का ही प्रतीक है। यही हाल भाषाओं का भी हो। उनके भीतर भी नाना जनपदों में बसने वाली जनता के आँसू और उमंगे, भाव और विचार, आशाएँ और शंकाएँ समाहित होती है। अत: जहाँ भाषाओं का मिलन होता है, वहाँ वास्तव में, विभिन्न जनपदों के हृदय ही मिलते हैं, उनके भावों और विचारों का ही मिलन होता है तथा भिन्नताओं में छिपी हुई एकता वहाँ कुछ अधिक प्रत्यक्ष हो उठती है। इस दृष्टि से भाषाओं के संगम आज सबसे बड़े तीर्थ है और इन तीर्थों में जो भारतवासी श्रद्धा से स्नान करता है, वह भारतीय एकता का सबसे बड़ा सिपाही और सन्त है।

हमारी भाषाएँ जितनी ही तेजी से जगेगी, हमारे विभिन्न प्रदेशों का पारस्परिक ज्ञान उतना ही बढ़ता जाएगा। भारतीय लेखकों की बहुत दिनों से यह आकांक्षा रही थी कि वे केवल अपनी ही भाषा में प्रसिद्ध होकर न रह जाएँ, बल्कि भारत की अन्य भाषाओं में भी उनके नाम पहुँचें और उनकी कृतियों की चर्चा हो। भाषाओं के जागरण के आरम्भ होते ही एक प्रकार का अखिल भारतीय मंच आप-से-आप प्रकट होने लगा है। आज प्रत्येक भाषा के भीतर यह जानने की इच्छा उत्पन्न हो गई है कि भारत की अन्य भाषाओं में क्या हो रहा है, उनमें कौन-कोन ऐसे लेखक है, जिनकी कृत्रियाँ उल्लेखनीय है तथा कौनसी विचारधारा वहाँ प्रभुसत्ता प्राप्त कर रही हैं।

Question number: 311 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

‘भारतवासी’ में प्रयुक्त समास है

Choices

Choice (4) Response

a.

तत्पुरूष

b.

अव्ययीभाव

c.

दव्न्दव्

d.

दव्गु

Question number: 312 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

असली संगम क्या है?

Choices

Choice (4) Response

a.

वह स्थान जहाँ नदियाँ समुद्र में मिलती है

b.

वह स्थान जहाँ नदियाँ आपस में मिलती है

c.

जहाँ अनेकता में एकता होती है

d.

वे स्थान, सभाएँ तथा मंच जहाँ एक अधिक भाषाएँ एकत्रित होती है

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