Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 198 - 205 of 413

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Passage

व्यक्ति समाज की इकाई है और शिक्षा व्यक्ति को सत् चित्त और आनन्द की अनुभूति करने योग्य बनाती है, शिक्षा का अर्थ है जीना सीखने की कला। हम जीते हैं समाज में, अत: शिक्षा का मूल स्त्रोत है समाज। इस प्रकार शिक्षा अैर समाज पर परस्पर घनिष्ठ संबंध है। शिक्षा व शिक्षण संस्थाओं का समाज में विशेष महत्त्वपूर्ण स्थान है, क्योंकि यहीं से भावी नागरिक ढल कर निकलते है। आज समाज में मूलरूप को परिष्कृत करने हेतु नैतिक शिक्षा के प्रश्न पर विशेष बल दियाजाने लगा है। यह आवश्यकता अनुभव की गई है कि हमारे मान्यताओं का स्खलन हो रहा है, सामाजिक जीवन में जो अनैतिकता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, उसका मूल कारण नैतिक शिक्षा का अभाव है। आज हमने भौतिक उन्नति को एकमात्र उद्देश्य बना लिया है। हम भौतिकवादी से अतिभौतिकवादी होते जा रहे हैं और यही कारण है कि विफलताएँ हमारे मार्ग को अवरूद्ध करती जा रही हैं। आज शिक्षा का महत्व केवल पुस्तकीय ज्ञान मात्र है जो पुस्तकों में ढलता जा रहा है। यह शैक्षिक प्रक्रिया केवल मशीनीकरण का पर्याय न बने और व्यावहारिक सद्शिक्षा का स्वरूप विकसित हो इसके लिए अपेक्षित है कि नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जाए अन्यथा समाज में अपराध प्रवृत्ति निरन्तर बढ़ती रहेगी। यदि हम जीवन में सामंजस्य स्थापित करना चाहते है तो भौतिक प्रगति के साथ-साथ आध्यात्मिक प्रगति को भी जागरूक बनाए रखना आवश्यक है। आज विद्यार्थियों में व्याप्त अनुशासनहीनता, निराशा एवं हतोत्साह के प्रमुख कारण मानसिक एवं आध्यात्मिक अनुशासन का अभाव है। अतएव विद्याथ्रियों में प्रारम्भ से ही चरित्र निर्माण और देशभक्ति की भावना जाग्रत करने के लिए, उनमें दृढ़ संस्कारों का निर्माण करने के लिए नैतिक शिक्षा देना अति आवश्यक है। नैतिक शिक्षा के बिना स्वस्थ समाज की कल्पना असम्भव है।

Question number: 198 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

चरित्र निर्माण में प्रयुक्त समास है

Choices

Choice (4) Response

a.

कर्म तत्पुरूष

b.

करण तत्पुरूष

c.

अपादान तत्पुरूष

d.

संबंध तत्पुरूष

Question number: 199 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

उपरोक्त अवतरण का उपयुक्त शीर्षक है

Choices

Choice (4) Response

a.

जीने की कला

b.

शिक्षा का अर्थ

c.

शिक्षा और शिक्षण संस्थाएँ

d.

नैतिक शिक्षा की उपयोगिता

Question number: 200 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

हतोत्साह का विपरीतार्थी शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

उत्साह

b.

प्रेरणा

c.

अभिप्रेरणा

d.

प्रोत्साहन

Question number: 201 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

नागरिक का विलोम शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

सामाजिक

b.

ग्रामीण

c.

राष्ट्रीय

d.

All of the above

Question number: 202 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

हमारी सामाजिक मान्यताओं के विघटन का प्रमुख कारण है

Choices

Choice (4) Response

a.

नैतिक शिक्षा का अभाव

b.

वैज्ञानिक शिक्षा का अभाव

c.

आध्यात्मिक शिक्षा का अभाव

d.

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अभाव

Question number: 203 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्न में से ‘अ’ उपसर्ग वाला शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

असम्भव

b.

अति आवश्यक

c.

अनुशासन

d.

आध्यात्म

Question number: 204 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

समाज में शिक्षण संस्थाएँ इसलिए महत्व रखती है, क्योंकि शिक्षण

Choices

Choice (4) Response

a.

संस्थाओं से ही शिक्षा की गुणात्मकता का बोध होता

b.

संस्थाएँ, शिक्षार्थियों को उपाधि पत्र प्रदान करती है

c.

संस्थाओं में ही शिक्षार्थी पढ़-लिखकर होनहार बनते है

d.

संस्थाओं से ही भावी नागरिक ढलकर निकलते है

Passage

लोक कथाएँ हमारे आम जीवन में सदियों में रची बसी हैं। इन्हें हम अपने बड़े-बूढ़ों से बचपन से ही सुनते आ रहे है। लोक कथाओं के बारे में यह भी कहा जाता है कि बचपन में शुरूआती वर्षों में बच्चों के अपने परिवेश की महक, सोच व कल्पना की उड़ान देने के लिए इनका उपयोग जरूरी है। हम यह भी सुनते है कि बच्चों के भाषा के विकास के संदर्भ में भी इन कथाओं की उपयोगिता महत्वपूर्ण है। ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन लोक कथाओं के विभिन्न रूपों में हमें लोक जीवन के तत्व मिलते है जो बच्चों के भाषा विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाते है। अगर हम अपनी पढ़ी हुई लोक कथाओं को याद करें तो सहजता से हमें इनके कई उदाहरण मिल जाते हैं। जब हम कहानी सुना रहे होते है तो बच्चों से हमारी यह अपेक्षा रहती है कि वे पहले घटी घटनाओं को जरूर दोहराएँ। बच्चे भी घटना को याद रखते हुए साथ-साथ मजे से दोहराजते हैं। इस तरह कथा सुनने की प्रक्रिया में बच्चे इन घटनाओं को एक क्रम में रखकर देखते हैं। इन क्रमिक घटनाओं में एक तर्क होता है जो बच्चों के मनोभावों से मिलता-जुलता है।

Question number: 205 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

परिवेश में उपसर्ग ‘परि’ का अर्थ है

Choices

Choice (4) Response

a.

पूरा

b.

चारों ओर

c.

निवास

d.

पड़ोस

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