Reading Comprehension-Prose or Drama (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 1 - 7 of 414

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Passage

साहित्य में आदर्श शब्द का प्रयोग दर्शन अथवा राजनीति की भाँति किसी रूढ़िगत अर्थ में नहीं किया जाता है। साहित्य का आदर्शवाद मानव जीवन के आन्तरिक पक्ष पर जोर देता है। जीवन के दो पक्ष हैं आन्तरिक और बाह्य। आन्तरिक पक्ष में मानसिक सुख, प्रसन्नता, परितोश, आनन्द आ जाते हैं। बाह्य पक्ष में ऐश्वर्य, वैभव तथा भौतिक उन्नति का स्थान है। आदर्शवादी साहित्यकार का विश्वास है कि मनुष्य जब तक आन्तरिक सुख प्राप्त नहीं करता, उसे वास्तविक आनन्द की उपलब्धि नहीं हो सकती। मानव की चेतना तब तक भटकती रहेगी जब तक वह शाश्वत, चिरन्तन सत्य अथवा आनन्द नहीं प्राप्त कर लेता। इस प्रकार आदर्शवाद मानव जीवन की आन्तरिक व्यवस्था करता है, उसकी उच्च सम्भावनाओं के प्रकाशन में तत्पर होता है। वह उन मानव मूल्यों को ग्रहण करता है, जो कल्याणकारी है, शुभ है, सर्जनात्मक हैं। भारतीय साहित्यशास्त्र में रस की जो महत्ता है, वह जीवन के आन्तरिक परितोष अथवा आनन्द का ही दूसरा रूप है। आदर्शवादी साहित्यकार भाव और कला की महत्तर ऊँचाइयों पर जाने का प्रयास करता है। अन्तर्मुखी होने के कारण कभी-कभी उसकी चेतना आध्यात्मिक, यहाँ तक कि रहस्यवादी हो जाती है। यूरोप का मध्यकालीन साहित्य इसका प्रमाण है। चिरन्तन मानव मूल्यों को महत्व देने के कारण लगभग प्रत्येक महान् साहित्यकार किसी सीमा तक आदर्शवादी होता है क्योंकि महान् साहित्य सर्जन के लिए शाश्वत मानव मूल्यों के ग्रहण के साथ मानव की उच्चतम सम्भावनाओं का प्रकाशन आवश्यक है। एक विदेशी विचारक के अनुसार “आदर्श काव्य में आनन्द और उपदेश का एक सुन्दर समन्वय होता है।” साहित्य में आदर्शवाद के विरोध में यथार्थवादी जीवन दृष्टि है, जो जीवन के भौतिक मूल्यों को प्रमुखता देती है। यथार्थवादी साहित्य वस्तुजगत को नग्न रूप में प्रस्तुत करने का पक्षपाती है। यथार्थवादी का वर्ण्य विषय है धरती, जो कुछ भी है वह है जबकि आदर्शवादी का वर्ण्य विषय है धरती, जो कुछ उसे होना चाहिए।

Question number: 1 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

आदर्शवादी साहित्यकार जीवन के किस पक्ष का निरूपण करता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

आनन्ददायक पक्ष का

b.

यथार्थ पक्ष का

c.

आन्तरिक पक्ष का

d.

दार्शनिक पक्ष का

Question number: 2 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

परितोष का समानार्थक शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

आनन्द

b.

उपदेश

c.

हँसी

d.

भावुक

Question number: 3 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्न में से कौनसा कथन गलत है?

Choices

Choice (4) Response

a.

भारतीय साहित्यशास्त्र में रस को विशेष महत्व दिया गया है

b.

यथार्थवादी जीवन के सत्यों को नग्न रूप में प्रस्तुत करता है

c.

आदर्शवादी आदर्श शब्द का प्रयोग दर्शनशास्त्र की तरह करता है

d.

प्रत्येक महान् साहित्यकार एक सीता तक आदर्शवादी होता है

Question number: 4 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

आदर्शवादी साहित्यकारों के अनुसार मानव चेतना तब तक भटकती रहेगी जब तक

Choices

Choice (4) Response

a.

वह आध्यात्मिक और रहस्यवादी नहीं हो जाती

b.

वह शाश्वत, चिरन्तन सत्य प्राप्त नहीं कर लेती

c.

उसे जीवन के यथार्थ का ज्ञान नहीं हो जाता

d.

उसे जीवन के बाह्य सुख प्राप्त नहीं हो जाते

Question number: 5 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

आध्यात्मिक शब्द में कौनसा प्रत्यय है?

Choices

Choice (4) Response

a.

ईक

b.

आत्मिक

c.

इस

d.

Question number: 6 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

आदर्शवादी साहित्यकार कभी-कभी रहस्यवादी हो जाता है, क्योंकि वह

Choices

Choice (4) Response

a.

भावुक होता है

b.

मूल्यों को अधिक महत्व देता है

c.

जीवन में आनन्द को अधिक महत्व देता है

d.

अन्तर्मुखी होता है

Question number: 7 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक हो सकता है

Choices

Choice (4) Response

a.

आदर्शवाद एवं यथार्थवाद

b.

आदर्शवादी साहित्य

c.

प्रयोजनवादी साहित्य

d.

यथार्थवादी साहित्य

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