Reading Comprehension (CTET Paper-II Hindi): Questions 587 - 592 of 592

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Passage

तिमिर दारूण मिहिर बरसो।

ज्योति के कर अन्ध कारागार का सजग परसो।

खो गया जीवन हमारा

अन्धता से गत सहारा

गात के सम्पात पर उत्थान देकर प्राण बरसो।

क्षिप्रतर हो गात हमारी,

खुले प्रतिकली कुसुम क्यारी,

सहज सौरभ से समीरण पर सहस्त्रों किरण हरसो।

Question number: 587 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

उत्थान शब्द में प्रयुक्त सन्धि है

Choices

Choice (4) Response

a.

व्यंजन

b.

स्वर

c.

विसर्ग

d.

None of the above

Question number: 588 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कवि ने प्रस्तुत पद्यांश में किसकी वन्दना की है?

Choices

Choice (4) Response

a.

चन्द्रमा

b.

धरती

c.

सूर्य

d.

आराध्य देव

Question number: 589 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

प्रस्तुत पद्यांश में ‘सौरभ’ शब्द का प्रयोग किस अर्थ में किया गया है?

Choices

Choice (4) Response

a.

पतन

b.

विकास

c.

बगीचा

d.

सुहावना

Question number: 590 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

तिमिर शब्द का समानार्थी शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रकाश

b.

अंधेरा

c.

वायु

d.

मौसम

Question number: 591 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

इस पद्यांश के आधार पर निम्नलिखित में से कौनसा कथन असत्य है?

Choices

Choice (4) Response

a.

वातावरण की स्थूल अभिव्यक्ति है

b.

कवि ने अज्ञानान्धकार में डूबे प्राणियों को ज्ञान-ज्योति प्रदान करने का अनुरोध किया है

c.

पद्यांश में चित्रात्मक शैली का प्रयोग किया गया है

d.

पद्यांश में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है

Passage

वर्तमान हिन्दी कविता की भूमि में आज एक कोलाहल सा छा रहा है। लोग कहते है कि इस कविता के माध्यम से राजनीति साहित्य पर चढ़ी आ रही है आर जिस कला पक्ष में फूल और फलों की सजावट होनी चाहिए थी, उसमें मजदूरों के गन्दे चिथड़े चिमनियों का धुआँ और खेतों की धूल भरती जा रही है। शुद्ध कला के उपासकों को यह चिन्ता हो रही है कि साहित्य राजनीति के हाथ का रणवाद्य बनता जा रहा है और उसके प्राणों की कलामयी दीप्ति दिनोदिन क्षीण होती जा रही है।

दूसरी ओर एक दल है जो शुद्ध कला की कृतियों को आनन्द और पलायन का प्रयास कहकर उसकी हँसी उड़ाता है। उसका विश्वास है कि जब जीवन में संघर्ष की आँधी चल रही हो, पराधीन राष्ट्र स्वतंत्र होने के लिए आन्दोलन कर रहे हों। ऐसे समय में कवि का अपनी वैयक्तिक अनुभूति के मायाबन्ध में बँधे रहना जीवन के प्रति साहित्य को दायित्वहीनता का प्रमाण है। यह दल चाहता है कि साहित्य अपने कल्पना लोक से उतरकर पृथ्वी पर आए और निष्क्रियता त्याग कर प्रगति के मार्ग पर आरूढ़ रहे।

Question number: 592 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

लेखब कहता है

Choices

Choice (4) Response

a.

राजनीति ने साहित्य को भ्रष्ट कर दिया

b.

राजनीति ने साहित्य को खरीद लिया

c.

साहित्य और राजनीतिक परस्पर विरोधी है

d.

राजनीति, साहित्य पर हावी हो रही है

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