Reading Comprehension (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 563 - 569 of 592

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Passage

अनुकूल भावना सुख है और प्रतिकूल भावना दु: ख। इसलिए मनु ने स्ववशता (स्वाधीनता, स्वतंत्रता) को सुख का लक्षण माना है और परवशता (पराधीनता, परतंत्रता) को दु: ख का। ‘पराधीन सपनेहूँ सुख नाही’ कहकर तुलसीदास ने भी इसी लक्षण का समर्थन किया है। कुछ लोग कामनाओं की पूर्ति को सुख और अपूर्ति को दु: ख मानते हैं। इस प्रकार से मानने पर भी सुख और दु: ख का भाव ना होना ही सिद्ध होता है। नैयायिकों ने सुख-दु: ख को आत्मा का गुण माना है, तो सांख्य मतावलम्बियों ने चित्त का और अन्य लोगों ने इन्हें बुद्धि का परिणाम या विकार कहा। नीतिज्ञों ने सुख और दु: ख का सम्बन्ध क्रमश: धर्म और अधर्म से स्थापित किया। कुछ ने धर्म-अधर्म को कारण और सुख-दु: ख को कार्य माना। धर्म सुख में और अधर्म दु: ख में कारण कार्य (हेतु-फल) का सम्बन्ध बैठाया गया। इस मत के विपरीत कुछ अन्य नीतिज्ञों ने सुख-दु: ख को ही क्रमश: धर्म-अधर्म का कारण माना। उन्होंने पहले मत को उलट दिया। इसी दूसरे मत को सुखवाद कहा जाता है। इस मत के अनुसार धर्म और अधर्म का मूल गुण नहीं है। जो सुखद है वही धर्म है, जो दुखद है वही अधर्म है। धर्म और अधर्म को मौलिक, स्वतंत्र और वास्तविक न मानने से यह मत नीति की सार्वभौमिकता पर प्रहार करताहै। इसके विपरीत धर्मवाद है, जिसमें धर्म स्वतंत्र, मौलिक और वास्तविक माना जाता है और सुख उसके फल समझे जाते हैं। जीवन में सुख-दु: ख घुले-मिले हैं। दोनों की सम मात्रा मान लेना संतुलित दृष्टिकोण है। पर सुखवादी जीवन में सुख अधिक मानते हैं और दु: खवादी दु: ख। एक-दूसरे के वाद का खण्डन करता है। सब सुख है (सुखवाद), ऐसा मानने पर दु: ख की अनुभूति की व्याख्या करना सम्भव नहीं है। सब दु: ख है (दु: खवाद), ऐसा मानने पर सुख की अनुभूति की व्याख्या करना कठिन हो जाता है। सुख को दु: ख का अभाव कहना दु: ख को सुख का अभाव कहना इस कारण न्यायसंगत नहीं है। कभी-कभी चिर दु: ख ही सुख हो जाता है और चिर सुख ही दु: ख। अत: दोनों एक-दूसरे के अन्योन्याश्रित है।

Question number: 563 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्न गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक हो सकता है

Choices

Choice (4) Response

a.

सुखवाद

b.

सुख और दु: ख

c.

दु: खवाद

d.

स्वाधीनता एवं पराधीनता

Question number: 564 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

अनुकूल शब्द का विपरीतार्थक शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रतिहार

b.

प्रतिकूल

c.

मौलिक

d.

सामंजस्य

Question number: 565 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

इनमें से कौनसा कथन गलत है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सुखवाद नीति की सार्वभौमिकता पर प्रहार करता है

b.

तुलसीदार ने पराधीनता को दु: ख का कारण माना है

c.

मनु ने परवशता को सुख का कारण माना है

d.

सुख और दु: ख एक-दूसरे के अन्योन्याश्रित है

Question number: 566 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्न में से कौनसा कथन सही है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सुखवादियों के अनुसार जो सुखद है वही धर्म है, जो दु: खद है वही अधर्म

b.

दु: खवादी और सुखवादी दोनों जीवन में सुख अधिक मानते है

c.

पूरी तरह से सुखी कभी दु: ख नहीं पाता है

d.

मनु ने सुख को आत्म का धर्म माना है

Question number: 567 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

यह परिच्छेद मूलत: किस मत की व्याख्या करता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

न्याय दर्शन की

b.

सांख्य दर्शन की

c.

सुखवाद की

d.

बौद्ध दर्शन की

Question number: 568 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

स्वाधीनता शब्द का समानार्थी है

Choices

Choice (4) Response

a.

परवशता

b.

राज्यतंत्र

c.

स्वराज्य

d.

स्ववशता

Question number: 569 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

सुख और दु: ख के बारे में सन्तुलित दृष्टिकोण क्या है?

Choices

Choice (4) Response

a.

दु: ख है ही नहीं, वह तो केवल बुद्धि का विकार है

b.

जीवन में सुख और दु: ख दानों सम मात्रा में है

c.

हमें हर समय सुखी रहना चाहिए

d.

धर्म-कर्म से ही सुख की प्राप्ति होती है

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