Reading Comprehension (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 538 - 547 of 592

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Passage

जो छूट फिर कहाँ मिले;

पर बोलो टूटे तारों पर,

कब अम्बर शोक मनाता है?

जो बीत गई सो बात गई।

जीवन में वह था एक कुसुम,

थे उसपर नित्य निछावर तुम,

वह सूख गया तो सूख गया;

मधुबन की छाती को देखों,

सूखी कितनी इसकी कलियाँ,

मुरझाई कितनी वल्लरियाँ,

जो मुरझाई फिर कहाँ खिलीं,

पर बोलों सूखे फूलों पर,

कब मधुबन शोर मचाता है?

जो बीत गई सो बात गई।

- हरिवंश राय बच्चन

Question number: 538 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

अम्बर के पास शोक का क्या कारण है?

Choices

Choice (4) Response

a.

अनेक तारे टूट गये है

b.

अँधेरा हो जाता है

c.

तारे डूब जाते है

d.

अम्बर का आनन देखने योग्य नहीं रहा

Question number: 539 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

काव्यांश में आए दो समानार्थी शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

मधुबन, अम्बर

b.

अम्बर, आनन

c.

कलियाँ, वल्लरियाँ

d.

सूखी, मुरझाई

Passage

इन्द्रदेवता कोटर में तोते से आकर यूँ बोले।

‘सब पक्षी उड़ गए यहाँ से तुमने पंख न खोले।

रहने लायक हरे वृक्ष देखो हैं कितने वन में?

सूख गया वट वृक्ष गिरेगा, सोच रहे हो क्या मन में?

तोता बोला, ‘इन्द्रदेव मैंने कोटर में जन्म लिया।

वट के फल खाए, इसने रक्षा की, सम्मान दिया।।

सुखसम्पत्ति के साथी, विपदा आए करें किनारा।

देवराज! अबस्वयं बताओ क्या कर्तव्य हमारा?

इन्द्र खुश हुए बोले, ‘प्रिय! जो माँगो वरदान मिले।’

तोता बोला, ‘देव! कृपा से हराभरा यह ठूँठ खिले।।’

‘तथास्तु’ कहकर देवराज फिर दिए न कहीं दिखाई।

हराभरा वट वृक्ष हुआ फिर हरियाली लौट आई।

जननी जन्म भूमि की खातिर कितना मन बलिदानी।

मन-प्राणों में जगी रहे, तोते की यह अमर कहानी।।

Question number: 540 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

सभी पक्षी वृक्ष को छोड़कर क्यों उड गए थे

Choices

Choice (4) Response

a.

क्योंकि उन्हें शिकारी का डर था

b.

क्योंकि अन्यत्र प्रचुर मात्रा में भोजन उपलब्ध था

c.

क्योंकि वृक्ष सूख गया था

d.

All of the above

Question number: 541 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

कोटर में तोते के पास कौन आया?

Choices

Choice (4) Response

a.

एक सर्प

b.

वरूण देव

c.

एक शिकारी

d.

इन्द्रदेव

Question number: 542 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘तथास्तु’ का अर्थ है

Choices

Choice (4) Response

a.

ऐसा ही हो

b.

तुरन्त

c.

कभी न हो

d.

निकृष्ट

Question number: 543 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

‘वन’ शब्द का पर्यायवाची है

Choices

Choice (4) Response

a.

वाट

b.

व्याल

c.

अनिल

d.

विपिन

Question number: 544 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘सुख सम्पत्ति’ में प्रयुक्त समास है

Choices

Choice (4) Response

a.

दव्गु

b.

कर्मधारय

c.

तत्पुरूष

d.

दव्न्दव्

Question number: 545 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

‘अमर’ का समानार्थी शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

शाश्वत

b.

अजर

c.

सिन्दूर

d.

योग्य

Passage

विद्वानों का यह कथन बहुत ठीक है कि विनम्रता के बिना स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं। इस बात वो सब लोग मानते हैं कि आत्मसंस्कार के लिए थोड़ी बहुत मानसिक स्वतंत्रता परमावरश्य है - चाहे उस स्वतंत्रता में अभिमान और नम्रता दोनों का मेल हो और चाहे वह नम्रता ही से उत्पन्न हो। यह बात तो निश्चित है कि जो मनुष्य मर्यादापूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहता है उसके लिए वह गुण अनिवार्य है, जिससे आत्मनिर्भरता आती है और जिससे अपने पैरों के बल खड़ा होना आता है। युवा को यह सदा स्मरण रखना चाहिए कि वह बहुम कम बातें जानता है, अपने ही आदर्श से वह बहुत नीचे है और उसकी आकांक्षाएँ उसकी योग्यता से कहीं बढ़ी हुई है। उसे इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने बड़ों का सम्मान करे, छोटे और बराबर वालों से कोमलता का व्यवहार करें, ये बातें आत्ममर्यादा के लिए आवश्यक है। यह सारा संसार, जो कुछ हम हैं और कुछ हमारा है - हमारा शरीर, हमारी आत्मा, हमारे कर्म, हमारे भोग, हमारे घर और बाहर की दशा, हमारे बहुत से अवगुण और थोड़े गुण सब इसी बात की आवश्यकता प्रकट करते हैं कि हमें अपनी आत्मा को नम्र रखना चाहिए। नम्रता से मेरा अभिप्राय दब्बूपन से नहीं है, जिसके कारण मनुष्य दूसरों का मुँह ताकता है, जिससे उसका संकल्प क्षीण और उसकी प्रज्ञा मन्द हो जाती है, जिसके कारण बढ़ने के समय भी पीछे रहता है और अवसर पड़ने पर चट-पट किसी बात का निर्णय नहीं कर सकता। मनुष्य का बेड़ा उसके अपने ही हाथ में है, उसे वह चाहे जिधर ले जाए। सच्ची आत्मा वही है तो प्रत्येक दशा में प्रत्येक स्थिति के बीच अपनी राह आप निकालती है।

Question number: 546 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है

Choices

Choice (4) Response

a.

नम्रता

b.

विनम्रता और स्वतंत्रता

c.

आत्ममर्यादा और स्वतंत्रता

d.

विनम्रता का महत्व

Question number: 547 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

आत्ममर्यादा के लिए आवश्यक है

Choices

Choice (4) Response

a.

अपने से बड़ों का सम्मान करना तथा छोटो और बराबर वालों से कोमलतापूर्वक व्यवहार करना

b.

अपनी मर्यादा में रहना

c.

विनम्रता का व्यवहार करना

d.

अपनी आत्मा को नम्र रखना

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