Reading Comprehension (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 514 - 521 of 592

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Passage

वर्तमान हिन्दी कविता की भूमि में आज एक कोलाहल सा छा रहा है। लोग कहते है कि इस कविता के माध्यम से राजनीति साहित्य पर चढ़ी आ रही है आर जिस कला पक्ष में फूल और फलों की सजावट होनी चाहिए थी, उसमें मजदूरों के गन्दे चिथड़े चिमनियों का धुआँ और खेतों की धूल भरती जा रही है। शुद्ध कला के उपासकों को यह चिन्ता हो रही है कि साहित्य राजनीति के हाथ का रणवाद्य बनता जा रहा है और उसके प्राणों की कलामयी दीप्ति दिनोदिन क्षीण होती जा रही है।

दूसरी ओर एक दल है जो शुद्ध कला की कृतियों को आनन्द और पलायन का प्रयास कहकर उसकी हँसी उड़ाता है। उसका विश्वास है कि जब जीवन में संघर्ष की आँधी चल रही हो, पराधीन राष्ट्र स्वतंत्र होने के लिए आन्दोलन कर रहे हों। ऐसे समय में कवि का अपनी वैयक्तिक अनुभूति के मायाबन्ध में बँधे रहना जीवन के प्रति साहित्य को दायित्वहीनता का प्रमाण है। यह दल चाहता है कि साहित्य अपने कल्पना लोक से उतरकर पृथ्वी पर आए और निष्क्रियता त्याग कर प्रगति के मार्ग पर आरूढ़ रहे।

Question number: 514 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

निम्न में से कौनसा शब्द फूल का पर्यायवाही नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

पवमान

b.

सारंग

c.

प्रसून

d.

सुमन

Question number: 515 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

शुद्ध कला के उपासकों की दृष्टि में कला का स्वरूप क्या है?

Choices

Choice (4) Response

a.

जीवन से पलायन

b.

फूल और फलों की सजावट

c.

अनुभूति का बन्धन

d.

दायित्वहीनता का बोध

Question number: 516 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

माया बन्ध में प्रयुक्त समास है

Choices

Choice (4) Response

a.

तत्पुरूष

b.

अव्ययीभाव

c.

दव्गु

d.

कर्मधारय

Question number: 517 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

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Question

पराधीन में प्रयुक्त सन्धि है

Choices

Choice (4) Response

a.

दीर्घ

b.

गुण

c.

यण

d.

वृद्धि

Passage

गोस्वामी तुलसीदास के युग में भारत पर मुगल बादशाहों का शासन था। पूरा देश पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। तुलसीदार ने पराधीनता की पीड़ा को अनुभव करते हुए उदास और हताश जनता को राम-भक्ति के रूप में शक्ति और स्वतंत्रता का संदेश दिया। उन्होंने अपने युग के शासकों की दमनकारी नीतियों को रावण के दुराचारों के माध्यम से दर्शाया। रावण ने अपनी तानाशाही नीतियों से सभी को अपना दास बना लिया था तथा किसी को स्वतंत्र नहीं छोड़ा था - “राखेउ कोउ न सुतन्त्र।” यही नहीं, उस दुष्ट ने हमारी राष्ट्रीश् प्रतिष्ठा की प्रतीक सीता जी का भी अपहरण कर लिया था। ऐसे युग में तुलसी ने भक्ति और भगवान सभी को स्वतंत्र बताया। शील, शक्ति और स्वतंत्रता के प्रतीक भगवान् राम एक जनतांत्रिक नेता के रूप में दक्षिण भारत की जनजातियों के वीर योद्धाओं की सेना संगठित करके रावण के विरूद्ध एक स्वतंत्रता आन्दोलन का संचालन करते हैं और राष्ट्र की अस्मिता सीता को मुक्त कराने में सफल होते हैं। तुलसी ने अपने महान् ग्रन्थ ‘रामचरित मानस’ के लंका काण्ड में राम की इस समर-विजय का वर्णन किया है। उन्होंने लंका काण्ड के अंत में लिखा है कि जो व्यक्ति भगवान् राम की इस ‘समर-विजय’ को ध्यान में पढ़ेगा या सुनेगा, उसे भगवान् राम विजय, विवेक और वैभव प्रदान करेंगे - “विजय, विवेक, विभूति नित, तिनहिं देहि भगवान्।” ऐसा प्रेरक प्रबोधक और प्रभावी है तुलसी की भक्ति का स्वरूप।

Question number: 518 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

सीताजी हमारी राष्ट्रीय ………. . की प्रतीक है। इस वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त शब्द है।

Choices

Choice (4) Response

a.

पताका

b.

उत्कर्ष

c.

प्रतिष्ठा

d.

उपलब्धि

Question number: 519 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

उपरोक्त अवतरण का उपयुक्त शीर्षक है

Choices

Choice (4) Response

a.

तुलसी की राम भक्ति

b.

तुलसी के राम

c.

तुलसी की भक्ति का स्वरूप

d.

तुसलीदास का युग

Question number: 520 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

तुलसी के युग में भारत पर ………… शासकों का शासन था। स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

तुर्क

b.

मुगल

c.

अफगान

d.

ब्रिटिश

Question number: 521 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

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Question

कौनसा कथन सही नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

तुलसी की भक्ति शक्ति, संघर्ष विजय और स्वतंत्रता का संदेश देती है

b.

रावण, अन्यायी, अत्याचारी, निरंकुश शासक था

c.

तुलसी का युग पराधीनता का युग था

d.

तुलसी की भक्ति में दासता, दीनता, हीनता आदि की प्रमुखता है

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