Reading Comprehension (CTET Paper-II Hindi): Questions 457 - 463 of 592

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Passage

आज के शिक्षाक्रम में चरित्रगठन का कोई स्थान नहीं है और न उसे कोई महत्व दिया जाता है। हमारी संस्कृति में गुरू और शिष्य का संबंध बहुत ही सुन्दर और मीठा हुआ करता था। इसका कारण यही था कि दोनों का एक-दूसरे पर विश्वास हुआ करता था। गुरू शिष्यों का पुत्रवत् मानते थे और उन पर स्नेह रखते थे। शिष्य गुरू को पिता-तुल्य और विश्वसनीय समझता था। गुरू का शिष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा करता था और गुरू और शिष्य के बीच केवल व्यापारिक संबंध जिसमें पैसे के बदले कुछ पुस्तकें पढ़ा देने मात्र का एक सम्पर्क होता है, न रहकर आध्यात्मिक संबंध हो जाता था जो घनिष्ठ हुए बिना नहीं रह सकता था। आज आए दिन समाचार पत्रों में पढ़ने को मिलता है कि कहीं विद्यार्थियों ने शिक्षकों के विरूद्ध हड़ताल कर दी तो कहीं शिक्षकों में भी दल-बन्दियाँ हो गई और विद्यार्थी भी कुछ एक दल में और कुछ दूसरे दल में शामिल हो गए तथा एक या दूसरे का समर्थन करने लगे। हाल ही में एक भयंकर दुर्घटना भी पढ़ने में आई है कि शिक्षक की परीक्षा संबंधी कड़ाई करने से असंतुष्ट होकर कुछ विद्यार्थियों ने शिक्षक के ही प्राण ले लिए। यदि कोई स्कूल का विद्यार्थी ऐसी बात करे तो वह समझ में आ सकती है पद जब किसी यूनिवरसिटी या कॉलेज का विद्यार्थी ऐसे काम करता है तो यह चिन्ता का विषय हो जाता है। जहाँ तक समझ में आता है इसका मौलिक कारण चरित्र गठन पर ध्यान न देना और छात्रों पर शिक्षक वर्ग के नैतिक प्रभाव का न होना ही है। यह कथन किसी प्रदेश विशेष के लिए न होकर साधारणतया यह समस्या सारे देश में विद्यमान है।

Question number: 457 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

चरित्रगठन का सही सन्धि विच्छेद है

Choices

Choice (4) Response

a.

दव्न्दव्

b.

दव्गु

c.

तत्पुरूष

d.

कर्मधारय

Question number: 458 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

उक्त गद्यांश के विषय से सम्बन्धित सर्वाधिक उचित शीर्षक है

Choices

Choice (4) Response

a.

छात्र असन्तोष

b.

शिक्षाक्रम में चरित्रगठन का महत्व

c.

आज की शिक्षा की समस्याएँ

d.

उच्च शिक्षा में हिंसा

Question number: 459 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

भारतीय संस्कृति में गुरू और शिष्य, के सम्बन्ध मधुर होते थे, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

गुरूजन केवल पुस्तकें मात्र नहीं पढ़ाते थे

b.

समाज में गुरूजनों की पूजा की जाती थी

c.

प्राचीन काल में शिष्य अपने गुरूजनों को पिता-तुल्य मानते थे

d.

छात्रों व गुरूजनों के आपसी सम्बन्ध विश्वास पर आधारित थे

Passage

चन्दा-तारों सी सहज क्रान्ति, नदियों में है मुस्कान भरी,

है पवन-झकोंरों में दुलार खेतों में है दौलत बिखरी,

पग-पग मेरा विश्वास भरा,

तप से है यह जीवन निखरा,

प्रखर कर्म का पाठ सतत-

पढ़ती मैं भारत माता हूँ।।

मैं वज्र-सदृश विपदाओं को भी अनायास सह लेती हूँ,

सुधा-दान कर औरों को, मैं विषय पीकर मुस्काती हूँ।

Question number: 460 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

प्रस्तुत काव्यांश में किस कला की चर्चा हुई है?

Choices

Choice (4) Response

a.

नदियाँ

b.

विश्वास

c.

शक्ति

d.

सहनशीलता

Question number: 461 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

निम्नलिखित में से कौनसा कथन उपयुक्त नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

कष्ट सहना सिखाती है

b.

कर्महीनता का पाठ पढ़ाती है

c.

बन्धुता-प्रेम का फैलाती है

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

Question number: 462 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

खेतों में दौलत बिखरी होने से क्या तात्पर्य है?

Choices

Choice (4) Response

a.

अच्छी फसल होती

b.

खजाने गड़े हैं

c.

खाद के रूप में दौलत बिखेरी जाती है

d.

किसान बहुत अमीर है

Question number: 463 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘सतत’ शब्द का समानार्थक शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

एकान्तर

b.

क्रम

c.

भिन्न-भिन्न

d.

लगातार

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