Reading Comprehension (CTET Paper-II Hindi): Questions 289 - 297 of 592

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Passage

माँगी नाव न केवट आना। कहै तुम्हारा मरम मैं जाना।।

चरण-कमल राज कहँ सबु कहई। मानुष करनि मृरि कछु अहई।।

छुवत सिला भई नारि सुहाई। पाहन ते न काठ कठिनाई।।

तरनिंउ मुनिघरनी होई जाई। बाट परइ मोरी नाव उड़ाई।।

एहि प्रतिपालों सबु परिवारू नहिं जानौ कछु और उबारू

जौं प्रभु पार अवसि या चहहू। मोहि पदय दुग पखारन कहहु।।

Question number: 289 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘चरण कमल राज कहँ सबु कहई’ पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार है

Choices

Choice (4) Response

a.

उत्प्रेक्षा

b.

उपमा

c.

अनुप्रास

d.

अन्योक्ति

Question number: 290 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

ये पक्तियाँ कौन कहा रहा है?

Choices

Choice (4) Response

a.

राम

b.

अहिल्या

c.

लक्ष्मण

d.

केवट

Question number: 291 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

पद्यांश के अनुसार श्रीरामचन्द्र चरण-कमलों में लगी धूल से निर्जीव वस्तु किसमें परिवर्तित हो जाती है?

Choices

Choice (4) Response

a.

स्वर्ण

b.

शिला

c.

स्त्री

d.

आभूषण

Question number: 292 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

शब्द ‘शिला’ से पर्याय है

Choices

Choice (4) Response

a.

कँकड़

b.

धूल

c.

पर्वत

d.

पत्थर

Question number: 293 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

इस पद्यांश में किस रस का भाव प्रकट हो रहा है

Choices

Choice (4) Response

a.

वात्सल्य

b.

शान्त

c.

भक्ति

d.

वीर

Passage

‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।’ बिना विचार कार्य करने वाला जीवन भर नौ-नौ आसूँ रोया करता है। अत: कार्य को प्रारम्भ करने से पूर्व भली प्रकार से सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। जिस पकार मुँह से निकली बात, कमान से छूटा तीर वापिस नहीं आते, उसी प्रकार बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। अत: उचित समय पर उचित निर्णय करना ही मानव का परम कर्तव्य है। विचारपूर्वक आगे बढ़ना ही सफलता का मूल मंत्र है। गलती करके पश्चाताप करना तो एक गलती के ऊपर दूसरी गलती करना है। जो बात हो चुकी उस पर चिन्ता करना, खेद करना, पश्चाताप करना व्यर्थ है, क्योंकि इससे कोई लाभ है ही नहीं। यदि पृथ्वीराज मोहम्मद गौरी के विषैले दाँतों को पहली बार हराते ही तोड़ देता, तो भारत का इतिहास कुछ और ही होता। कैकेयी के अविवेकपूर्ण निर्णय से न केवल उसे वैधव्य ही झेलना पड़ा बल्कि वह सामाजिक निन्दा का शिकार भी बनी। उसने पश्चाताप स्वरूप राम को वापस लाने का प्रयास किया, किन्तु सब व्यर्थ। रावण जैसे पराक्रमी शिवभक्त राजा ने अविवेक के कारण सीता-हरण कर लिया और उसकी यही भूल उसके लिए ही नहीं, बल्कि उसके समस्त परिवार के लिए विनाश का कारण बनी। निष्कर्षस्वरूप कहा जा सकता है कि बना सोचे व विचार किए कार्य नहीं करना चाहिए क्योंकि उसका पराािम अमंगलकारी होता है।

Question number: 294 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

उचित समय पर उचित निर्णय लेना ही मनुष्य का ………. . है।

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रयास

b.

अविवेक

c.

पाश्चाताप

d.

परम कर्तव्य

Question number: 295 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘अमंगल’ शब्द का विलोम शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

शुभ

b.

सत्य

c.

मंगल

d.

अशुभ

Question number: 296 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत’ लोकोक्ति का अर्थ बताइए।

Choices

Choice (4) Response

a.

जब चिड़िया ने सारा खेत खा लिया तब भगाने का क्या लाभ

b.

अब समय रहते चिड़िया को भगा दिया होता तो वह खेत नहीं चुगती

c.

अब पछताना व्यर्थ है क्योंकि चिड़िया तो अपना काम कर गई

d.

अवसर निकलने पर पछताने का कोई फायदा नहीं

Question number: 297 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

शिव भक्त में प्रयुक्त समास है

Choices

Choice (4) Response

a.

अव्ययी भाव

b.

कर्मधारय

c.

तत्पुरूष

d.

बहुब्रीहि

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