Reading Comprehension (CTET Paper-II Hindi): Questions 251 - 257 of 592

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Passage

संस्कृति के निर्माण में एक सीमा तक देश और जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्राय: सभी सुसंस्कृत और सभ्य देशों के एक सीता तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अन्तर अवश्य आता है। राष्ट्रीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परम्परा से सम्पृक्त बनाती है, अपनी रीति-नीति की सम्पदा से विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिलन के अवसर अति सुलभ हो गए हैं। संस्कृतियों का पारस्परिक संघर्ष भी शुरू हो गया है। कुछ नए विदेशी प्रभाव हमारे देश पर पड़ रहे है, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु बना दिया है। हमारी आस्था डगमगाने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। अपनी संस्कृति को छोड़ विदेशी संस्कृति के विवेकहीन अनुकरण से हमारे राष्ट्रीय गौरव को जो ठेस पहुँच रही है, वह किसी राष्ट्र प्रेमी जागरूक व्यक्ति से छिपी नहीं है। भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अत: आज के वैज्ञानिक युग में हम किसी भी विदेशी संस्कृति के जीवन्त तत्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे किन्तु अपनी सांस्कृतिक निधि की उपेक्षा करके नहीं। यह परावलम्बन राष्ट्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य की आलोप्रदायिनी किरणों से पौधे को चाहे जितनी जीवनशक्ति मिले किन्तु अपनी जमीन और अपनी जड़ों के बिना कोई पौधा जीवित नहीं रह सकता। अविवेकी अनुकरण, अज्ञान का ही पर्याय है।

Question number: 251 (7 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

हम अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु इसलिए हो गए हैं, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response
a.

हम तीव्रता से बढ़ते विदेशी कुप्रभाव का प्रभावी रूप से सामना नहीं कर पा रहे हैं

b.

हम चिन्तन के स्तर पर पूर्ण परिपक्वता की स्थिति पर नहीं पहुँच पाए हैं

c.

नई पीढ़ी ने विदेशी संस्कृति के कुछ तत्वों को स्वीकार करना प्रारम्भ कर दिया है

d.

अपनी संस्कृति के प्रति हमारी आस्था कमजोर हो गई है

Passage

लोहे के पेड़ हरे होंगे, तू गान प्रेम का गाता चल,

नम होगी यह मिट्टी जरूर, आँसू के कण बरसाता चल।

सिसकियों और चीत्कारों से हो चाहे जितना आकाश भरा,

कंकालों का हो ढेर, खप्परों से चाहे हो पटी धरा।

आशा के स्वर का भर, पवन को लेकिन लेना ही होगा,

जीवित सपनों के लिए मार्ग, मुर्दों को देना ही होगा,

रंगों केसात घर उंडेल, यह अंधियाली रंग जाएगी,

उषा को सत्य बनाने को, जावक नभ पर छितराता चल।

लोहे के पेड़ हरे होंगे, तू गान प्रेम का गाता चल,

नम होगी यह मिट्टी जरूर, आँसू के कण बरसाता चल।

Question number: 252 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘जावक’ शब्द का क्या अर्थ है

Choices

Choice (4) Response
a.

टेसू

b.

महावर

c.

लाल

d.

लहू

Question number: 253 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

इन पंक्तियों में से कौनसा रस है?

Choices

Choice (4) Response
a.

वीर रस

b.

रौद्र

c.

करूण

d.

शान्त

Question number: 254 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘लोहे का पेड़’ किसे कहा गया है?

Choices

Choice (4) Response
a.

लोहे से बने पेड़ों को

b.

लोहे जैसे भावना शून्य लोगों को

c.

मशीनी युग के कठोर हृदय को

d.

साहसी और निर्मम मनुष्य को

Question number: 255 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘रंगों के सातों घट’ से क्या अभिप्राय है?

Choices

Choice (4) Response
a.

रंगों भरा जीवन

b.

सात रंगों के सात घड़े

c.

आशा और खुशियों से भरा जीवन

d.

रंगों की वर्षा

Question number: 256 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘जीवित सपनों के लिए मार्ग मुर्दों को देना ही होगा’ में किस भाव की ओर संकेत है

Choices

Choice (4) Response
a.

पुरानी रूढ़ियों को हटाना पड़ेगा नए युग के लिए

b.

जीवित व्यक्तियों के लिए मुर्दों को हटाना पड़ेगा

c.

मुर्दा कायरों को हटाना पड़ेगा

d.

नए लोगों के आने की व्यवस्था

Question number: 257 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘खप्परों से चाहे हो पटी धरा’ से क्या आशय है?

Choices

Choice (4) Response
a.

युद्धों के विनाश से भरी धरती

b.

शिवजी का ताण्डव नृत्य

c.

जमीन पर खप्पर पड़े रहना

d.

आतंकवाद का असर

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