Reading Comprehension (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 249 - 255 of 593

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Passage

संस्कृति के निर्माण में एक सीमा तक देश और जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्राय: सभी सुसंस्कृत और सभ्य देशों के एक सीता तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अन्तर अवश्य आता है। राष्ट्रीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परम्परा से सम्पृक्त बनाती है, अपनी रीति-नीति की सम्पदा से विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिलन के अवसर अति सुलभ हो गए हैं। संस्कृतियों का पारस्परिक संघर्ष भी शुरू हो गया है। कुछ नए विदेशी प्रभाव हमारे देश पर पड़ रहे है, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु बना दिया है। हमारी आस्था डगमगाने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। अपनी संस्कृति को छोड़ विदेशी संस्कृति के विवेकहीन अनुकरण से हमारे राष्ट्रीय गौरव को जो ठेस पहुँच रही है, वह किसी राष्ट्र प्रेमी जागरूक व्यक्ति से छिपी नहीं है। भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अत: आज के वैज्ञानिक युग में हम किसी भी विदेशी संस्कृति के जीवन्त तत्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे किन्तु अपनी सांस्कृतिक निधि की उपेक्षा करके नहीं। यह परावलम्बन राष्ट्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य की आलोप्रदायिनी किरणों से पौधे को चाहे जितनी जीवनशक्ति मिले किन्तु अपनी जमीन और अपनी जड़ों के बिना कोई पौधा जीवित नहीं रह सकता। अविवेकी अनुकरण, अज्ञान का ही पर्याय है।

Question number: 249 (5 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

हम विदेशी संस्कृति के महत्वपूर्ण तत्वों को ग्रहण कर सकते है, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

विदेशी संस्कृतिक के जीवन तत्व हमारी संस्कृति को समृद्ध ही करेंगे

b.

भारतीय संस्कृति में त्याग केसाथ ग्रहण की अद्भुत क्षमता है

c.

आज के वैज्ञानिक युग में ऐसा करना परमावश्यक है

d.

भारतीय संस्कृति जड़ न होकर लेन-देन में विश्वास रखती है

Question number: 250 (6 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

हम अपनी सांस्कृतिक सम्पदा की अपेक्षा इसलिए नहीं कर सकते, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

ऐसा करना हमारे राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं है

b.

ऐसा करने से हम जड़-विहीन पौधे के सदृश हो जायेंगे

c.

अविवेकी अनुकरण, अज्ञान का ही दूसरा नाम है और हम अज्ञानी नहीं है

d.

अपने राष्ट्र को अपमानिक करने के समान है

Question number: 251 (7 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

विच्छिन्न शब्द से आशय है

Choices

Choice (4) Response

a.

अलग-अलग

b.

अलग होना

c.

विभिन्न

d.

काट देना

Passage

लोहे के पेड़ हरे होंगे, तू गान प्रेम का गाता चल,

नम होगी यह मिट्टी जरूर, आँसू के कण बरसाता चल।

सिसकियों और चीत्कारों से हो चाहे जितना आकाश भरा,

कंकालों का हो ढेर, खप्परों से चाहे हो पटी धरा।

आशा के स्वर का भर, पवन को लेकिन लेना ही होगा,

जीवित सपनों के लिए मार्ग, मुर्दों को देना ही होगा,

रंगों केसात घर उंडेल, यह अंधियाली रंग जाएगी,

उषा को सत्य बनाने को, जावक नभ पर छितराता चल।

लोहे के पेड़ हरे होंगे, तू गान प्रेम का गाता चल,

नम होगी यह मिट्टी जरूर, आँसू के कण बरसाता चल।

Question number: 252 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘जावक’ शब्द का क्या अर्थ है

Choices

Choice (4) Response

a.

लहू

b.

लाल

c.

महावर

d.

टेसू

Question number: 253 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘रंगों के सातों घट’ से क्या अभिप्राय है?

Choices

Choice (4) Response

a.

रंगों भरा जीवन

b.

आशा और खुशियों से भरा जीवन

c.

सात रंगों के सात घड़े

d.

रंगों की वर्षा

Question number: 254 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

इन पंक्तियों में से कौनसा रस है?

Choices

Choice (4) Response

a.

करूण

b.

वीर रस

c.

शान्त

d.

रौद्र

Question number: 255 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

‘खप्परों से चाहे हो पटी धरा’ से क्या आशय है?

Choices

Choice (4) Response

a.

युद्धों के विनाश से भरी धरती

b.

शिवजी का ताण्डव नृत्य

c.

जमीन पर खप्पर पड़े रहना

d.

आतंकवाद का असर

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