Reading Comprehension (CTET Paper-II Hindi): Questions 241 - 246 of 592

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Passage

सावधान मानव! यदि विज्ञान है तलवार।

फेंक दे इसे, तजकर मोह, स्मृति के पार।

हो चुका है सिद्ध तू, शिशु अज्ञान।

फूल काँटों की तुझे, नहीं पहचान।

खेल सकता तू नहीं, ले हाथ तलवार।

काट लेगा अंग अपने, तीखी है धार।

Question number: 241 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कवि ने विज्ञान रूपी तलवार को कहाँ रखने के लिए कहा है?

Choices

Choice (4) Response

a.

घर में

b.

शस्त्रगार में

c.

सुरक्षित स्थान पर

d.

यादों से परे

Question number: 242 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

विज्ञान के प्रयोग से मानव क्या करेगा?

Choices

Choice (4) Response

a.

नई संरचना

b.

देश का हित

c.

अपना अहित

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

Question number: 243 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कवि के अनुसार मानव विज्ञान के प्रयोग में निम्न में से किसके समान है?

Choices

Choice (4) Response

a.

असाधारण वैज्ञानिक

b.

सिद्ध सन्त

c.

अज्ञानी बालक

d.

प्रशिक्षिक सैनिक

Question number: 244 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘फूल’ शब्द का पर्यायवाची है

Choices

Choice (4) Response

a.

सुमन

b.

प्रसून

c.

पुष्प

d.

All a. , b. and c. are correct

Passage

संस्कृति के निर्माण में एक सीमा तक देश और जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्राय: सभी सुसंस्कृत और सभ्य देशों के एक सीता तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अन्तर अवश्य आता है। राष्ट्रीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परम्परा से सम्पृक्त बनाती है, अपनी रीति-नीति की सम्पदा से विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिलन के अवसर अति सुलभ हो गए हैं। संस्कृतियों का पारस्परिक संघर्ष भी शुरू हो गया है। कुछ नए विदेशी प्रभाव हमारे देश पर पड़ रहे है, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु बना दिया है। हमारी आस्था डगमगाने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। अपनी संस्कृति को छोड़ विदेशी संस्कृति के विवेकहीन अनुकरण से हमारे राष्ट्रीय गौरव को जो ठेस पहुँच रही है, वह किसी राष्ट्र प्रेमी जागरूक व्यक्ति से छिपी नहीं है। भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अत: आज के वैज्ञानिक युग में हम किसी भी विदेशी संस्कृति के जीवन्त तत्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे किन्तु अपनी सांस्कृतिक निधि की उपेक्षा करके नहीं। यह परावलम्बन राष्ट्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य की आलोप्रदायिनी किरणों से पौधे को चाहे जितनी जीवनशक्ति मिले किन्तु अपनी जमीन और अपनी जड़ों के बिना कोई पौधा जीवित नहीं रह सकता। अविवेकी अनुकरण, अज्ञान का ही पर्याय है।

Question number: 245 (1 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

हम विदेशी संस्कृति के महत्वपूर्ण तत्वों को ग्रहण कर सकते है, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

आज के वैज्ञानिक युग में ऐसा करना परमावश्यक है

b.

विदेशी संस्कृतिक के जीवन तत्व हमारी संस्कृति को समृद्ध ही करेंगे

c.

भारतीय संस्कृति में त्याग केसाथ ग्रहण की अद्भुत क्षमता है

d.

भारतीय संस्कृति जड़ न होकर लेन-देन में विश्वास रखती है

Question number: 246 (2 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

आधुनिक युग में संस्कृतियों में परस्पर संघर्ष प्रारम्भ होने का प्रमुख कारण यह है कि

Choices

Choice (4) Response

a.

विरोधी संस्कृतियाँ एक-दूसरे के निकट आई है

b.

भिन्न संस्कृतियों के निकट आने के कारण अतिक्रमण एवं विरोध स्वाभाविक है

c.

विरोधी संस्कृतियों ने अपनी सीमाओं का अतिक्रमण प्रारम्भ कर दिया है

d.

कुछ संस्कृतियाँ संघर्ष की भावना से ग्रस्त रहती है

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