Reading Comprehension (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 242 - 248 of 592

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Passage

सावधान मानव! यदि विज्ञान है तलवार।

फेंक दे इसे, तजकर मोह, स्मृति के पार।

हो चुका है सिद्ध तू, शिशु अज्ञान।

फूल काँटों की तुझे, नहीं पहचान।

खेल सकता तू नहीं, ले हाथ तलवार।

काट लेगा अंग अपने, तीखी है धार।

Question number: 242 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

‘विज्ञान’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है

Choices

Choice (4) Response

a.

विज्ञ

b.

वि

c.

विग्

d.

ये भी

Question number: 243 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

विज्ञान रूपी तलवार से मानव को क्या करना है?

Choices

Choice (4) Response

a.

खेलना है

b.

हत्या करनी है

c.

प्रयोग नहीं करना है

d.

प्रयोग में लाना है

Question number: 244 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

विज्ञान के प्रयोग से मानव क्या करेगा?

Choices

Choice (4) Response

a.

नई संरचना

b.

देश का हित

c.

अपना अहित

d.

Question does not provide sufficient data or is vague

Passage

संस्कृति के निर्माण में एक सीमा तक देश और जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्राय: सभी सुसंस्कृत और सभ्य देशों के एक सीता तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अन्तर अवश्य आता है। राष्ट्रीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परम्परा से सम्पृक्त बनाती है, अपनी रीति-नीति की सम्पदा से विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिलन के अवसर अति सुलभ हो गए हैं। संस्कृतियों का पारस्परिक संघर्ष भी शुरू हो गया है। कुछ नए विदेशी प्रभाव हमारे देश पर पड़ रहे है, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु बना दिया है। हमारी आस्था डगमगाने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। अपनी संस्कृति को छोड़ विदेशी संस्कृति के विवेकहीन अनुकरण से हमारे राष्ट्रीय गौरव को जो ठेस पहुँच रही है, वह किसी राष्ट्र प्रेमी जागरूक व्यक्ति से छिपी नहीं है। भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अत: आज के वैज्ञानिक युग में हम किसी भी विदेशी संस्कृति के जीवन्त तत्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे किन्तु अपनी सांस्कृतिक निधि की उपेक्षा करके नहीं। यह परावलम्बन राष्ट्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य की आलोप्रदायिनी किरणों से पौधे को चाहे जितनी जीवनशक्ति मिले किन्तु अपनी जमीन और अपनी जड़ों के बिना कोई पौधा जीवित नहीं रह सकता। अविवेकी अनुकरण, अज्ञान का ही पर्याय है।

Question number: 245 (1 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

हम अपनी सांस्कृतिक सम्पदा की अपेक्षा इसलिए नहीं कर सकते, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

ऐसा करना हमारे राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं है

b.

अपने राष्ट्र को अपमानिक करने के समान है

c.

ऐसा करने से हम जड़-विहीन पौधे के सदृश हो जायेंगे

d.

अविवेकी अनुकरण, अज्ञान का ही दूसरा नाम है और हम अज्ञानी नहीं है

Question number: 246 (2 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘परमाश्वयक’ में प्रयुक्त सन्धि है

Choices

Choice (4) Response

a.

दीर्घ

b.

विसर्ग

c.

यण

d.

व्यंजन

Question number: 247 (3 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

विच्छिन्न शब्द से आशय है

Choices

Choice (4) Response

a.

काट देना

b.

अलग होना

c.

अलग-अलग

d.

विभिन्न

Question number: 248 (4 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

राष्ट्रीय अथवा जातीय संस्कृति की हमारे प्रति सबसे बड़ी देन यह है कि वह हमें

Choices

Choice (4) Response

a.

अपने अतीत से जोड़े रखती है

b.

अपने राष्ट्र की परम्परा और रीति-नीति का बोध कराती है

c.

अपने राष्ट्र की परम्परा और रीति-नीति से जोड़े रखती है

d.

अपने राष्ट्र की परम्परा और रीति-नीति की याद दिलाती रहती है

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