Reading Comprehension (CTET Paper-II Hindi): Questions 214 - 220 of 592

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 827 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 400.00 or

Passage

बाल श्रम ने भारतमाता के दैदीप्यमान मस्तक को मलिनतापूर्ण बना दिया है। उद्योगों और विभिन्न कल-कारखानों में हाड़तोड परिश्रम करते बच्चें को देख मानवता रो पड़ती है। भट्टियों पर काम करते हुए मालिकों के लिए अपने शरीर को होम करने वाले मासूम आँख, नाक एवं फेफड़ों की गम्भीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इनकी नियति ही ऐसी है कि मनुष्य जीवन के चक्र का अहम भाग जवानी इनके लिए नहीं बनी है। ये तो सीधे ही वृद्धावस्था को प्राप्त करते हैं। कथित मालिकों की झिड़कियाँ और गाहे-बगाहे मार झेलने इन बच्चे बालक-बालिकाओं का जीवन देखकर प्रतीत होता है कि सृष्टा ने अत्यधिक क्रूरता ये इनका भाग्य रचा है। नियोक्ताओं के लिए बाल श्रम का उपयोग निपारद है। इसके माध्यम से वे अनुचित लाभ उठाकर अपना पथ कंटक विहीन कर लेता हैं।

बाल श्रम रूपी असुर के बन्धन में जकड़ी बालिकाओं और किशोरियों की स्थिति और भी भयानक है। माता-पिता की दारिद्रय-मुक्ति हेतु भागीरथी प्रयास करती बालिकाएँ स्वयं एक सर्वभोग्या जलधारा के रूप में प्रवाहमान है। जिन्हें जग चाहे ठेकेदार और नियोक्ता पी डालते है और अभिभावक विवशतावश चूँ भी नहीं की पाते। यौनाचार को जो घिनौना चेहरा आज सम्पूर्ण सजाम में दिखाई दे रहा है उसके पीछे बाल श्रम की अभिवृद्धि भी प्रमुख रूप से उत्तरदायी है। सिंगापुर, थाईलैण्ड, मलेशिया, इण्डोनेशिया, नेपाल जैसे देशों में पर्यटन के बहाने मौजमस्ती करने आए लोग दस-बारह वर्ष की वय वाली लड़कियों की माँग करते हैं ताकि वे एड्स से बचे रहें। दलालों के लिए यह सौदा फायदे का होता है। वे बाल श्रम में लगी लड़कियों और उनके मजबूर माता-पिता को अपना शिकार बनाते हैं और देह व्यापार के गहरे गर्त में धकेल देते हैं।

राज्य का दायित्व है कि वह बाल श्रम कानून का कड़ाई से पालन करवाये और दोषियों को कठोर दण्ड का प्रावधान करें। बाल श्रमिकों के पुर्ननिवास हेतु उनके संरक्षकों को समुचित सहायता करायें। तभी हम देश के भविष्य अपने नैनिहालों को पल्लवित होने का अवसर देकर राष्ट्रगौरव को निष्प्रभ होने से बचा सकेंगे।

Question number: 214 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘मानवता’ शब्द में प्रयुक्त प्रत्यय है

Choices

Choice (4) Response

a.

ता

b.

अता

c.

वता

d.

Question number: 215 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘भारतमाता के दैदीप्यमान मस्तक को मलिनतापूर्ण बना दिया है’, इस कथन में कौनसा अलंकार अभिव्यक्त हो रहा है?

Choices

Choice (4) Response

a.

वक्रोक्ति अलंकार

b.

मानवीकरण अलंकार

c.

अन्योक्ति अलंकार

d.

पुरूक्ति प्रकाश अलंकार

Question number: 216 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘बालिकाएँ स्वयं एक सर्वभोग्या जलधारा के रूप में प्रवाहमान है।’ यह कथन किस तथ्य को रेखांकित कर रहा है?

Choices

Choice (4) Response

a.

देश की बालिकाएँ नदियों के समान पवित्र है

b.

बालिकाएँ दरिद्रतावश घर-घर जाकर काम करती है

c.

बाल यौनाचार ने समाज रूपी सरिता को सर्वभोग्या बना डाला है

d.

बाल श्रम से बालिकाओं के यौन शोषण की प्रवृत्ति बढ़ रही है

Question number: 217 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

नियोक्ताओं के लिए बाल श्रम का उपयोग निरापद है।’ इस वाक्य से क्या अभिप्राय है?

Choices

Choice (4) Response

a.

बाल श्रमिकों के यौन शोषण में सुविधा

b.

श्रम के सर्वांग शोषण की सुविधा

c.

बाल श्रमिक हानि नहीं पहुँचाते है

d.

बाल श्रमिक कम मजदूरी पर मिल जाते है

Passage

मैथिलीशरण गुप्ता गाँधी युग के प्रतिनिधि कवि हैं - अपने जीवन के प्रौढ़िकाल में ही वे इस गौरव के अधिकारी हो गए थे। गाँधी युग का प्रतिनिधित्व एक सीमा तक सम्पूर्ण आधुनिक काल का प्रतिनिधित्व भी माना जा सकता है। गाँधी युग की प्राय: समस्त मूल प्रवृत्तियाँ-राष्ट्रीय, सामाजिक और सांस्कृतिक आन्दोलन-गुप्तजी के काव्य में प्रतिफलित है। वह प्रतिफलन प्रत्यक भी है और परोक्ष भी। कुछ रचनाओं में युग-जीवन का स्वर मुखर है और उनमें वातावरण की हलचल का प्रत्यक्ष चित्रण किया गया है। इसनमें कवि राष्ट्रकवि के दायित्व का भी पालन करता है। कुछ अन्य रचनाओं में युग चेतना अत्यन्त प्रखर है परन्तु वह प्रच्छन्न है। गुप्तजी के संस्कार मूलत: सामन्तीय थे और उसके घर का वातावरण वैष्णव था, तथापि वे समय के साथ चलने का निरन्तर प्रयन्त करते थे तथा देश के विभिन्न आन्दोलनों को समझने का भी प्रयत्न्त करते थे। उनकी प्रतिक्रिया प्राय: प्रखर और प्रबल होती थी। गाँधी युग की समस्याओं का चित्रण प्रेमचन्द ने भी किया और अपने ढंग से प्रसाद ने भी। प्रेमचन्द की दृष्टि बहिर्मुखी थी, उनकी चेतना सामाजिक-राजनीतिक थी। प्रसाद की दृष्टि अन्तर्मुखी थी औरउनकी चेतना एकान्त रूप में सांस्कृतिक थी - गाँधी युग की प्राय: सभी प्रमुख समस्याओं को उन्होंने ग्रहण किया, परन्तु उनके बहिरंग में उनकी रूचि नहीं थी। अपने नाटकों में प्रसाद ने उन्हें पूर्णत: सांस्कृतिक रूप में प्रस्तुत किया और कामायनी में आध्यात्मिक धरातल पर। अपने उपन्यासों में प्रसाद उन्हें राजनीतिक-सामाजिक धरातल पर ग्रहण करते है परन्तु शीघ्र ही उनके बहिरंग रूपों को भेदकर उनमें निहित सांस्कृतिक तत्वों का चित्रण भी करने लगते हैं। गुप्तजी की स्थिति मध्यवर्ती है, उनका दृष्टिकोण राष्ट्रीय-सांस्कृतिक है। उनमें न तो प्रेमचन्द के समान व्यावहारिकता का आग्रह है और न प्रसाद की तरह दार्शनिकता का। उनमें सगुण तत्व अधिक हैं। प्रेमचन्द में धर्म भावना का अभाव है तो प्रसाद में लोकभावना का। गुप्तजी में लोक चेतना का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत अधिक मिलता है।

Question number: 218 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘प्रवृत्ति’ शब्द का विपरीतार्थी है

Choices

Choice (4) Response

a.

अस्मिता

b.

संवृत्ति

c.

आवृत्ति

d.

निवृत्ति

Question number: 219 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

इनमें से कौनसा इक प्रत्यय का उदाहरण है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सैद्धान्तिक

b.

राजनीतिक

c.

सामाजिक

d.

All a. , b. and c. are correct

Question number: 220 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

गाँधी युग की समस्याओं का चित्रण किया है

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रेमचन्द ने

b.

मैथिलीशरण गुप्त ने

c.

जयशंकर प्रसाद ने

d.

All a. , b. and c. are correct

Sign In