Reading Comprehension (CTET Paper-II Hindi): Questions 113 - 121 of 592

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Passage

इस संसार की यही रीति है। सत्यवादी मारा जाता है। आज के सहस्त्रों वर्ष पूर्व ग्रीस देश में एक दार्शनिक रहा करता था। उसका नाम सुकरात था। उसकी बातें सीधी सच्ची पर तीखी होती थी। समाज उन्हें सह नहीं सका और उसे कानूनी आज्ञा का पालन करते हुए विष कय प्याला पीना पड़ा। इसी प्रकार तत्कालीन शासन सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरूद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा। सलीब पर ये ईसा का यह आर्तनाद आज भी गूँज रहा है - हे प्रभु हे पिता, तुम हमें क्यों भूल गए हो? साम्प्रादायिक विषय को शान्त करने और लोगों में साम्प्रदायिक सद्भावना फैलाने के लिए गाँधीजी अपने जीवन की बाजी लगाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते फिरे, अंत में उन्हें गोली का शिकार होना पड़ा। इन दृष्टान्तों की पुनरावृत्ति अभी हाल ही में अमेरिका में हुई है। वहाँ के काले लोगों को अनेक रंग और जाति के दुर्व्यवहारों से मुक्ति दिलाकर समाज में समुचिज स्थान दिलाने को डॉ. किंग ने अहिंसक आन्दोलन खड़ा किया था। उन्होंने चाहा कि अमेरिका के गोरे लोगों में हृदय परिवर्तन हो और वे नीग्रो अमेरिकनों को नौकरी में और सामाजिक प्रतिष्ठा में वहीं स्थान पाने दें जो श्वेत अमेरिकनों को मिलता है, लेकिन उसको भी निर्भीक सच्चाई बरतने का मूल्य अपने प्राण देकर चुकाना पड़ा। आज संसार के सामने वही पुराना प्रश्न फिर खड़ा हो गया है। क्या दुनिया में सच कहने वालों का और इन्साफ मांगने वालों का इसी प्रकार अंत होता रहेगा? क्या आपसी विदव्ेष को समाप्त करने की सम्भावना, इस दुनिया में सबको पसन्द नहीं हो सकेगी? जरा सोचिए, यदि इन प्रश्नों का उत्तर नकारात्मक हुआ, तो मनुष्य जाति का भविष्य कितना निराशाजनक होगा?

Question number: 113 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

डॉ. किंग ने अहिंसक आन्दोलन चलाया

Choices

Choice (4) Response

a.

गोरे लोगों के हृदय परिवर्तन के लिए

b.

अश्वेत लोगों की स्वतंत्रता के लिए

c.

आर्थिक सहभागिता के लिए

d.

सत्ता परिवर्तन के लिए

Question number: 114 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

ईसा का आर्तनाद कहाँ से गूँज रहा था?

Choices

Choice (4) Response

a.

किलों पर से

b.

सूली पर से

c.

सलीब पर से

d.

चोटी पर से

Passage

सामने है सिन्धु फैला,

और नभ निस्सीम ऊपर।

किन्तु वह अति दूर मथुरा,

हो रही है दृष्टिगोचर।

और यमुना-जल दिखाई-

पड़ रहा इस सिन्धु में भी।

क्या पता वह जल जलधि में,

आ गया हो आज बहकर।

हाय रे दुर्भाग्य मेरा,

क्यों हुआ अवसाद सहसा।

आज मथुरा की न जाने,

आ गई क्यों याद सहसा!

Question number: 115 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कौनसा विकल्प समानार्थी शब्दों का नहीं हैं?

Choices

Choice (4) Response

a.

उर-हृदय

b.

आह्लाद-अवसाद

c.

दृष्टिगोचर-दिखाई पड़ता

d.

सिन्धु-जलधि

Question number: 116 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

निम्नलिखित किस विकल्प में उपसर्ग प्रयुक्त नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रबलतम

b.

निस्सीम

c.

जलधि

d.

दुर्भाग्य

Question number: 117 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

समुद्र तट पर बैठे हुए कवि को यमुना का जल कहाँ दिखाई पड़ रहा है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सिन्धु में

b.

बहुत दूर मथुरा में

c.

ऊपर निस्सीम नभ में

d.

कल्पना में

Question number: 118 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

इन पंक्तियों में कवि को किसकी याद आ रही है?

Choices

Choice (4) Response

a.

मथुरा

b.

सिन्धु

c.

कृष्ण

d.

यमुना

Question number: 119 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

सिन्धु शब्द का पर्यायवाची है

Choices

Choice (4) Response

a.

सविता

b.

जलधि

c.

धराधर

d.

तरणि

Question number: 120 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

दुर्भाग्य शब्द का विपरीतार्थी शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

नसीब

b.

भाग्य

c.

गौरव

d.

सुभाग्य

Passage

यदि हम सुनने के साथ-साथ सुनाते भी हैं, अर्थात् वार्तालाप भी करते हैं तो बातें याद रहने की सम्भावना काफी अधिक रहती है। इसलिए भाषण तो हमें याद नहीं रहते, परन्तु वार्तालाप हम भूलते नहीं है। सुनने के लिए पुराना भूलना भी जरूरी है। बुद्धि के पास वह शक्ति है, जिससे वह सुनी हुई बातों का सार निकालकर बाकी विस्तार को भुला देती है, तभी हम नई बातें सुन सकते है। दो कान इसलिए है कि सुनने को इतना कुछ है कि एक कम पड़ता है। प्रकृति ने हमें सुख एक ही दिया है इसलिए कि सुनो ज्यादा, बोलो कम। सामने वाले की बात ध्यान से सुनना एक प्रकार की गतिविधि है।

सुनने की कला आज दुर्लभ होती जा रही है। शोध बताते है कि हम जितना सुनते हैं, उसका मात्र 20 प्रतिशत ही हमें याद रहता है। सुनी बातों में से तीन दिन बाद केवल 10 प्रतिशत ही याद रहताहै। इसके अलावा सुनने और समझने के बीच हमारा पूर्वाग्रह, पूर्व जानकारी, पूर्व अर्जित ज्ञान भी प्रभाव डालता है।

Question number: 121 (1 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2013

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Question

भाषण और वार्तालाप में क्या अन्तर है?

Choices

Choice (4) Response

a.

भाषण में हम बोलते हैं, वार्तालाप में सुनते है

b.

भाषक रोचक नहीं होता, वार्तालाप रोचक होता है

c.

भाषण में केवल बोलना होता है, वार्तालाप में सुनना और बोलना दोनों होते है

d.

भाषण लम्बा होता है, वार्तालाप संक्षिप्त होता है

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