Reading Comprehension (CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi): Questions 99 - 106 of 592

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 827 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 400.00 or

Passage

संसार के सभी देशों में शिक्षित व्यक्ति की सबसे पहली पहचान यह होती है कि वह अपनी मातृभाषा में दक्षता से काम कर सकता है। केवल भारत ही एक देश है जिसमें शिक्षित व्यक्ति वह समझा जाता है जो अपनी मातृभाषा में दक्ष हो या नहीं, किन्तु अंग्रेजी में जिसकी दक्षता असंदिग्ध हो। संसार के अन्य देशों में सुसंस्कृत व्यक्ति वह समझा जाता है जिसके घर में अपनी भाषा की पुस्तकों का संग्रह हो और जिसे बराबर यह पता रहे कि उसकी भाषा के अ च्छे लेखक और कवि कौन हैं तथा समय-समय पर उनकी कौनसी कृतियाँ प्रकाशित हो रही है। भारत में स्थिति दूसरी है। यहाँ प्राय: घर में साज-सज्जा के आधुनिक उपकरण तो होते हैं किन्तु अपनी भाषा की कोई पुस्तक या पत्रिका दिखाई नहीं पड़ती। यह दुवस्था भले ही किसी ऐतिहासिक प्रक्रिया का परिणाम है, किन्तु वह सुदशा नहीं, दुवस्था ही है और जब तक वह दुवस्था कायम है, हमें अपने आपको सही अर्थों में शिक्षित और सुसंस्कृत मानने का ठीकठाक न्याय संगत अधिकार नहीं है।

इस दुवस्था का एक भयानक दुष्परिणाम यह है कि भारतीय भाषाओं के समकालीन साहित्य पर उन लोगों की दृष्टि नहीं पड़ती जो विश्वविद्यालयों के प्राय: सर्वोत्तम छात्र थे और अब शासत्र तन्त्र में ऊँचे ओहदों पर काम कर रहे हैं। इस दृष्टि से भारतीय भाषाओं के लेखक केवल यूरोपीय और अमेरिकी लेखकों से ही हीन नहीं है, बल्कि उनकी किस्मत मिस्त्र, बर्मा, इण्डोनेशिया, चीन और जापान के लेखकों की किस्मत से भी खराब है क्योंकि इन सभी देशों के लेखकाेें की कृतियाँ वहाँ के अत्यन्त सुशिक्षत लोग भी पढ़ते हैं। केवल हम ही है जिनकी पुस्तकों पर यहाँ के तथाकथित शिक्षित समुदाय की दृष्टि प्राय: नहीं पड़ती। हमारा तथाकथित उच्च शिक्षिक समुदाय जो कुछ पढ़ना चाहता है, उसे अंग्रेजी में ही पढ़ लेता है, यहाँ तक कि उसकी कविता और उपन्याय पढ़ने की तृष्णा भी अंग्रेजी की कविता और उपन्यास पढ़कर ही समाप्त हो जाती है और उसे यह जानने की इच्छा ही नहीं होती कि शरीर से वह जिस समाज का सदस्य है उसके मनोभाव उपन्यास और काव्य में किस अदा से व्यक्त हो रहे है।

Question number: 99 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘किस्मत खराब होना’ से आशय है

Choices

Choice (4) Response

a.

सौभाग्य

b.

भाग्य

c.

दुर्भाग्य

d.

दुरवस्था

Passage

जीवन एक कुआँ है

अथाह-अगम

सबके लिए एक-सा वृत्ताकार!

जो भी पास जाता है,

सहज ही तृप्ति, शान्ति, जीवन पाता है!

मगर छिद्र होते हैं जिसके पात्र में,

रस्सी डोर रखने के बाद भी,

हर प्रयन्त करने के बाद भी,

वह यहाँ प्यासा का प्यासा रह जाता है।

Question number: 100 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

कवि का मन अनेक प्रयासों के बाद भी प्यासा क्यों रह गया?

Choices

Choice (4) Response

a.

उसने रस्सियाँ ठीक से नहीं बँटी थीं

b.

वह सबको दोष देता रहा

c.

उसने घडे को ठीक से परखा नहीं

d.

उसने अपने दोष्ज्ञों पर नजर नहीं डाली

Question number: 101 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

यदि किसी को असफलता प्राप्त हो रही है, किन बातों की जाँच परख करनी चाहिए?

Choices

Choice (4) Response

a.

अपनी कमियों को

b.

दूसरों के दोषों की

c.

दूसरों को उसका साथ देने में परेशानी क्यों है

d.

कहीं लक्ष्य गलत तो नहीं है

Question number: 102 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

कवि ने जीवन को कुआँ क्यों कहा है?

Choices

Choice (4) Response

a.

इसमें बहुत गहराई है

b.

यह कुएँ के समान वृत्ताकार है

c.

जो जीना जानता है, जीवन उसे कुछ-न-कुछ अवश्य देता है

d.

जैसे कुछ लोग कुएँ के पास जाकर भी प्यासे रह जाते हैं, उसी प्रकार कुछ लोग जीवन नहीं जी पाते

Question number: 103 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

‘अगम’ का विलोम है

Choices

Choice (4) Response

a.

निगम

b.

गम्य

c.

सुगम

d.

दुर्गम

Question number: 104 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

निम्न में से तत्सम् शब्द नहीं है

Choices

Choice (4) Response

a.

तृप्ति

b.

छिद्र

c.

प्रयत्न

d.

डोर

Question number: 105 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

कवि ने जीवन की तुलना किससे की है?

Choices

Choice (4) Response

a.

तृप्ति

b.

शान्ति

c.

प्यास

d.

कुआँ

Passage

इस संसार की यही रीति है। सत्यवादी मारा जाता है। आज के सहस्त्रों वर्ष पूर्व ग्रीस देश में एक दार्शनिक रहा करता था। उसका नाम सुकरात था। उसकी बातें सीधी सच्ची पर तीखी होती थी। समाज उन्हें सह नहीं सका और उसे कानूनी आज्ञा का पालन करते हुए विष कय प्याला पीना पड़ा। इसी प्रकार तत्कालीन शासन सत्ता तथा सामाजिक और धार्मिक दुराचारों के विरूद्ध आवाज उठाने पर ईसा को सूली पर चढ़ना पड़ा। सलीब पर ये ईसा का यह आर्तनाद आज भी गूँज रहा है - हे प्रभु हे पिता, तुम हमें क्यों भूल गए हो? साम्प्रादायिक विषय को शान्त करने और लोगों में साम्प्रदायिक सद्भावना फैलाने के लिए गाँधीजी अपने जीवन की बाजी लगाकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते फिरे, अंत में उन्हें गोली का शिकार होना पड़ा। इन दृष्टान्तों की पुनरावृत्ति अभी हाल ही में अमेरिका में हुई है। वहाँ के काले लोगों को अनेक रंग और जाति के दुर्व्यवहारों से मुक्ति दिलाकर समाज में समुचिज स्थान दिलाने को डॉ. किंग ने अहिंसक आन्दोलन खड़ा किया था। उन्होंने चाहा कि अमेरिका के गोरे लोगों में हृदय परिवर्तन हो और वे नीग्रो अमेरिकनों को नौकरी में और सामाजिक प्रतिष्ठा में वहीं स्थान पाने दें जो श्वेत अमेरिकनों को मिलता है, लेकिन उसको भी निर्भीक सच्चाई बरतने का मूल्य अपने प्राण देकर चुकाना पड़ा। आज संसार के सामने वही पुराना प्रश्न फिर खड़ा हो गया है। क्या दुनिया में सच कहने वालों का और इन्साफ मांगने वालों का इसी प्रकार अंत होता रहेगा? क्या आपसी विदव्ेष को समाप्त करने की सम्भावना, इस दुनिया में सबको पसन्द नहीं हो सकेगी? जरा सोचिए, यदि इन प्रश्नों का उत्तर नकारात्मक हुआ, तो मनुष्य जाति का भविष्य कितना निराशाजनक होगा?

Question number: 106 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

MCQ▾

Question

पुनरावृत्ति शब्द में प्रयुक्त सन्धि है

Choices

Choice (4) Response

a.

दीर्घ

b.

गुण

c.

विसर्ग

d.

व्यंजन

f Page
Sign In