CTET Paper-II Hindi: Questions 706 - 713 of 827

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 827 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 400.00 or

Passage

वर्तमान हिन्दी कविता की भूमि में आज एक कोलाहल सा छा रहा है। लोग कहते है कि इस कविता के माध्यम से राजनीति साहित्य पर चढ़ी आ रही है आर जिस कला पक्ष में फूल और फलों की सजावट होनी चाहिए थी, उसमें मजदूरों के गन्दे चिथड़े चिमनियों का धुआँ और खेतों की धूल भरती जा रही है। शुद्ध कला के उपासकों को यह चिन्ता हो रही है कि साहित्य राजनीति के हाथ का रणवाद्य बनता जा रहा है और उसके प्राणों की कलामयी दीप्ति दिनोदिन क्षीण होती जा रही है।

दूसरी ओर एक दल है जो शुद्ध कला की कृतियों को आनन्द और पलायन का प्रयास कहकर उसकी हँसी उड़ाता है। उसका विश्वास है कि जब जीवन में संघर्ष की आँधी चल रही हो, पराधीन राष्ट्र स्वतंत्र होने के लिए आन्दोलन कर रहे हों। ऐसे समय में कवि का अपनी वैयक्तिक अनुभूति के मायाबन्ध में बँधे रहना जीवन के प्रति साहित्य को दायित्वहीनता का प्रमाण है। यह दल चाहता है कि साहित्य अपने कल्पना लोक से उतरकर पृथ्वी पर आए और निष्क्रियता त्याग कर प्रगति के मार्ग पर आरूढ़ रहे।

Question number: 706 (5 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

निम्न में से कौनसा शब्द फूल का पर्यायवाही नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

पवमान

b.

सारंग

c.

प्रसून

d.

सुमन

Question number: 707 (6 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

दूसरा दल चाहता है कि साहित्यकार

Choices

Choice (4) Response

a.

आदर्श की उपेक्षा कर यथार्थ की बात करें

b.

सक्रिय होकर प्रगति पथ पर आरूढ़ हो

c.

जीवन में समृद्धि लाने की प्रेरणा दे

d.

स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करे

Question number: 708 (7 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

माया बन्ध में प्रयुक्त समास है

Choices

Choice (4) Response

a.

तत्पुरूष

b.

अव्ययीभाव

c.

दव्गु

d.

कर्मधारय

Question number: 709

» Pedagogy of Language Development » Evaluating Language Comprehension & Proficiency

MCQ▾

Question

बच्चों के ‘लेखन’ कौशल का मूल्यांकन करने के लिए कौनसी विधि बेहतर हो सकती है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सुन्दर लेख का अभ्यास

b.

अपने अनुभवों को लिखना

c.

श्रुतलेख

d.

पाठाधारित प्रश्नों के उत्तर लिखना

Question number: 710

» Pedagogy of Language Development » Teaching- Learning Materials

MCQ▾

Question

उपचारात्मक शिक्षण में किस अनुदेश सामग्री का उपयोग किया जाता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

क्रमित

b.

अभिक्रमित

c.

काल्पनिक

d.

All of the above

Question number: 711

» Pedagogy of Language Development » Principles of Language Teaching

MCQ▾

Question

भाषा शिक्षण के अन्तर्गत उपयुक्त शिक्षण सूत्र है

Choices

Choice (4) Response

a.

कठिन से सरल की ओर

b.

अज्ञात से ज्ञात की ओर

c.

मूर्त से अर्मूत की ओर

d.

संश्लेषण से विश्लेषण की ओर

Question number: 712

» Pedagogy of Language Development » Grammar

MCQ▾

Question

माध्यमिक स्तर पर व्याकरण शिक्षण की सर्वोपयुक्त प्रणाली है

Choices

Choice (4) Response

a.

पाठ्य पुस्तक प्रणाली

b.

समवाय प्रणाली

c.

भाषा संसर्ग प्रणाली

d.

आगमन निगमन प्रणाली

Passage

गोस्वामी तुलसीदास के युग में भारत पर मुगल बादशाहों का शासन था। पूरा देश पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। तुलसीदार ने पराधीनता की पीड़ा को अनुभव करते हुए उदास और हताश जनता को राम-भक्ति के रूप में शक्ति और स्वतंत्रता का संदेश दिया। उन्होंने अपने युग के शासकों की दमनकारी नीतियों को रावण के दुराचारों के माध्यम से दर्शाया। रावण ने अपनी तानाशाही नीतियों से सभी को अपना दास बना लिया था तथा किसी को स्वतंत्र नहीं छोड़ा था - ”राखेउ कोउ न सुतन्त्र।“ यही नहीं, उस दुष्ट ने हमारी राष्ट्रीश् प्रतिष्ठा की प्रतीक सीता जी का भी अपहरण कर लिया था। ऐसे युग में तुलसी ने भक्ति और भगवान सभी को स्वतंत्र बताया। शील, शक्ति और स्वतंत्रता के प्रतीक भगवान् राम एक जनतांत्रिक नेता के रूप में दक्षिण भारत की जनजातियों के वीर योद्धाओं की सेना संगठित करके रावण के विरूद्ध एक स्वतंत्रता आन्दोलन का संचालन करते हैं और राष्ट्र की अस्मिता सीता को मुक्त कराने में सफल होते हैं। तुलसी ने अपने महान् ग्रन्थ ‘रामचरित मानस’ के लंका काण्ड में राम की इस समर-विजय का वर्णन किया है। उन्होंने लंका काण्ड के अंत में लिखा है कि जो व्यक्ति भगवान् राम की इस ‘समर-विजय’ को ध्यान में पढ़ेगा या सुनेगा, उसे भगवान् राम विजय, विवेक और वैभव प्रदान करेंगे - ”विजय, विवेक, विभूति नित, तिनहिं देहि भगवान्।“ ऐसा प्रेरक प्रबोधक और प्रभावी है तुलसी की भक्ति का स्वरूप।

Question number: 713 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

उपरोक्त अवतरण का उपयुक्त शीर्षक है

Choices

Choice (4) Response

a.

तुलसी की राम भक्ति

b.

तुलसी के राम

c.

तुलसी की भक्ति का स्वरूप

d.

तुसलीदास का युग

Sign In