CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi: Questions 709 - 715 of 827

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Question number: 709

» Pedagogy of Language Development » Evaluating Language Comprehension & Proficiency

MCQ▾

Question

बच्चों के ‘लेखन’ कौशल का मूल्यांकन करने के लिए कौनसी विधि बेहतर हो सकती है?

Choices

Choice (4) Response

a.

सुन्दर लेख का अभ्यास

b.

अपने अनुभवों को लिखना

c.

श्रुतलेख

d.

पाठाधारित प्रश्नों के उत्तर लिखना

Question number: 710

» Pedagogy of Language Development » Teaching- Learning Materials

MCQ▾

Question

उपचारात्मक शिक्षण में किस अनुदेश सामग्री का उपयोग किया जाता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

क्रमित

b.

अभिक्रमित

c.

काल्पनिक

d.

All of the above

Question number: 711

» Pedagogy of Language Development » Principles of Language Teaching

MCQ▾

Question

भाषा शिक्षण के अन्तर्गत उपयुक्त शिक्षण सूत्र है

Choices

Choice (4) Response

a.

कठिन से सरल की ओर

b.

अज्ञात से ज्ञात की ओर

c.

मूर्त से अर्मूत की ओर

d.

संश्लेषण से विश्लेषण की ओर

Question number: 712

» Pedagogy of Language Development » Grammar

MCQ▾

Question

माध्यमिक स्तर पर व्याकरण शिक्षण की सर्वोपयुक्त प्रणाली है

Choices

Choice (4) Response

a.

पाठ्य पुस्तक प्रणाली

b.

समवाय प्रणाली

c.

भाषा संसर्ग प्रणाली

d.

आगमन निगमन प्रणाली

Passage

गोस्वामी तुलसीदास के युग में भारत पर मुगल बादशाहों का शासन था। पूरा देश पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। तुलसीदार ने पराधीनता की पीड़ा को अनुभव करते हुए उदास और हताश जनता को राम-भक्ति के रूप में शक्ति और स्वतंत्रता का संदेश दिया। उन्होंने अपने युग के शासकों की दमनकारी नीतियों को रावण के दुराचारों के माध्यम से दर्शाया। रावण ने अपनी तानाशाही नीतियों से सभी को अपना दास बना लिया था तथा किसी को स्वतंत्र नहीं छोड़ा था - “राखेउ कोउ न सुतन्त्र।” यही नहीं, उस दुष्ट ने हमारी राष्ट्रीश् प्रतिष्ठा की प्रतीक सीता जी का भी अपहरण कर लिया था। ऐसे युग में तुलसी ने भक्ति और भगवान सभी को स्वतंत्र बताया। शील, शक्ति और स्वतंत्रता के प्रतीक भगवान् राम एक जनतांत्रिक नेता के रूप में दक्षिण भारत की जनजातियों के वीर योद्धाओं की सेना संगठित करके रावण के विरूद्ध एक स्वतंत्रता आन्दोलन का संचालन करते हैं और राष्ट्र की अस्मिता सीता को मुक्त कराने में सफल होते हैं। तुलसी ने अपने महान् ग्रन्थ ‘रामचरित मानस’ के लंका काण्ड में राम की इस समर-विजय का वर्णन किया है। उन्होंने लंका काण्ड के अंत में लिखा है कि जो व्यक्ति भगवान् राम की इस ‘समर-विजय’ को ध्यान में पढ़ेगा या सुनेगा, उसे भगवान् राम विजय, विवेक और वैभव प्रदान करेंगे - “विजय, विवेक, विभूति नित, तिनहिं देहि भगवान्।” ऐसा प्रेरक प्रबोधक और प्रभावी है तुलसी की भक्ति का स्वरूप।

Question number: 713 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

सीताजी हमारी राष्ट्रीय ………. . की प्रतीक है। इस वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए उपयुक्त शब्द है।

Choices

Choice (4) Response

a.

पताका

b.

उत्कर्ष

c.

प्रतिष्ठा

d.

उपलब्धि

Question number: 714 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

कौनसा कथन सही नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

तुलसी की भक्ति शक्ति, संघर्ष विजय और स्वतंत्रता का संदेश देती है

b.

रावण, अन्यायी, अत्याचारी, निरंकुश शासक था

c.

तुलसी का युग पराधीनता का युग था

d.

तुलसी की भक्ति में दासता, दीनता, हीनता आदि की प्रमुखता है

Question number: 715 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

कौनसा कथन शुद्ध है?

Choices

Choice (4) Response

a.

तुलसी ने रामचरित मानस के अरण्य काण्ड में राम की समर-विजय का वर्णन किया है

b.

तुलसी ने रामचरित मानव के लंका काण्ड में राम की समर-विजय का वर्णन किया है

c.

तुलसी ने रामचरित मानस के सुन्दर काण्ड में राम की समर विजय का वर्णन किया है

d.

तुलसी ने रामचरित मानस के अयोध्या काण्ड में राम की समर-विजय का वर्णन किया है

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