CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi: Questions 62 - 69 of 827

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Passage

नारी की तत्कालीन दशा से प्रेमचन्द संतुष्ट नहीं थे। स्त्रियों को जिस दोहरे शोषण का शिकार होना पड़ा था, उससे प्रेमचन्द अनभिज्ञ नहीं थे। शतरचन्द्र की तरह प्रेमचन्द्र की सम्पूर्ण सहानुभूति स्त्रियों के साथ थी। शरत की तरह प्रेमचन्द मानते थे कि पतित कही जाने वाली स्त्रियों में भी मानवीय गरिमा काभाव होता है। आवश्यकता उसके प्रस्फुटन की है। लेकिन प्रेमचन्द का नारी संबंधी दृष्टिकोण ज्यादा वस्तुपरक था। उनकी सहानुभूति केवल भावना के स्तर पर नहीं थी। यही कारण है कि प्रेमचन्द के कथा साहित्य में नारी जीवन के जितने रूप मिलते है, उतने शरतचन्द्र के यहाँ नहीं हैं। केवल भावनात्मक सहानुभूति के कारण शरत की नायिकाएँ पथभ्रष्ट, पतित और समाज द्वारा परित्यक्त होने के बावजूद सि क्रयता और संघर्ष से वंचित है, अभिजात गरिमा से मण्डित रहती है और उपन्यासों में व्यक्त उनके चरित्र से उनकी चरित्रहीनता प्रकट नहीं होती। वे समाज की रूढ़ियों की शिकार हैं, लेकिन उनके प्रति विद्रोह नहीं करती, पुरूषों द्वारा किए जाने वाले हर अत्याचार को सहती है परन्तु उसका प्रतिकार नहीं करतीं। शरत की नायिकाएँ त्यागमयी, सहनशील, करूणामयी है लेकिन उनके सारे गुणों का सामाजिक धरातल लुप्त है। इसके विपरीत प्रेमचन्द की नारी पात्राएँ कहीं ज्यादा सक्रिय, संघर्षशील और सचेतन है इसलिए वे ज्यादा विश्वसनीय लगती हैं। उनके जीवन की समस्याएँ केवल उनकी नहीं है। वे तत्कालीन भारत की नारी जाति को समष्टिपरक समस्याएँ हैं जिनसे उस युग की नारी संघर्ष कर रही थी। प्रेमचन्द ने अपने साहित्य में इसी संघर्ष को अभिव्यक्ति प्रदान की है।

Question number: 62 (8 of 8 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

शरतचन्द्र के नारी पात्रों में कौनसी विशेषता नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

करूणा

b.

विद्रोह की प्रवृत्ति

c.

त्यागशीलता

d.

सहनशीलता

Question number: 63

» Pedagogy of Language Development » Evaluating Language Comprehension & Proficiency

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Question

अध्यापक का कर्तव्य है कि वह मूल पाठ प्रस्तुत करने से पहले छात्रों के ………… का मूल्यांकन करें।

Choices

Choice (4) Response

a.

पूर्व ज्ञान

b.

अल्प ज्ञान

c.

उच्च ज्ञान

d.

निम्न ज्ञान

Passage

एक संस्कृत किसी नई चीज की खोज करता है, किन्तु उसकी सन्तान को वह अपने पूर्वज से अनायास प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा विवेक ने किसी भी नये तथ्य का दर्शन किया, वह व्यक्ति ही वास्तविक संस्कृत व्यक्ति है और उसकी सन्तान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है, वह अपने पूर्वक की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। न्यूटन ने गुरूत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी न्यूटन के गुरूत्वाकर्षण से तो परिचित है ही, लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है, जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित ही रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें, पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कह सकते।

Question number: 64 (1 of 1 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2012

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Question

संस्कृत’ का अर्थ है

Choices

Choice (4) Response

a.

सभ्य

b.

आविष्कार करने वाला

c.

भाषा का नाम

d.

इनमें से कोई नहीं

Question number: 65

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

Appeared in Year: 2012

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Question

भाषा सीखने में होने वाली त्रुटियाँ

Choices

Choice (4) Response

a.

सही नहीं है, इनके प्रति कठोर रवैया अपनाना चाहिए

b.

बच्चे, शिक्षक पाठ्यक्रम आदि की असफलताओं के संकेतक है

c.

भाषा प्रयोग की असफलता की ओर संकेत करती है

d.

भाषा सीखने की प्रक्रिया में स्वाभाविक पड़ाव है

Passage

वास्तव में हृदय वही है जो कोमल भावों और स्वदेश प्रेम से ओतप्रोत हो। प्रत्येक देशवासी को अपने वतन से प्रेम होता है, चाहे उसका देश सूखा, गर्म या दलदलों से युक्त हो। देश प्रेम के लिए किसी आकर्षक की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि वह तो अपनी भ्ूामि के प्रति मनुष्य मात्र की स्वाभाविक ममता है। मानव ही नहीं पशु-पक्षियों तक को अपना देश प्यारा होता है। संध्या समय पक्षी अपने नीड़ की ओर उड़े चले जाते हैं। देश प्रेम का अंकुर सभी में विद्यमान है। कुछ लोग समझते हैं कि मातृभूमि के नारे लगाने से ही देश प्रेम व्यक्त होता है। दिन भर वे त्याग, बलिदान और वीरता की कथा सुनाते नहीं थकते, लेकिन परीक्षा की घड़ी आने पर भाग खड़े होते हैं। ऐसे लोग स्वार्थ त्यागकर, जान जोखिम में डालकर देश की सेवा क्या करेंगे? आज ऐसे लोगों की आवश्यकता नहीं है।

Question number: 66 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

संध्या समय पक्षी अपने घोंसलों में वापस चले जाते हैं, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

दिनभर घूमकर वे थक जाते हैं

b.

उन्हें राम को आराम करना है

c.

जानवर भी अपने निवास स्थान को चले जाते हैं

d.

उन्हें अपना नीड़ प्यारा होता है

Question number: 67 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

इस गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक होगा।

Choices

Choice (4) Response

a.

राष्ट्र भूमि

b.

मातृ भूमि

c.

देश प्रेम

d.

कोमल हृदय

Question number: 68 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

स्वार्थ शब्द का विलोम शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

स्वार्थता

b.

विस्मार्थ

c.

परमार्थ

d.

विमुख

Question number: 69 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

अंकुर का पर्यायवाची शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रकाश

b.

प्रभात

c.

रत्न

d.

बीज

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