CTET Paper-II Hindi: Questions 532 - 536 of 827

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Passage

कमजोर विचारक तत्काल उत्तर की ओर दौड़ता है। पर सोचने वाले बच्चे समय लेते हैं। सवाल पर विचार करते हैं। क्या यह अन्तर केवल सोचने के कौशल के होने या न होने के कारण है? एक ऐसा कौशल जो केवल एक तकनीक है और जिसे, अगर भाग्य ने साथ दिया तो, हम बुद्धि से बच्चों को सिखा सकते हैं? मुझे भय है कि ऐसा नहीं है। अच्छा विचारक सोचने में समय इसलिए लगा सकता है, क्योंकि वह अनिश्चय को सह सकता है। वह इस बात को भी झेल सकता है कि वह कोई चीज नहीं जानता। पर कमजोर विचारक को कुछ न जानने की कल्पना ही असहनीय लगती है। क्या इस पूरे विश्लेषण से हम यह नहीं पाते कि असल में इन बच्चों में ‘गलत’ होने का भय बैठा होताहै। बेशक यही भय है जो मॉनिका जैसे बच्चों पर भयानक दबाव डालता है। ठीक ऐसे ही दबाव हैल भी महसूस करता है। शायद मैं भी। मॉनिका अकेली नहीं है जो सही होना चाहती है और गलत होने से डरती है। पर यहाँ शायद एक दूसरी असुरक्षा की भावना काम करती होती है। यह असुरक्षा की भावना पैदा होती है सवाल के लिए कोई भी जवाब नहीं होने से। (स्त्रोत - बच्चे असफलत कैसे होते हैं - जॉन हॉल्ट, एकलव्य)

Question number: 532 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2011

MCQ▾

Question

मॉनिका पर किस बात का दबाव रहता है?

Choices

Choice (4) Response

a.

असुरक्षित होने का

b.

अच्छा विचारक न कहलाए जाने का

c.

गलत होने का

d.

बुद्धि का प्रशिक्षण न होने का

Question number: 533 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

Appeared in Year: 2011

MCQ▾

Question

कमजोर विचारक

Choices

Choice (4) Response

a.

देर से उत्तर देता है

b.

हमेशा अज्ञानी होता है

c.

कमजोर होता है

d.

जल्दी उत्तर देना चाहता है

Passage

किसी भी राष्ट्र की संस्कृति तक तक गूंगी रहती है, जब तक उस राष्ट्र की अपनी वाणी नहीं होती। राजनीतिक पराधीनता की हमारी बेड़ियाँ जरूर कट गई हैं, किन्तु अंग्रेजी आज भी अंग्रजी दासता के रूप में हमारे मनोजगत में विद्यमान है। ध्यान देने योग्य बात है कि भाषा परिधान मात्र नहीं वरन् राष्ट्र का व्यक्तित्व है। हमारे बहुभाषा-भाषी देश के ही समान रूप भी बहुत-सी भाषाओं वाला देश है, जहाँ 66 भाषाएँ बोली और लिखी जाती हैं, किन्तु उनकी राष्ट्रभाषा ‘रूसी’ है। हमारी संस्कृति के गोमुख से निकली हुई सब भारतीय भाषाएँ हमारी अपनी हैं किन्तु उनमें हिन्दी को अपनी व्यापकता एवं आरम्भिक काल से ही जन-विद्रोह और जन-संघर्ष की भाषा होने के कारण राष्ट्रभाषा के रूप में स्वीकार किया गया है। केवल संविधान में लिख देने मात्र से यह बात पूरी नहीं हो जाती, इसे राष्ट्र के जीवन में प्रतिष्ठित करना होगा, अन्यथा इस स्वतन्त्रता का क्या मूल्य है? विश्व चेतना जगाने से पहले हमें अपने देश में राष्ट्रभाषा की चेतना जागृत करनी होगी।

Question number: 534 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

‘हमारी संस्कृति के गोमुख से निकली हुई सब भारतीय भाषाएँ हमारी अपनी है’, से निकटस्थ कथन है

Choices

Choice (4) Response

a.

हमारी सभी भाषाएँ उत्पत्ति के समान हैं

b.

हमारी गोमुख रूपी संस्कृति भाषाओं की प्रसारक है

c.

भारतीय संस्कृति ने अनेक भाषाओं को प्रश्रय दिया है

d.

हमारी निर्मल संस्कृति अनेक भाषाओं की सृजक है

Question number: 535 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

”किसी भी राष्ट्र की संस्कृति तब तक गूंगी रहती है, जब तक उस राष्ट्र की अपनी वाणी नहीं होती।“ इस कथन से क्या आशय है?

Choices

Choice (4) Response

a.

वाणी के बिना राष्ट्र मूक व्यक्ति के समान है

b.

राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र की संस्कृति का प्रसार नहीं होता

c.

राष्ट्रभाषा के बिना देशवासी भावाभिव्यक्ति नहीं कर पाते

d.

राष्ट्रभाषा, संस्कृति के महत्व का प्रवर्तन करती है

Question number: 536 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

हिन्दी को राष्ट्रभाषा स्वीकार किया गया है, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

यह सर्वाधिक वृहत् क्षेत्र में प्रचलित है

b.

यह संविधान में राष्ट्रभाषा के रूप में प्रचलित है

c.

राजकाज के प्रयोगार्थ यह सरल भाषा है

d.

यह आरम्भ से ही जन-विद्रोह एवं संघर्ष की भाषा रही है

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