CTET Paper-II Hindi: Questions 349 - 355 of 827

Get 1 year subscription: Access detailed explanations (illustrated with images and videos) to 827 questions. Access all new questions we will add tracking exam-pattern and syllabus changes. View Sample Explanation or View Features.

Rs. 400.00 or

Question number: 349

» Pedagogy of Language Development » Principles of Language Teaching

MCQ▾

Question

निम्न में से भाषा शिक्षण का सिद्धान्त नहीं है

Choices

Choice (4) Response

a.

चयन का सिद्धान्त

b.

शिक्षण सूत्रों का सिद्धान्त

c.

बोलचाल का सिद्धान्त

d.

All a. , b. and c. are correct

Question number: 350

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

MCQ▾

Question

छात्रों में लेखन कौशल का विकास करते समय एक शिक्षक को ध्यान रखना चाहिए

Choices

Choice (4) Response

a.

शिक्षक छात्रों के समक्ष स्वयं भी उपयुक्त लेखन प्रस्तुत करें

b.

लेखन कौशल का विकास करने से पूर्व शिक्षक को वर्णमाला का अभ्यास करना चाहिए

c.

छात्रों को कलम पकड़ने में कोई परेशानी ना हो

d.

All a. , b. and c. are correct

Question number: 351

» Pedagogy of Language Development » Teaching in Classroom

Appeared in Year: 2011

MCQ▾

Question

किस प्रकार के प्रश्न बच्चों की भाषागत समझ का आकलन करने में अधिक सहायक नहीं होते?

Choices

Choice (4) Response

a.

पाठ पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्न

b.

कल्पनापरक प्रश्न

c.

चिन्तनपरक प्रश्न

d.

अनुमानपरक प्रश्न

Passage

साहित्यशास्त्रियों ने मानव की भावनाओं का विवेचन करते हुए अनेक रसों का निरूपण किया है, परन्तु वैज्ञानिक दृष्टि से विचार किया जाए तो मानव शरीर को एक जटिल यंत्र से उपमित किया जा सकता है। जिस प्रकार के एक पुर्जे में दोष आ जाने पर सारा यंत्र गड़बड़ा जाता है, बेकार हो जाता है, उसी प्रकार मानव शरीर के विभिन्न अवयवों में से यदि कोई एक अवयव भी बिगड़ जाता है, तो उसका प्रभाव सारे शरीर पर पड़ता है। इतना ही नहीं गुर्दे जैसे कोमल एवं नाजुक हिस्से के खराब हो जाने से यह गतिशील वपु-यंत्र एकाएक अवरूद्ध हो सकता है, व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। एक अंग के विकृत होने पर सारा शरीर दण्डित हो, वह काल कवलित हो जाए - यह विचारणीय है। यदि किसी यंत्र के पुर्जे को बदलकर, उसके स्थान पर नया पुर्जा लगाकर यंत्र को पूर्ववत् सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से क्रियाशील बनाया जा सकता है तो शरीर के विकृत अंग के स्थान पर नव्य निरामय अंग लगाकर शरीर को स्वस्थ एवं सामान्य क्यों नही बनाया जा सकता? शल्य चिकित्सकों ने इस दायित्वपूर्ण चुनौती को स्वीकार किया तथा निरन्तर अध्यवसाय पूर्णसाधना के अन्तर अंग प्रत्योरापेण के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की। अंग प्रत्यारोपण का उद्देश्य है कि मनुष्य दीर्घायु प्राप्त कर सके। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि मानव शरीर पर किसी के अंग को उसी प्रकार स्वीकार नहीं करता, जिस प्रकार हर किसी का उसे स्वीकार्य नहीं होता। रोगी को रक्त देने से पूर्व रक्त वर्ग का परीक्षण अत्यावश्यक है, तो अंग प्रत्यारोपण से पूर्व ऊत्तक परीक्षण अनिवार्य है। आज का शल्य चिकित्सक गुर्दे, यकृत, आँत, फेफड़े और हृदय का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक कर रहा है। साधन सम्पन्न चिकित्सालयों में मस्तिष्क के अतिरिक्त शरीर के प्राय: सभी अंगों का प्रत्यारोपण सम्भव हो गया है।

Question number: 352 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

वैज्ञानिक दृष्टि का अपेक्षाकृत अभाव होता है

Choices

Choice (4) Response

a.

शल्य चिकित्सक में

b.

वैज्ञानिक में

c.

साहित्यकार में

d.

साहित्यशास्त्री में

Question number: 353 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

उपरोक्त अनुच्छेद का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक है

Choices

Choice (4) Response

a.

अंंग-प्रत्यारोपण

b.

मानव शरीर: एक यंत्र

c.

मानव शरीर और शल्य चिकित्सा

d.

सृष्टि का सिरमौर: मानव

Question number: 354 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

काल कवलित हो जाना

Choices

Choice (4) Response

a.

अंग विकृत हो जाना

b.

समय का मापन

c.

व्याकुल हो जाना

d.

निधन हो जाना

Question number: 355 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

अवयव का पर्याय है

Choices

Choice (4) Response

a.

निरूपण

b.

भंजन

c.

कोष

d.

अंग

f Page
Sign In