CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi: Questions 348 - 353 of 827

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Question number: 348

» Pedagogy of Language Development » Remedial Teaching

MCQ▾

Question

‘उपचारात्मक शिक्षण उचित रूप से निदानात्मक शिक्षण के बाद आता है।’ निम्न में से यह कथन किसका है?

Choices

Choice (4) Response

a.

योकम एवं स्किनर का

b.

योकम एवं सिम्पसन का

c.

स्किनर एवं सिम्पसन का

d.

ब्लेयर एवं जोन्स का

Question number: 349

» Pedagogy of Language Development » Principles of Language Teaching

MCQ▾

Question

निम्न में से भाषा शिक्षण का सिद्धान्त नहीं है

Choices

Choice (4) Response

a.

चयन का सिद्धान्त

b.

शिक्षण सूत्रों का सिद्धान्त

c.

बोलचाल का सिद्धान्त

d.

All a. , b. and c. are correct

Question number: 350

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

MCQ▾

Question

छात्रों में लेखन कौशल का विकास करते समय एक शिक्षक को ध्यान रखना चाहिए

Choices

Choice (4) Response

a.

शिक्षक छात्रों के समक्ष स्वयं भी उपयुक्त लेखन प्रस्तुत करें

b.

लेखन कौशल का विकास करने से पूर्व शिक्षक को वर्णमाला का अभ्यास करना चाहिए

c.

छात्रों को कलम पकड़ने में कोई परेशानी ना हो

d.

All a. , b. and c. are correct

Question number: 351

» Pedagogy of Language Development » Teaching in Classroom

Appeared in Year: 2011

MCQ▾

Question

किस प्रकार के प्रश्न बच्चों की भाषागत समझ का आकलन करने में अधिक सहायक नहीं होते?

Choices

Choice (4) Response

a.

पाठ पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्न

b.

कल्पनापरक प्रश्न

c.

चिन्तनपरक प्रश्न

d.

अनुमानपरक प्रश्न

Passage

साहित्यशास्त्रियों ने मानव की भावनाओं का विवेचन करते हुए अनेक रसों का निरूपण किया है, परन्तु वैज्ञानिक दृष्टि से विचार किया जाए तो मानव शरीर को एक जटिल यंत्र से उपमित किया जा सकता है। जिस प्रकार के एक पुर्जे में दोष आ जाने पर सारा यंत्र गड़बड़ा जाता है, बेकार हो जाता है, उसी प्रकार मानव शरीर के विभिन्न अवयवों में से यदि कोई एक अवयव भी बिगड़ जाता है, तो उसका प्रभाव सारे शरीर पर पड़ता है। इतना ही नहीं गुर्दे जैसे कोमल एवं नाजुक हिस्से के खराब हो जाने से यह गतिशील वपु-यंत्र एकाएक अवरूद्ध हो सकता है, व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। एक अंग के विकृत होने पर सारा शरीर दण्डित हो, वह काल कवलित हो जाए - यह विचारणीय है। यदि किसी यंत्र के पुर्जे को बदलकर, उसके स्थान पर नया पुर्जा लगाकर यंत्र को पूर्ववत् सुचारू एवं व्यवस्थित रूप से क्रियाशील बनाया जा सकता है तो शरीर के विकृत अंग के स्थान पर नव्य निरामय अंग लगाकर शरीर को स्वस्थ एवं सामान्य क्यों नही बनाया जा सकता? शल्य चिकित्सकों ने इस दायित्वपूर्ण चुनौती को स्वीकार किया तथा निरन्तर अध्यवसाय पूर्णसाधना के अन्तर अंग प्रत्योरापेण के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की। अंग प्रत्यारोपण का उद्देश्य है कि मनुष्य दीर्घायु प्राप्त कर सके। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि मानव शरीर पर किसी के अंग को उसी प्रकार स्वीकार नहीं करता, जिस प्रकार हर किसी का उसे स्वीकार्य नहीं होता। रोगी को रक्त देने से पूर्व रक्त वर्ग का परीक्षण अत्यावश्यक है, तो अंग प्रत्यारोपण से पूर्व ऊत्तक परीक्षण अनिवार्य है। आज का शल्य चिकित्सक गुर्दे, यकृत, आँत, फेफड़े और हृदय का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक कर रहा है। साधन सम्पन्न चिकित्सालयों में मस्तिष्क के अतिरिक्त शरीर के प्राय: सभी अंगों का प्रत्यारोपण सम्भव हो गया है।

Question number: 352 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

ऊतक परीक्षण से शल्य चिकित्सक का अभिप्राय है

Choices

Choice (4) Response

a.

रक्तचाप का परीक्षण

b.

कोशिका निर्मित सूक्ष्म अंश का परीक्षण

c.

मांसपेशियों का परीक्षण

d.

यकृत परीक्षण

Question number: 353 (2 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

शब्द प्रत्यारोपण की प्रयुक्त सन्धि है

Choices

Choice (4) Response

a.

स्वर सन्धि

b.

व्यंजन सन्धि

c.

विसर्ग सन्धि

d.

All of the above

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