CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi: Questions 330 - 335 of 827

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Question number: 330

» Pedagogy of Language Development » Learning and Acquisition

MCQ▾

Question

हिन्दी भाषा शिक्षण सिखाने के प्रति रूचि उत्पन्न करना, यह उद्देश्य है

Choices

Choice (4) Response

a.

प्राथमिक स्तर के छात्रों के लिए

b.

जूनियर स्तर के छात्रों के लिए

c.

माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए

d.

उच्च स्तर के छात्रों के लिए

Question number: 331

» Pedagogy of Language Development » Teaching in Classroom

MCQ▾

Question

भाषा शिक्षण में अधिगम सामग्री की प्रमुख चुनौती है

Choices

Choice (4) Response

a.

कम समय में अधिक ज्ञान दिया जाना

b.

छात्रों का ध्यान पाठ में केन्द्रित होना

c.

शिक्षकों द्वारा शिक्षण कार्य में कम मेहनत किया जाना

d.

विषय वस्तु के कठिन स्थलों का उचित स्पष्टीकरण करना

Question number: 332

» Pedagogy of Language Development » Learning and Acquisition

MCQ▾

Question

जब बच्चा किसी सीखी हुई बात का प्रयोग करता है तो यह प्रक्रिया कहलाती है

Choices

Choice (4) Response

a.

प्रेरणा

b.

अधिगम

c.

शिक्षण

d.

अधिग्रहण

Question number: 333

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

Appeared in Year: 2011

MCQ▾

Question

‘भाषा शिक्षण’ में शब्दार्थ पर अधिक बल नहीं देना चाहिए, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

शब्दों के अर्थ शब्दकोश से देखे जा सकते हैं

b.

इसमें समय व्यर्थ होता है

c.

बच्चे सारे शब्दों के अर्थ जानते हैं

d.

बच्चे सन्दर्भ के अनुसार अनुमान लगाते हुए अर्थ ग्रहण कर लेते हैं

Passage

संस्कृति के निर्माण में एक सीमा तक देश और जाति का योगदान रहता है। संस्कृति के मूल उपादान तो प्राय: सभी सुसंस्कृत और सभ्य देशों के एक सीता तक समान रहते हैं, किन्तु बाह्य उपादानों में अन्तर अवश्य आता है। राष्ट्रीय संस्कृति का सबसे बड़ा योगदान यही है कि वह हमें अपने राष्ट्र की परम्परा से सम्पृक्त बनाती है, अपनी रीति-नीति की सम्पदा से विच्छिन्न नहीं होने देती। आज के युग में राष्ट्रीय एवं जातीय संस्कृतियों के मिलन के अवसर अति सुलभ हो गए हैं। संस्कृतियों का पारस्परिक संघर्ष भी शुरू हो गया है। कुछ नए विदेशी प्रभाव हमारे देश पर पड़ रहे है, जिनके आतंक ने हमें स्वयं अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु बना दिया है। हमारी आस्था डगमगाने लगी है। यह हमारी वैचारिक दुर्बलता का फल है। अपनी संस्कृति को छोड़ विदेशी संस्कृति के विवेकहीन अनुकरण से हमारे राष्ट्रीय गौरव को जो ठेस पहुँच रही है, वह किसी राष्ट्र प्रेमी जागरूक व्यक्ति से छिपी नहीं है। भारतीय संस्कृति में त्याग और ग्रहण की अद्भुत क्षमता रही है। अत: आज के वैज्ञानिक युग में हम किसी भी विदेशी संस्कृति के जीवन्त तत्वों को ग्रहण करने में पीछे नहीं रहना चाहेंगे किन्तु अपनी सांस्कृतिक निधि की उपेक्षा करके नहीं। यह परावलम्बन राष्ट्र की गरिमा के अनुरूप नहीं है। यह स्मरण रखना चाहिए कि सूर्य की आलोप्रदायिनी किरणों से पौधे को चाहे जितनी जीवनशक्ति मिले किन्तु अपनी जमीन और अपनी जड़ों के बिना कोई पौधा जीवित नहीं रह सकता। अविवेकी अनुकरण, अज्ञान का ही पर्याय है।

Question number: 334 (1 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

विच्छिन्न शब्द से आशय है

Choices

Choice (4) Response

a.

काट देना

b.

अलग होना

c.

अलग-अलग

d.

विभिन्न

Question number: 335 (2 of 7 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

MCQ▾

Question

हम अपनी संस्कृति के प्रति संशयालु इसलिए हो गए हैं, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

हम तीव्रता से बढ़ते विदेशी कुप्रभाव का प्रभावी रूप से सामना नहीं कर पा रहे हैं

b.

हम चिन्तन के स्तर पर पूर्ण परिपक्वता की स्थिति पर नहीं पहुँच पाए हैं

c.

नई पीढ़ी ने विदेशी संस्कृति के कुछ तत्वों को स्वीकार करना प्रारम्भ कर दिया है

d.

अपनी संस्कृति के प्रति हमारी आस्था कमजोर हो गई है

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