CTET Paper-II Hindi: Questions 90 - 98 of 827

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Passage

सुना है दधिची का वह त्याग, हमारी जातीयता विकास।

पुरन्दर ने पंखि से है लिखा, अस्थियुग का मेरे इतिहास।

सिन्धु सा विस्तृत और अथाह एक निर्वासित का उत्साह।

दे रहा आभा दिखाई भग्न, मग्न रत्नाकर में वह राह।

धर्म का ले-लेकर जो नाम, हुआ करती बलि, कर दी बन्द।

हमी ने दिया शान्ति संदेह, सुखी होते देकर सानन्द।

विजय केवल लोहे की नहीं, धर्म की रही धरा पर धूम।

भिक्षु होकर रहते सम्राट, दया दिखलाई घर-घर घूम।

Question number: 90 (1 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

दधिची ने क्या किया था?

Choices

Choice (4) Response
a.

धन का त्याग

b.

शरीर का त्याग

c.

अपनी हड्डियों का त्याग

d.

अपने व्रत का त्याग

Question number: 91 (2 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

कौनसा सम्राट भिक्षु बना था?

Choices

Choice (4) Response
a.

अशोक

b.

गौतम बुद्ध

c.

बिम्बसार

d.

राम

Question number: 92 (3 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘रत्नाकर’ शब्द का पर्यायवाची है

Choices

Choice (4) Response
a.

सिन्धु

b.

समीर

c.

धराधर

d.

सूर

Question number: 93 (4 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘लोहे की विजय’ से क्या तात्पर्य है?

Choices

Choice (4) Response
a.

मशीनों की जीत

b.

हथियारों के बल पर जीत

c.

लोहे का कारोबार

d.

लोहा मनवाना

Question number: 94 (5 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

‘धर्म के नाम पर बलि’ से क्या आशय है?

Choices

Choice (4) Response
a.

पशुबलि

b.

नरबलि

c.

राजा बलि

d.

बलशाली

Question number: 95 (6 of 6 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Poetry

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Question

निर्वासित किसे कहा गया है?

Choices

Choice (4) Response
a.

श्रीकृष्ण को

b.

श्रीराम को

c.

भगवान बुद्ध को

d.

शिवजी को

Question number: 96

» Pedagogy of Language Development » Evaluating Language Comprehension & Proficiency

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Question

निम्न में से मूल्यांकन करने की परिमाणात्मक परीक्षा कौनसी है?

Choices

Choice (4) Response
a.

मौखिक परीक्षा

b.

लिखित परीक्षा

c.

प्रयोगात्मक परीक्षा

d. All a. , b. and c. are correct

Question number: 97

» Pedagogy of Language Development » Principles of Language Teaching

Appeared in Year: 2012

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Question

एकांकी पाठों का सर्वप्रमुख उद्देश्य है

Choices

Choice (4) Response
a.

एकांकी लिखना सिखाना

b.

एकांकी की समीक्षा करना सिखाना

c.

एकांकी विधा से परिचय कराना

d.

विभिन्न सन्दर्भों में संवाद बोलने की क्षमता का विकास

Passage

मानव जीवन के आदिकाल में अनुशासन की कोई संकल्पना नहीं थी और न ही आज की भाँति बड़े-बड़े नगर या राज्य ही थे। मानव जंगल में रहता था। ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाली कहावत उसके जीवन पर पूर्णत: चरितार्थ होती थी। व्यक्ति पर किसी भी नियम का बन्धन या किसी प्रकार के कर्तव्यों का दायित्व नहीं था, किन्तु इतना स्वतंत्र और निरंकुश होते हुए भी मानव प्रसन्न नहीं था। आपसी टकराव होते थे, अधिकारों-कर्तव्यों में संघर्ष होता था और नियमों की कमी उसे खलती थी। धीरे-धीरे उसकी अपनी ही आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समाज और राज्य का उद्भव और विकास हुआ। अपने उद्देश्य की सिद्धि एवं आवश्यकताओं के लिए मानव में अन्तत: कुछ नियमों का निर्माण किया, उनमें से कुछ नियमों के पालन करवाने का अधिकार राज्य को और कुछ का अधिकार समाज को दे दिया गया। व्यक्ति के बहुमुखी विकास में सहायत होने वाले इन नियमों का पालन ही अनुशासन कहलाता है। अनुभव सबसे बड़ा शिक्षक होता है। समाज ने प्रारम्भ में अपने अनुभवों से ही अनुशासन के इन नियमों को सीखा, विकसित किया और सुव्यवस्थित किया होगा।

Question number: 98 (1 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

आदिकाल में मानव प्रसन्न नहीं था, क्योंकि

Choices

Choice (4) Response
a.

उस काल में सामाजिक नियमों का निर्धारण नहीं हुआ था

b.

वह नगरों में न रहकर जंगलों में रहता था

c.

उसकी जीवन आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं हो पाती थी

d.

उसका जीवन और रहन-सहन सरल न था

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