CTET Paper-II Hindi: Questions 789 - 796 of 827

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Passage

तत्त्ववेत्ता शिक्षाविदों के अनुसार विद्या दो प्रकार की होती है। प्रथम वह जो हमें जीवनयापन के लिए अर्जन करना सिखाती है और दव्तीय वह, जो हमें जीना सिखलाती है। इनमें से एक का अभाव भी जीवन को निरर्थक बना देता है। बिना कमाए जीवन निर्वाह सम्भव नहीं। कोई भी नहीं चाहेगा कि वह परावलम्बी हो, माता-पिता, परिवार के किसी सदस्य, जाति या समाज पर आश्रित रहे। ऐसी विद्या से विहीन व्यक्ति का जीवन दूभर हो जाता है। वह दूसरों के लिए भार बन जाता है। साथ ही दूसरी विद्या के बिना सार्थक जीवन नहीं जिया जा सकता। बहुत अर्जित कर लेने वाले व्यक्ति का जीवन यदि सुचारू रूप से नहीं चल रहा, उसमें यदि वह जीवन शक्ति नहीं है, जो उसके अपने जीवन को तो सत्पथ पर अग्रसर करती ही है, साथ ही वह अपने समाज, जाति एवं राष्ट्र के लिए भी मार्गदर्शन करती है, तो उसका जीवन भी मानव जीवन का अभियान नहीं पा सकता। वह भारवाही गर्दभ बन जाता है या पूँछ- सींग विहीन पशु कहा जाता है। वर्तमान भारत में पहली विद्या का प्राय: अभाव दिखाई देता है, परन्तु दूसरी विद्या का रूप भी विकृत ही है, क्योंकि न तो स्कूलों-कॉलेजों में शिक्षा प्राप्त करके निकला छात्र जीविकोपार्जन के योग्य बन पाता है और न ही वह उन संस्कारों से युक्त हो पाता है, जिन्हें ‘जीने की कला’ की संज्ञा दी जाती है, जिनसे व्यक्ति ‘कु’ से ‘सु’ बनता है, सुशिक्षित और सुसंस्कृत कहलाने का अधिकारी होता है।

वर्तमान शिक्षा पद्धति के अन्तर्गत हम जो विद्या प्राप्त कर रहे है, उनकी विशेषताओं को सर्वथा नकारा भी नहीं जा सकता है। यह शिक्षा कुछ सीता तक हमारे दृष्टिकोण को विकसित भी करती है, हमारी मनीषा को प्रबद्ध बनाती है तथा भावनाओं को चेतन करती है किन्तु कला, शिल्प, प्रौद्योगिकी आदि की शिक्षा नाम मात्र ही होने के फलस्वरूप इस देश के स्नातक के लिए जीविकोपार्जन टेढ़ी खीर बन जाता है।

Question number: 789 (3 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘कोई भी नहीं चाहेगा कि वह परावलम्बी हो’ वाक्य में परावलम्बी का अर्थ है

Choices

Choice (4) Response

a.

दूसरे पर भरोसा करें

b.

दूसरे पर आश्रित हो

c.

दूसरे की निन्दा करें

d.

दूसरे की प्रशंसा करें

Question number: 790 (4 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

टेढ़ी खीर बन जाना

Choices

Choice (4) Response

a.

खीर में स्वाद नहीं होना

b.

अकड़ जाना

c.

कठिन हो जाना

d.

निर्मम होना

Question number: 791 (5 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘कु’ से ‘सु’ बनने में यह आशय सन्निहित है

Choices

Choice (4) Response

a.

दुर्जन से सुजन बनना

b.

दुष्कर से सुकर बनना

c.

दुर्लभ से सुलभ बनना

d.

दुर्गम से सुगम बनना

Question number: 792 (6 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

प्रत्येक व्यक्ति जीवन यापन के लिए स्वावलम्बी होना पसन्द करता है क्योंकि

Choices

Choice (4) Response

a.

वह जीने की कला सीखना चाहता है

b.

वह अपने जीवने को दूभर नहीं बनाना चाहता

c.

वह अपने सामाजिक ऋण से मुक्त होना चाहता है

d.

वह अपने परिवार के प्रति कृतज्ञ होता है

Question number: 793 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘माता-पिता’ शब्द में प्रयुक्त समाज है

Choices

Choice (4) Response

a.

कर्मधारय

b.

तत्पुरूष

c.

दव्न्दव्

d.

दव्ंगु

Question number: 794 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘विहीन’ शब्द का विपरीतार्थक शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

सहज

b.

अलग

c.

पंख

d.

सहित

Question number: 795 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

शब्द गर्दभ से तात्पर्य है

Choices

Choice (4) Response

a.

एक पेड़

b.

ज्ञान

c.

एक जानवर

d.

एक पक्षी

Question number: 796

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

Appeared in Year: 2011

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Question

‘भाषा अर्जन’ और ‘भाषा अधिगम’ के सन्दर्भ में कौनसा कथन सत्य नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

रोजगार प्राप्त करने के लिए ही भाषा सीखी जाती है

b.

‘भाषा अर्जन’ के लिए समृद्ध भाषायी परिवेश की आवश्यकता होती है

c.

‘भाषा अधिगम’ में सम्प्रेषण कुशलता पर भी बल रहता है

d.

भाषा-अर्जन सहज और स्वाभाविक होता है, जबकि भाषा अधिगम प्रयासपूर्ण होता है

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