CTET (Central Teacher Eligibility Test) Paper-II Hindi: Questions 793 - 798 of 827

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Passage

तत्त्ववेत्ता शिक्षाविदों के अनुसार विद्या दो प्रकार की होती है। प्रथम वह जो हमें जीवनयापन के लिए अर्जन करना सिखाती है और दव्तीय वह, जो हमें जीना सिखलाती है। इनमें से एक का अभाव भी जीवन को निरर्थक बना देता है। बिना कमाए जीवन निर्वाह सम्भव नहीं। कोई भी नहीं चाहेगा कि वह परावलम्बी हो, माता-पिता, परिवार के किसी सदस्य, जाति या समाज पर आश्रित रहे। ऐसी विद्या से विहीन व्यक्ति का जीवन दूभर हो जाता है। वह दूसरों के लिए भार बन जाता है। साथ ही दूसरी विद्या के बिना सार्थक जीवन नहीं जिया जा सकता। बहुत अर्जित कर लेने वाले व्यक्ति का जीवन यदि सुचारू रूप से नहीं चल रहा, उसमें यदि वह जीवन शक्ति नहीं है, जो उसके अपने जीवन को तो सत्पथ पर अग्रसर करती ही है, साथ ही वह अपने समाज, जाति एवं राष्ट्र के लिए भी मार्गदर्शन करती है, तो उसका जीवन भी मानव जीवन का अभियान नहीं पा सकता। वह भारवाही गर्दभ बन जाता है या पूँछ- सींग विहीन पशु कहा जाता है। वर्तमान भारत में पहली विद्या का प्राय: अभाव दिखाई देता है, परन्तु दूसरी विद्या का रूप भी विकृत ही है, क्योंकि न तो स्कूलों-कॉलेजों में शिक्षा प्राप्त करके निकला छात्र जीविकोपार्जन के योग्य बन पाता है और न ही वह उन संस्कारों से युक्त हो पाता है, जिन्हें ‘जीने की कला’ की संज्ञा दी जाती है, जिनसे व्यक्ति ‘कु’ से ‘सु’ बनता है, सुशिक्षित और सुसंस्कृत कहलाने का अधिकारी होता है।

वर्तमान शिक्षा पद्धति के अन्तर्गत हम जो विद्या प्राप्त कर रहे है, उनकी विशेषताओं को सर्वथा नकारा भी नहीं जा सकता है। यह शिक्षा कुछ सीता तक हमारे दृष्टिकोण को विकसित भी करती है, हमारी मनीषा को प्रबद्ध बनाती है तथा भावनाओं को चेतन करती है किन्तु कला, शिल्प, प्रौद्योगिकी आदि की शिक्षा नाम मात्र ही होने के फलस्वरूप इस देश के स्नातक के लिए जीविकोपार्जन टेढ़ी खीर बन जाता है।

Question number: 793 (7 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘विहीन’ शब्द का विपरीतार्थक शब्द है

Choices

Choice (4) Response

a.

सहज

b.

अलग

c.

पंख

d.

सहित

Question number: 794 (8 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

‘कु’ से ‘सु’ बनने में यह आशय सन्निहित है

Choices

Choice (4) Response

a.

दुर्जन से सुजन बनना

b.

दुष्कर से सुकर बनना

c.

दुर्लभ से सुलभ बनना

d.

दुर्गम से सुगम बनना

Question number: 795 (9 of 9 Based on Passage) Show Passage

» Reading Comprehension » Prose or Drama

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Question

मानव की संज्ञा पाने के लिए निम्नांकित विद्या अभीष्ट है

Choices

Choice (4) Response

a.

अर्जनकारी विद्या

b.

शिल्प और प्रौद्योगिकी विद्या

c.

जीवन यापन के लिए उपयोगी विद्या

d.

जीना सिखलाने वाली विद्या

Question number: 796

» Pedagogy of Language Development » Language Skills

Appeared in Year: 2011

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Question

‘भाषा अर्जन’ और ‘भाषा अधिगम’ के सन्दर्भ में कौनसा कथन सत्य नहीं है?

Choices

Choice (4) Response

a.

रोजगार प्राप्त करने के लिए ही भाषा सीखी जाती है

b.

‘भाषा अर्जन’ के लिए समृद्ध भाषायी परिवेश की आवश्यकता होती है

c.

‘भाषा अधिगम’ में सम्प्रेषण कुशलता पर भी बल रहता है

d.

भाषा-अर्जन सहज और स्वाभाविक होता है, जबकि भाषा अधिगम प्रयासपूर्ण होता है

Question number: 797

» Pedagogy of Language Development » Learning and Acquisition

Appeared in Year: 2012

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Question

भाषा शिक्षण की प्रक्रिया

Choices

Choice (4) Response

a.

विभिन्न विषयों की कक्षाओं में भी सम्भव है

b.

अत्यन्त जटिल प्रक्रिया है

c.

भाषा की कक्षा में ही सम्भव है

d.

घर में सम्भव नहीं है

Question number: 798

» Pedagogy of Language Development » Principles of Language Teaching

Appeared in Year: 2013

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Question

वाइगोत्स्की ने भाषा सीखने की प्रक्रिया में किस पर बल दिया है?

Choices

Choice (4) Response

a.

कक्षायी अभ्यासों पर

b.

सामाजिक अन्त: क्रिया पर

c.

पाठ्य पुस्तकों पर

d.

उचित आकलन पर

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