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सस्वर वाचन संबंधी कठिनाइयों से संबंधित उपचारी शिक्षण (Remedial Teaching Related to the Problems of Recitation Reading)

  • सर्वप्रथम शिक्षक को अपना आदर्श वाचन सभी दृष्टियों - शुद्ध एवं स्पष्ट उच्चारण, उचित स्वर, गति, यति, प्रवाह, आरोह-अवरोह आदि से आदर्श बनाना चाहिए।
  • जिन ध्वनियों एवं शब्दों के उच्चारण में अशुद्धियाँ होती हैं, उनके शुद्ध एवं स्पष्ट उच्चारण की शिक्षा और अभ्यास कराना।
  • शुद्ध एवं स्पष्ट उच्चारण और बाद में उचित स्वर, गति, यति, प्रवाह की दृष्टि से भी बालकों को प्रशिक्षित करना और सस्वर वाचन का अभयास कराना।
  • शब्दार्थ संबंधी कठिनाइयों को दूर करना और अर्थ ग्रहण की योग्यता बढ़ाना।
  • अच्छे-अच्छे अवतरणों का चयन कर वाचन कराना, वाचन में रूचि उत्पन्न करना, अधिक वाचन के लिए प्रोत्साहित करना।

भाषा दोष (Language Defect)

  • यदि बालक अपने स्वर यंत्रों पर नियंत्रण नहीं रख पाता, तो उसमें भाषा दोष उत्पन्न हो जाता है।
  • भाषा दोष से ग्रसित बालक समाज से कतराने लगते हैं। उनमें हीनता की भावना का विकास हो जाता है और वे सामान्यत: अन्तर्मुखी स्वभाव के हो जाते हैं।
  • भाषा दोष शैक्षिक विकास को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।

मुख्यत: भाषा दोष निम्नलिखित प्रकार के होते हैं

  1. ध्वनि परिवर्तन
  2. अस्पष्ट उच्चारण
  3. हकलाना
  4. तुतलाना
  5. तीव्र अस्पष्ट वाणी
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