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उच्चारण संबंधी दोषों के निराकरण में सहायक ध्वनि यंत्र एवं दृश्य-श्रव्य उपकरण (Useful musical and audio-visual aids to remove errors in Pronunciation)

  • ध्वनि यंत्रों का चित्र।
  • सिर एवं ग्रीवा का मॉडल, जिसमें उच्चारण स्थल दर्शाए गए हों।
  • दर्पण (जिसमें उच्चारण करते समय बालक अपने उच्चारण स्थल देख सकें) ।
  • ग्रामोफोन (शुद्ध उच्चारण के लिए) ।
  • लिंग्वाफोन (शुद्ध उच्चारण की शिक्षा के लिए) ।
  • टेपरिकॉर्डर (कठिन उच्चारणों के आदर्श उच्चारण के अभ्यास के लिए) ।

कायमोग्राम अल्पप्राण महाप्राण, घोष-अघोष, स्पर्श-संघर्षों की मात्रा आदि की शिक्षा के लिए यह उपकरण बड़ा ही उपादेय है।

कृत्रिम तालु ध्वनियों के शुद्ध एवं सटीक उच्चारण के लिए यह उपकरण जीभ के ऊपर तालु पर रखा जाता है।

एक्स-रे स्वरों एवं व्यंजनों के उच्चारण में जीभ की सही… (48 more words) …

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उच्चारण दोष के कारण (Reasons of Pronunciation Defect)

  • शारीरिक कारण
  • वर्णों के उच्चारण का अज्ञान हिन्दी भाषा की एक विशेषता यह भी है कि उसका जैसा अक्षर विन्यास है, ठीक वैसे ही उच्चारित भी की जाती है। इसके बावजूद अज्ञानवश वर्णों व शब्दों के सही रूप कुछ लोग उच्चारित नहीं कर पाते हैं जैसे आमदनी को आम्दनी कहना, खींचने को खेंचना कहना, प्रताप को परताप कहना, वृक्ष को व्रक्ष कहना, वीरेन्द्र को वीरेन्दर कहना आदि।
  • क्षेत्रीय बोलियों का प्रभाव कहावत है कि ‘कोस-कोस पर पानी बदले, दर कोस पर बानी।’ अर्थात् प्रत्येक दस कोस (बीस मील) पर बानी अर्थात् वाणी बदल जाती है। वास्तव में भाषा का रूप… (557 more words) …

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