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बोलचाल का सिद्धान्त (Theory of Conversion) - भाषा शिक्षण के सिद्धान्त (Theories of Language Teaching)

भाषा शिक्षण बोलचाल के माध्यम से होनी चाहिए। इससे भाषा सीखने में कम समय लगता है और इस प्रकार प्राप्त ज्ञान अधिक स्थायी रहता है साथ ही इससे बालकों की सर्जनात्मक शक्ति एवं अभिव्यक्ति कौशल में भी वृद्धि होती है।

भाषा शिक्षण विधियों के गुण दोष (Merits and Demerits of Language Teaching Methods)

उपरोक्त बताई गई सभी विधियों के अपने-अपने गुण एवं दोष हैं।

हमें यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि इनमें से प्रत्येक का सिद्धान्त व व्यवहार के स्तर पर खास ऐतिहासिक संदर्भ में और खास जरूरतों को पूरा करने के क्रम में विकास हुआ। व्याकरण-अनुवाद (ग्रामर-ट्रान्सलेशन) तरीका व्यवहारवादी मनोवैज्ञानिक और संरचनावादी भाषा विज्ञान के तहत औपनिवेशिक ताकतों की जरूरत पूरा करने के क्रम में जन्मा और पनना। कुछ भी हो, यह तरीका हमें यह जरूर बताता है कि कैसे एक साहित्यिक भाषा सीखने के लिए केवल विषय वस्तु तथा पूर्णता लिए हुए पाठ पर होना चाहिए। यदि आज हम इस… (91 more words) …

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चॉम्स्की का भाषा अर्जित करने का सिद्धान्त (Chomsky’s Theory of Language Acquisition) - भाषा शिक्षण के सिद्धान्त (Theories of Language Teaching)

चॉम्स्की का कहना है कि बच्चे शब्दों की निश्चित संख्या में कुछ निश्चित नियमों का अनुकरण करते हुए वाक्यों का निर्माण करना सीख जाते हैं। इन शब्दों से नये-नये वाक्यों एवं शब्दों का निर्माण होता है। इन वाक्यों का निर्माण बच्चे जिन नियमों के अन्तर्गत करते हैं उन्हें चॉम्स्की ने जेनेरेटिव ग्रामर की संज्ञा प्रदान की है।

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