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जीवन समन्वय का सिद्धान्त (Theory of Life Coordination) - भाषा शिक्षण के सिद्धान्त (Theories of Language Teaching)

मनोवैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि बच्चे उन विषयों एवं क्रियाओं में अधिक रूचि लेते हैं, जो उनके वास्तविक जीवन से संबंधित होती हैं। अत: अध्यापक को चाहिए कि वह बच्चों को पढ़ाने के लिए जिस सामग्री का चयन करे, उसका संबंध बच्चों के जीवन से अवश्य हो।

शिक्षण सूत्रों का सिद्धान्त (Theory of Teaching Formula) - भाषा शिक्षण के सिद्धान्त (Theories of Language Teaching)

शिक्षण के कुछ सामान्य सूत्र हैं जिनके अनुसार शिक्षण कार्य करने से बच्चों को सीखने में सरलता, सुगमता और स्थायित्व प्राप्त होता है, जैसे - ‘सरल से कठिन की ओर’, ‘ज्ञात से अज्ञात की ओर’, ‘मूर्त से अमूर्त की ओर’, ‘विशिष्ट से सामान्य की ओर’, ‘आगमन से निगम की ओर’, ‘विश्लेषण से संश्लेषण की ओर’ आदि। शिक्षण के इन सूत्रों का आधार और पालन करने से शिक्षण अधिक प्रभावकारी होता है।

ध्यान देने योग्य बातें (Things to Remember)

इसमें कोई शक नहीं कि प्रत्येक शिक्षक सामाजिक-मनोवैज्ञानिक, भाषिक और कक्षा की विविधता के अनुसार पढ़ाने का अपना विशिष्ट तरीका विकसित कर लेता है। नई पाठ्यचर्चा को शिक्षक के सशक्तीकरण पर ध्यान देना होगा, ताकि वह कक्षा में अपने स्तर पर पहलकदमी कर सके। कुछ मुख्य बातें जिन पर गौर करना जरूरी है, निम्नलिखित हैं

  • सीखने वाला पढ़ाने का कोई भी तरीका हो, शिक्षार्थी को कोरी स्लेट नहीं समझना चाहिए। उसे पठन-पाठन प्रक्रिया के केन्द्र में होना चाहिए। उसकी संज्ञानात्मक सामर्थ्य व अभिरूचियों को गौर करने के उपरान्त शिक्षक को पढ़ाने के उचित तरीके पर कार्य करना चाहिए।
  • रूख शिक्षक… (208 more words) …

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